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MP News: दतिया में भाजपा को बड़ा झटका! 20 हजार वोट खिसके, डेढ़ साल में ग्वालियर-चंबल की दूसरी उपचुनाव हार

Mon, 03 Aug 2026 08:19 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Mon, 03 Aug 2026 08:19 PM IST
सार

दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। कम मतदान के बीच भाजपा को सबसे बड़ा नुकसान हुआ, जबकि कांग्रेस सीट बचाने में सफल रही और आजाद समाज पार्टी ने तीसरे मोर्चे के रूप में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। 20 माह में भाजपा को ग्वालियर-चंबल में दूसरे उपचुनाव में हार मिली हैं। 

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MP News: Congress makes a comeback in Datia; BJP loses 20,000 votes; Azad Samaj Party alters the electoral ari
दतिया उपचुनाव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने जिले की राजनीति की नई तस्वीर पेश कर दी है। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों से हराकर सीट पर कब्जा कर लिया। कांग्रेस को 66,757 (42.39%) वोट मिले, जबकि भाजपा 60,741 (38.57%) वोटों पर सिमट गई। सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यह रहा कि 2023 के विधानसभा चुनाव की तुलना में भाजपा के वोटों में सबसे अधिक गिरावट दर्ज हुई, जबकि आजाद समाज पार्टी ने तीसरे मोर्चे के रूप में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। 
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2023 के विधानसभा चुनाव में दतिया में 1,76,942 वोट पड़े थे। इस बार उपचुनाव में कुल 1,57,499 मत पड़े। यानी 19,443 वोट कम पड़े। मतदान में गिरावट का असर दोनों प्रमुख दलों के वोटों पर दिखाई दिया, लेकिन भाजपा को इसका ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के डॉ. नरोत्तम मिश्रा को 81,235 वोट मिले थे। उपचुनाव में कम मतदान से भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को केवल 60,741 वोट मिले। यानी भाजपा को 20,494 वोटों का सीधा नुकसान हुआ। वहीं, कांग्रेस के राजेंद्र भारती को 2023 में 88,977 वोट मिले थे। उपचुनाव में घनश्याम सिंह को 66,757 वोट मिले, यानी कांग्रेस के वोट भी 22,220 कम हुए। हालांकि, कम मतदान के बावजूद कांग्रेस अपनी बढ़त बनाए रखने में सफल रही और सीट जीत ली।
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तीसरे मोर्चे ने बदला मुकाबले का समीकरण
उपचुनाव में आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी दामोदर यादव को 22,527 वोट (14.30%) मिले। यह प्रदर्शन चुनाव का सबसे बड़ा राजनीतिक फैक्टर माना जा रहा है। तीसरे मोर्चे की मजबूत मौजूदगी ने भाजपा और कांग्रेस दोनों के पारंपरिक वोट बैंक को प्रभावित किया। बताया जा रहा है कि दामोदर यादव के साथ ही अन्य ओबीसी और दलित वोट लेने में सफल रहें। 

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नोटा भी पीछे छूटा
2023 में NOTA को 1,452 वोट मिले थे, जबकि इस बार NOTA पर सिर्फ 456 वोट (0.29%) पड़े। यानी मतदाताओं ने इस बार नोटा की बजाय विकल्प के रूप में अन्य उम्मीदवारों को अधिक प्राथमिकता दी। 


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20 माह में ग्वालियर-चंबल में दूसरी हार 
भाजपा को 20 माह में ग्वालियर-चंबल में दो उपचुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। इससे पहले नवंबर 2024 में विजयपुर सीट पर उपचुनाव हुए थे। उसमें कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए और सरकार में मंत्री रामनिवास रावत को मुकेश मल्होत्रा ने चुनाव हराया था। मुकेश मल्होत्राको रावत सात हजार से ज्यादा वोट मिले थे। इसके बाद अब दतिया में फिर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। 

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नरोत्तम की तुलना में कम मार्जिन से आशुतोष की हार 
दतिया उपुचनाव में भाजपा 2023 की नरोत्तम मिश्रा की हार से कम मार्जिन से हारी हैं। पिछली बार नरोत्तम मिश्रा करीब 7700 मतों से हारे थे, इस बार आशुतोष तिवारी 6019 मत से पीछे रहें। यानी 1700 कम वोट से भाजपा की हार हुई। वहीं, दतिया में कुल मतदान 71.42 प्रतिशत दर्ज हुआ। पुरुषों का मतदान 74.05 प्रतिशत और महिलाओं का 68.48 प्रतिशत रहा। यानी 5.57 प्रतिशत कम महिलाएं वोट देने आए। वहीं, शहर में कम वोटिंग दर्ज की गई। इसके अलावा इस बार भाजपा को कांग्रेस से करीब चार प्रतिशत वोट कम मिले हैं। जानकारों का कहना है कि इससे साफ है कि भाजपा वोटरों को घर से निकालने में सफल नहीं हो पाई।  इसे स्थानीय कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की उदासीनता और नाराजगी के कारण के रूप में देखा जा रहा है। 

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लोधी वोटर ने कम किया हार का अंतर 
दतिया में तीसरे राउंड से कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने बढ़त बना ली थी। यह बढ़त 12वें राउंड में भाजपा के आशुतोष तिवारी 12607 वोट से पीछे चल रहे थे। इसके बाद 13वें राउंड से लीड कम होकर 11054 हुई। इसके बाद 14वें राउंड में लीड 7540 और 15वें राउंड में लीड कम होकर 6020 पर आ गई। यह वोट बसई इलाके का है। यहां पर पिछली बार नरोत्तम को कम वोट मिले थे। लोधी बहुल इस क्षेत्र में दूसरी जाति के लोग भी रहते हैं। यहां पर भाजपा ने जातिगत समीकरण साधते हुए नेताओं को जिम्मेदारी दी थी। दो राउंड में ही जीत का अंतर आधा होने से साफ है कि भाजपा बसई में अपनी रणनीति में सफल रही।
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