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MP News: सीएम बोले- प्रधानमंत्री मोदी का जल संरक्षण अभियान MP में बनेगा जन आंदोलन, एक लाख जल दूत होंगे तैयार
Thu, 27 Mar 2025 10:06 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, भोपाल, मध्य प्रदेश
न्यूज डेस्क, भोपाल, मध्य प्रदेश
Published by: आनंद पवार
Updated Thu, 27 Mar 2025 10:06 PM IST
सार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जल संरक्षण अभियान को मध्यप्रदेश में जन आंदोलन बनाने का संकल्प लिया है। 30 मार्च से शुरू होने जा रहा "जल गंगा संवर्धन अभियान" प्रदेशभर में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम साबित होगा।
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सीएम डॉ. मोहन यादव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जल संरक्षण अभियान को मध्यप्रदेश में जन आंदोलन बनाने का संकल्प लिया है। 30 मार्च से शुरू होने जा रहा "जल गंगा संवर्धन अभियान" प्रदेशभर में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक अभियान होगा। यह अभियान 30 जून यानी तीन महीने तक चलेगा और इसमें पंचायत, जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, पर्यावरण विभाग, नगरीय विकास, स्कूल शिक्षा, कृषि समेत 12 से अधिक विभागों की सहभागिता होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभियान मध्यप्रदेश को एक पानीदार प्रदेश बनाने के लक्ष्य को पूरा करेगा और जल संरक्षण में हर नागरिक की भागीदारी सुनिश्चित करेगा।
जल संरक्षण के लिए नागरिकों से अपील
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे जल संरक्षण के इस महाअभियान में सक्रिय रूप से भाग लें और इसे जन-आंदोलन बनाएं। उन्होंने कहा कि यह अभियान प्रदेश के जल संकट को हल करने में मददगार साबित होगा और यह सुनिश्चित करेगा कि हमारे जल स्रोत आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित रहें। जल गंगा संवर्धन अभियान" को लेकर प्रदेश में उत्साह और जोश की लहर है, और यह अभियान जल संकट को दूर करने में एक निर्णायक कदम साबित होगा।
ये भी पढ़ें- मुख्यमंत्री डॉ. यादव 28 मार्च को सिंगल क्लिक से श्रमिक परिवारों को करेंगे राशि का अंतरण
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अभियान का शुभारंभ उज्जैन से होगा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव इस अभियान की शुरुआत उज्जैन के क्षिप्रा तट से करेंगे, जहां वे जल देवता वरुण का पूजन और जलाभिषेक करेंगे। इस अभियान के दौरान प्रदेशभर में जल संरचनाओं का लोकार्पण किया जाएगा और मुख्यमंत्री हर दिन एक जल संरचना का उद्घाटन करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान से प्रदेश में भूजल स्तर में सुधार होगा और जल की बूंद-बूंद बचाने की आवश्यकता महसूस होगी, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि इस अभियान से न केवल जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि जल संकट को भी हल किया जाएगा।
जल संरक्षण के लिए तैयार की कई नीतियां
मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण के लिए वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों का पुनर्जीवन, जल संरचनाओं की मरम्मत और जल संरक्षण तकनीकों के अपनाने की दिशा में काम करने की बात की। प्रदेश में हर साल बढ़ते जल संकट को देखते हुए यह अभियान एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। प्रदेश सरकार ने पहले ही जल संरक्षण के लिए कई नीतियां तैयार की हैं और इस अभियान में 90 दिनों में 90 लघु और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं का लोकार्पण करने की योजना बनाई है।
ये भी पढ़ें- सीएम डॉ. यादव बोले- स्पेस पॉलिसी और प्रदेश में इसरो के केंद्र के लिए होंगे प्रयास
1 लाख जल दूत किए जाएंगे तैयार
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अभियान में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए प्रदेशभर में 1 लाख जलदूतों को निर्णय लिया है। यह जलदूत हर गांव और कस्बे में जल संरक्षण की दिशा में काम करेंगे और हर ग्राम पंचायत से 2-3 लोगों का चयन किया जाएगा। इसके अलावा, पंचायत स्तर पर तालाबों के निर्माण, जलाशयों की मरम्मत, जल स्रोतों का पुनर्जीवन, और नदियों की जल धाराओं को जीवित रखने के लिए काम किया जाएगा।
1 हजार तालाबों का निर्माण का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण को और प्रभावी बनाने के लिए राज्यभर में 1000 नए तालाबों का निर्माण करने का लक्ष्य रखा है। साथ ही नर्मदा नदी, 50 से अधिक नदियों और अन्य जल स्रोतों के वॉटर शेड क्षेत्र में जल संरक्षण के कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। नदियों और जलाशयों की रक्षा के लिए गेबियन संरचनाओं, ट्रेंच, चेकडेम और पौध-रोपण के कार्य भी अभियान का हिस्सा होंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नदियों के संरक्षण के लिए पानी चौपाल, जल संरचनाओं के रख-रखाव के लिए स्थानीय नागरिकों को जिम्मेदारी दी जाएगी।
अभियान की प्रमुख गतिविधियां
- तीन महीनों में प्रदेशभर में 5672 पुरानी बावड़ियों और कुओं का जीर्णोद्धार।
- 3751 नए कुओं का निर्माण।
- 7709 तालाबों का निर्माण और जीर्णोद्धार।
- 2925 चेक डेम और स्टॉप डेम निर्माण।
- 7158 रिचार्ज पिट और शॉफ्ट निर्माण।
- 1000 नए तालाबों का निर्माण पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा।
- नहरों के संरक्षण, जलाशयों से रिसाव रोकने, और फ्लशबार मरम्मत पर काम किया जाएगा।
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जल संरक्षण के लिए नागरिकों से अपील
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे जल संरक्षण के इस महाअभियान में सक्रिय रूप से भाग लें और इसे जन-आंदोलन बनाएं। उन्होंने कहा कि यह अभियान प्रदेश के जल संकट को हल करने में मददगार साबित होगा और यह सुनिश्चित करेगा कि हमारे जल स्रोत आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित रहें। जल गंगा संवर्धन अभियान" को लेकर प्रदेश में उत्साह और जोश की लहर है, और यह अभियान जल संकट को दूर करने में एक निर्णायक कदम साबित होगा।
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अभियान का शुभारंभ उज्जैन से होगा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव इस अभियान की शुरुआत उज्जैन के क्षिप्रा तट से करेंगे, जहां वे जल देवता वरुण का पूजन और जलाभिषेक करेंगे। इस अभियान के दौरान प्रदेशभर में जल संरचनाओं का लोकार्पण किया जाएगा और मुख्यमंत्री हर दिन एक जल संरचना का उद्घाटन करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान से प्रदेश में भूजल स्तर में सुधार होगा और जल की बूंद-बूंद बचाने की आवश्यकता महसूस होगी, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि इस अभियान से न केवल जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि जल संकट को भी हल किया जाएगा।
जल संरक्षण के लिए तैयार की कई नीतियां
मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण के लिए वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों का पुनर्जीवन, जल संरचनाओं की मरम्मत और जल संरक्षण तकनीकों के अपनाने की दिशा में काम करने की बात की। प्रदेश में हर साल बढ़ते जल संकट को देखते हुए यह अभियान एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। प्रदेश सरकार ने पहले ही जल संरक्षण के लिए कई नीतियां तैयार की हैं और इस अभियान में 90 दिनों में 90 लघु और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं का लोकार्पण करने की योजना बनाई है।
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1 लाख जल दूत किए जाएंगे तैयार
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अभियान में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए प्रदेशभर में 1 लाख जलदूतों को निर्णय लिया है। यह जलदूत हर गांव और कस्बे में जल संरक्षण की दिशा में काम करेंगे और हर ग्राम पंचायत से 2-3 लोगों का चयन किया जाएगा। इसके अलावा, पंचायत स्तर पर तालाबों के निर्माण, जलाशयों की मरम्मत, जल स्रोतों का पुनर्जीवन, और नदियों की जल धाराओं को जीवित रखने के लिए काम किया जाएगा।
1 हजार तालाबों का निर्माण का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण को और प्रभावी बनाने के लिए राज्यभर में 1000 नए तालाबों का निर्माण करने का लक्ष्य रखा है। साथ ही नर्मदा नदी, 50 से अधिक नदियों और अन्य जल स्रोतों के वॉटर शेड क्षेत्र में जल संरक्षण के कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। नदियों और जलाशयों की रक्षा के लिए गेबियन संरचनाओं, ट्रेंच, चेकडेम और पौध-रोपण के कार्य भी अभियान का हिस्सा होंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नदियों के संरक्षण के लिए पानी चौपाल, जल संरचनाओं के रख-रखाव के लिए स्थानीय नागरिकों को जिम्मेदारी दी जाएगी।
अभियान की प्रमुख गतिविधियां
- तीन महीनों में प्रदेशभर में 5672 पुरानी बावड़ियों और कुओं का जीर्णोद्धार।
- 3751 नए कुओं का निर्माण।
- 7709 तालाबों का निर्माण और जीर्णोद्धार।
- 2925 चेक डेम और स्टॉप डेम निर्माण।
- 7158 रिचार्ज पिट और शॉफ्ट निर्माण।
- 1000 नए तालाबों का निर्माण पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा।
- नहरों के संरक्षण, जलाशयों से रिसाव रोकने, और फ्लशबार मरम्मत पर काम किया जाएगा।
