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MP News: नर्मदा परिक्रमा पथ के आश्रय स्थलों पर होगा 7.50 लाख पौधों का रोपण, ड्रोन से होगी निगरानी

Wed, 09 Jul 2025 07:31 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Wed, 09 Jul 2025 07:31 PM IST
सार

 मध्यप्रदेश में 'एक पेड़ मां के नाम 2.0' अभियान के तहत नर्मदा परिक्रमा मार्ग के आश्रय स्थलों पर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। प्रदेश सरकार 15 जुलाई से 15 अगस्त तक विशेष पौधरोपण अभियान चलाएगी, जिसमें मनरेगा परिषद की मदद से 16 जिलों के 233 स्थलों की लगभग 1000 एकड़ भूमि पर 43 करोड़ रुपये की लागत से करीब 7.50 लाख पौधे लगाए जाएंगे। 

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MP News: 7.50 lakh saplings will be planted at the shelters of Narmada Parikrama Path, monitoring will be done
मध्य प्रदेश में पौधरोपण अभियान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पर्यावरण, जल और प्रकृति संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'एक पेड़ मां के नाम 2.0' अभियान के तहत मध्य प्रदेश सरकार नर्मदा परिक्रमा मार्ग के आश्रय स्थलों पर बड़े पैमाने पर पौधरोपण कराने जा रही है। इस कार्य में मनरेगा परिषद के माध्यम से तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, जबकि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने जरूरी दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। राज्य के 16 जिलों में स्थित 233 स्थानों की लगभग 1000 एकड़ भूमि पर 43 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से करीब 7.50 लाख पौधे लगाए जाएंगे। यह अभियान 15 जुलाई से 15 अगस्त तक संचालित होगा।
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इन जिलों में होंगा पौधरोपण
पौधरोपण अभियान अनूपपुर, डिंडोरी, मंडला, जबलपुर, नरसिंहपुर, सिवनी, बड़वानी, अलीराजपुर, धार, नर्मदापुरम, रायसेन, सीहोर, हरदा, देवास, खंडवा और खरगोन जिलों में चलाया जाएगा।
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ड्रोन और सैटेलाइट से होगी निगरानी
रोपण की पारदर्शिता और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए हर स्थल की निगरानी ड्रोन और सैटेलाइट इमेज से की जाएगी। इससे यह देखा जाएगा कि पौधे सही स्थान पर लगाए गए हैं या नहीं।
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भू-क्षेत्र के अनुसार दो श्रेणियों में होगा पौधरोपण
जिन स्थानों पर 2 एकड़ या उससे अधिक भूमि है, वहां सामान्य पद्धति से पौधरोपण किया जाएगा। जहां 1 एकड़ से अधिक और 2 एकड़ से कम भूमि है, वहां मियावाकी तकनीक का प्रयोग होगा। पौधों की सुरक्षा के लिए तारबंदी की भी व्यवस्था की जाएगी।


सॉफ्टवेयर आधारित चयन और गड्ढा खुदाई की समयसीमा
सभी स्थल ‘सिपरी’ सॉफ्टवेयर से चयनित किए जाएंगे। यदि किसी स्थान को सॉफ्टवेयर अनुपयुक्त बताता है या वहां स्थायी जल स्रोत नहीं है, तो वहां पौधरोपण नहीं किया जाएगा। पौधरोपण शुरू होने से पहले 14 जुलाई तक गड्ढों की खुदाई, फेंसिंग, स्थल निरीक्षण और सभी स्वीकृतियां पूरी कर ली जाएंगी।
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