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MP News: 40 हजार टन गेहूं सड़ा, 150 करोड़ पर सवाल, दिग्विजय ने CM को लिखा पत्र,घुन घोटाले की EOW जांच की मांग
Wed, 15 Apr 2026 06:22 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Wed, 15 Apr 2026 06:22 PM IST
सार
सीहोर और रायसेन के गोदामों में 40 हजार टन गेहूं सड़ने और करीब 150 करोड़ के नुकसान के मामले में दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर EOW जांच की मांग की है। आरोप है कि किराए के खेल में अनाज जानबूझकर रोका गया और बाद में जिम्मेदारी से बचने के लिए शिफ्ट किया गया।
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पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश में कथित अनाज घोटाले को लेकर सियासत तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर करीब 150 करोड़ रुपए के ‘घुन घोटाले’ की जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो (EOW) से कराने की मांग की है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के संसदीय क्षेत्र से जुड़े सीहोर और रायसेन जिलों के निजी गोदामों में रखा करीब 40 हजार टन गेहूं खराब हो गया। यह गेहूं लंबे समय तक गोदामों में पड़ा रहा, जिससे उसमें घुन लग गया और वह उपयोग के लायक नहीं बचा।
किराए के खेल में फंसा अनाज
आरोप है कि 2017 से 2021 के बीच इस गेहूं को जानबूझकर गोदामों में वर्षों तक रखा गया, ताकि निजी गोदाम मालिकों को हर महीने किराया मिलता रहे। जबकि नियम के अनुसार इसे 8-10 महीने में हटा लिया जाना चाहिए था।
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जिम्मेदारी से बचने के लिए शिफ्टिंग का खेल
जब गेहूं पूरी तरह खराब हो गया, तो इसे चुपचाप निजी गोदामों से हटाकर रायसेन के सरकारी वेयरहाउस में शिफ्ट कर दिया गया, ताकि निजी मालिकों पर कार्रवाई न हो और जिम्मेदारी सरकारी सिस्टम पर डाली जा सके।
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सरकारी खजाने को दोहरी चोट
इस पूरे मामले में एक तरफ करीब 100 करोड़ रुपए का गेहूं बर्बाद हो गया, वहीं दूसरी तरफ गोदाम किराया, रखरखाव और परिवहन के नाम पर 150 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च कर दिए गए। यानी सरकार को दोहरा नुकसान उठाना पड़ा।दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया है कि इसमें गोदाम संचालकों, अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत है। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की EOW जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई और नुकसान की वसूली की मांग की है।
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किराए के खेल में फंसा अनाज
आरोप है कि 2017 से 2021 के बीच इस गेहूं को जानबूझकर गोदामों में वर्षों तक रखा गया, ताकि निजी गोदाम मालिकों को हर महीने किराया मिलता रहे। जबकि नियम के अनुसार इसे 8-10 महीने में हटा लिया जाना चाहिए था।
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जिम्मेदारी से बचने के लिए शिफ्टिंग का खेल
जब गेहूं पूरी तरह खराब हो गया, तो इसे चुपचाप निजी गोदामों से हटाकर रायसेन के सरकारी वेयरहाउस में शिफ्ट कर दिया गया, ताकि निजी मालिकों पर कार्रवाई न हो और जिम्मेदारी सरकारी सिस्टम पर डाली जा सके।
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सरकारी खजाने को दोहरी चोट
इस पूरे मामले में एक तरफ करीब 100 करोड़ रुपए का गेहूं बर्बाद हो गया, वहीं दूसरी तरफ गोदाम किराया, रखरखाव और परिवहन के नाम पर 150 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च कर दिए गए। यानी सरकार को दोहरा नुकसान उठाना पड़ा।दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया है कि इसमें गोदाम संचालकों, अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत है। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की EOW जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई और नुकसान की वसूली की मांग की है।
