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MP Board Result: कारपेंटर की बेटी बनी स्टेट टॉपर, झुग्गी बस्ती में रहकर की मेहनत; देश की सेवा करना चाहती है
Wed, 15 Apr 2026 03:21 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Wed, 15 Apr 2026 03:21 PM IST
सार
भोपाल की साधारण परिवार से आने वाली चांदनी विश्वकर्मा ने 500 में 494 अंक हासिल कर एमपी बोर्ड 12वीं में स्टेट टॉप किया। कारपेंटर पिता और सफाईकर्मी मां की बेटी चांदनी ने झुग्गी बस्ती में रहकर कठिन मेहनत की और रोज 6-8 घंटे पढ़ाई कर यह मुकाम हासिल किया।अब उनका सपना भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल बनकर देश सेवा करना है।
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चांदनी विश्वकर्मा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश बोर्ड के 10वीं-12वीं के रिजल्ट में इस बार एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी को प्रेरित कर दिया। राजधानी भोपाल के गुरुदेव शिक्षा केंद्र स्कूल की छात्रा चांदनी विश्वकर्मा ने 500 में से 494 अंक हासिल कर पूरे प्रदेश में टॉप किया है वे कॉमर्स स्ट्रीम की छात्रा रही हैं।
संघर्ष भरा सफर, लेकिन हौसले रहे बुलंद
चांदनी का परिवार आर्थिक रूप से बेहद साधारण है। उनके पिता कारपेंटर का काम करते हैं, जबकि मां स्कूल में साफ-सफाई का काम कर परिवार का सहारा बनती हैं। छोटी सी बस्ती में रहने वाली चांदनी ने सीमित संसाधनों के बावजूद पढ़ाई से कभी समझौता नहीं किया।
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मेहनत ने बदली किस्मत
कठिन हालात, संसाधनों की कमी और संघर्षों के बीच चांदनी ने दिन-रात मेहनत कर यह मुकाम हासिल किया। उनका यह रिजल्ट साबित करता है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती।
यह भी पढ़ें-कैसे रहे 10वीं और 12वीं के नतीजे, किस संकाय में किसने किया टॉप; ग्राफिक्स से समझें परिणाम
अब सेना में अफसर बनने का सपना
स्टेट टॉपर बनने के बाद चांदनी ने कहा कि उनका सपना भारतीय सेना में शामिल होकर लेफ्टिनेंट कर्नल बनना है। वे देश की सेवा करना चाहती हैं और अपने माता-पिता का नाम रोशन करना चाहती हैं। चांदनी विश्वकर्मा की सफलता न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के लिए गर्व की बात है। उनका संघर्ष और उपलब्धि उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों में भी बड़े सपने देखते हैं।
यह भी पढ़ें-पन्ना की प्रतिभा बनीं 10वीं में MP की टॉपर, 500 में 499 अंक लाकर रचा इतिहास; IAS बनने का सपना
पहले से ही टॉपर बनने का था सपना
चांदनी विश्वकर्मा ने अपनी सफलता का राज बताते हुए कहा कि उन्होंने शुरू से ही टॉपर बनने का लक्ष्य तय कर लिया था और पहले दिन से ही उसी दिशा में मेहनत शुरू कर दी थी। वह रोजाना 6 से 8 घंटे पढ़ाई करती थीं और अपने टारगेट को लेकर बेहद अनुशासित रहीं।उन्होंने बताया कि कॉमर्स के साथ उनका मैथ्स भी था, लेकिन मैथ्स उनका थोड़ा कमजोर विषय था। इसी वजह से उन्होंने इस पर ज्यादा फोकस किया और अतिरिक्त मेहनत कर कमजोरी को ताकत में बदला। वहीं कॉमर्स स्ट्रीम में जहां ज्यादातर छात्र अकाउंट्स से डरते हैं, चांदनी के लिए वही सबसे पसंदीदा विषय रहा। अकाउंट्स में उनकी मजबूत पकड़ ने ही उन्हें टॉप तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई।
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संघर्ष भरा सफर, लेकिन हौसले रहे बुलंद
चांदनी का परिवार आर्थिक रूप से बेहद साधारण है। उनके पिता कारपेंटर का काम करते हैं, जबकि मां स्कूल में साफ-सफाई का काम कर परिवार का सहारा बनती हैं। छोटी सी बस्ती में रहने वाली चांदनी ने सीमित संसाधनों के बावजूद पढ़ाई से कभी समझौता नहीं किया।
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मेहनत ने बदली किस्मत
कठिन हालात, संसाधनों की कमी और संघर्षों के बीच चांदनी ने दिन-रात मेहनत कर यह मुकाम हासिल किया। उनका यह रिजल्ट साबित करता है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती।
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अब सेना में अफसर बनने का सपना
स्टेट टॉपर बनने के बाद चांदनी ने कहा कि उनका सपना भारतीय सेना में शामिल होकर लेफ्टिनेंट कर्नल बनना है। वे देश की सेवा करना चाहती हैं और अपने माता-पिता का नाम रोशन करना चाहती हैं। चांदनी विश्वकर्मा की सफलता न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के लिए गर्व की बात है। उनका संघर्ष और उपलब्धि उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों में भी बड़े सपने देखते हैं।
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पहले से ही टॉपर बनने का था सपना
चांदनी विश्वकर्मा ने अपनी सफलता का राज बताते हुए कहा कि उन्होंने शुरू से ही टॉपर बनने का लक्ष्य तय कर लिया था और पहले दिन से ही उसी दिशा में मेहनत शुरू कर दी थी। वह रोजाना 6 से 8 घंटे पढ़ाई करती थीं और अपने टारगेट को लेकर बेहद अनुशासित रहीं।उन्होंने बताया कि कॉमर्स के साथ उनका मैथ्स भी था, लेकिन मैथ्स उनका थोड़ा कमजोर विषय था। इसी वजह से उन्होंने इस पर ज्यादा फोकस किया और अतिरिक्त मेहनत कर कमजोरी को ताकत में बदला। वहीं कॉमर्स स्ट्रीम में जहां ज्यादातर छात्र अकाउंट्स से डरते हैं, चांदनी के लिए वही सबसे पसंदीदा विषय रहा। अकाउंट्स में उनकी मजबूत पकड़ ने ही उन्हें टॉप तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई।
