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MP Election: जिन 79 सीटों पर BJP ने प्रत्याशी घोषित किए, इनमें 52 पर मिली थी बड़ी हार, दो पर करीबी था मुकाबला
Tue, 26 Sep 2023 05:47 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: अरविंद कुमार
Updated Tue, 26 Sep 2023 05:47 PM IST
सार
MP Election 2023: मध्यप्रदेश में भाजपा ने अब तक तीन बार में 79 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की है। इनमें ज्यादातर सीटें ऐसी हैं, जहां भाजपा ने साल 2018 में हार का सामना किया। वहीं, कुछ सीटें ऐसी हैं जहां सांसदों को उतारा गया है।
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79 सीटों पर BJP ने प्रत्याशी घोषित किए
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्यप्रदेश भाजपा ने अब तक 79 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। इनमें केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, प्रहलाद पटेल और फग्गन सिंह कुलस्ते समेत सात सांसदों के नाम हैं। साथ ही राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को भी विधानसभा चुनावों में उतारा गया है। पार्टी ने अब तक जिन 79 सीटों के लिए प्रत्याशी घोषित किए हैं, उनमें से सिर्फ तीन सीटों पर भाजपा के विधायक थे। उनके टिकट काटे गए हैं, शेष सभी 76 सीटों पर कांग्रेस और बसपा का कब्जा था।
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तीन सूची में 79 सीटों पर आए नामों का विश्लेषण किया तो पता चला कि 2018 में भाजपा ने इनमें से पांच सीटों पर जीत हासिल की थी। पार्टी के पास पांच मैहर, सीधी, नरसिंहपुर, शाजापुर और झाबुआ की सीटें थी। शेष 73 सीटों पर कांग्रेस और एक पर बसपा का कब्जा था। इन 79 सीटों में से सात सीटों पर उपचुनाव भी हुए। दो सीटों पर उपचुनाव 2019 में हुए, जिसमें झाबुआ की सीट को कांग्रेस ने भाजपा से छीन लिया था।
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वहीं, छिंदवाड़ा सीट पर कमलनाथ ने जीत हासिल की थी। पांच सीटों पर 2020 में उपचुनाव हुए, जब कांग्रेस के विधायकों ने पाला बदलकर भाजपा की सदस्यता ली थी। यह पांचों सीटें कांग्रेस ने जीती थी। इनमें शाजापुर की सीट शामिल थी, जो भाजपा नेता मनोहर ऊंटवाल के निधन से खाली हुई थी। इसे कांग्रेस के विपिन वानखेड़े ने भाजपा से छीना था।
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दो सीटों पर करीबी रहा था मुकाबला
साल 2018 के नतीजों की बात करें तो इन 79 में से दो सीटों पर भाजपा को एक हजार से कम वोट से हार का सामना करना पड़ा था। छतरपुर की राजनगर सीट पर कांग्रेस के विक्रम सिंह नाती राजा ने महज 732 वोट से जीत हासिल की थी। पूर्व मंत्री बाला बच्चन सिर्फ 932 वोट से बड़वानी की राजपुर (एसटी) सीट निकाली थी। नौ सीटों पर जीत का अंतर एक से पांच हजार के बीच था।
इनमें शिवपुरी की पिछोर, अशोकनगर की चंदेरी, सागर की देवरी, छतरपुर, दमोह की पथरिया, पन्ना की गुन्नौर, झाबुआ की पेटलावद, उज्जैन की तराना और घट्टिया विधानसभा सीटें शामिल थीं। झाबुआ की पेटलावद सीट पर हार का अंतर सिर्फ 5000 वोट का था।
