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मियां भोपाली के झोले-बतोले: एमपी में कांगरेस..भगवा के चक्कर में कहीं..!

Sat, 08 Apr 2023 01:17 PM IST
Ajay Bokil अजय बोकिल
Updated Sat, 08 Apr 2023 01:17 PM IST
सार

पिछले दिनों कांग्रेस का दफ्तर भी भगवामय हो गया। इससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या अगले चुनावों में कांग्रेस भगवा रंग का साथ लेकर कांग्रेस को चुनौती दे रही है?   

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Miya Bhopali Jhole Batole Saffronization of MP Congress, Will It Work In Its Favour
अमर उजाला ग्राफिक्स - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

को खां, मधपिरदेश में कांगरेस को केसरिया रंग में रंगने का दांव अगले चुनाव में कामयाब होगा या फेल होगा? ये सवाल हर आमो-खास की जबान पे हे। बीते 2 अपरैल को जिस तरह पिरदेश कांगरेस के दफ्तर को भगवा झंडियों से सजाया गया ओर चारों तरफ हिंदू धरम की हवा बनाई गई, उसका मेसिज ये ई जा रिया हे के अब सेक्युलर कांगरेस भी बीजेपी की माफिक केसरिया चोला पेनने में गुरेज नई कर रई। पार्टी ने अब पुजारी पिरकोष्ठ भी बना दिया हेगा।

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मियां, मधपिरदेश में जेसे जेसे विधानसभा चुनाव करीब आते जा रिए हें, वेसे वेसे सियासी रंगत भी बदलती जा रई हे। मुखमंतरी शिवराजसिंह चोहान ओर पिरदेश कांगरेस अध्यक्ष ओर पूर्व मुखमंतरी कमलनाथ के बीच जुबानी जंग सड़कछाप बयानी तक आन पोंची हे तो दोनो सियासी पार्टियों में खींचतान अक्सरियत यानी हिंदू वोटो को लेके मची हे। बीजेपी हर मुमकिन हिंदू वोटों को पटाने में लगी हे। सो, आादिवासी, महिला, नोजवान, ओर दलितों से लेके समाज के हर तबके को कोई न कोई रेवड़ी बांटी जा रही हे। जात के हिसाब बोर्ड बनाने का काम तो शिवराजजी इस तूफानी रफ्तार से करे जा रिए हें के खुद सरकार की समझ नई आ रिया के ये हो क्या रिया हे। दरअसल बीजेपी को भीतर ई भीतर एंटी एनकमबेंसी का खुटका लगा हुआ हे। इत्ती रेवडि़यां बांट चुकने का बाद भी कहीं वोटर चुनाव में दगा तो नई दे जाएगा, ये सोच सोच के बीजेपी नेता परेशान हें।
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उधर कांगरेस ये मुगालता पाले बेठी हे के बीजेपी से नाराज लोग आखिर चुनाव में उसी को वोट देंगे। मगर इस कोशिश में कांगरेस की ये इमेज आड़े आ रई हे के कांगरेस को हिंदुओं से ज्यादा मुसलमानों की फिकर रेती हे। इस इल्जाम को धोने वास्ते कांगरेस ने पिरदेश कार्यालय में ‘धरम संवाद’ का आयोजन करा। न्यू मार्केट से लेके पिरदेश कांग्रेस के दफ्तर तक केसरिया झंडे झंडियां लहरा रिए थे। गुमान हो रिया था कि कांगरेस के दफ्तर में कोई कथा पिरवचन तो नई होने जा रिए। खुलासा हुआ कि ये ‘धरम संवाद’ उन पंडे पुजारियों का था, जिनके पिरकोष्ठ का गठन कमलनाथजी के पेले करा था। इस पोरोगराम में पुजारियों ने मांग करी के मंदिरों के मामले में 1974 के पेले वाली स्थिति बहाल करी जाए। 1974 में सरकार ने कानून बना के हर मंदिर के संचालन  में कलेक्टर को शामिल कर िदया था। जब ज्यादा कोई खिलाफत में बोल नई पाया। कलेक्टर  की मदाखलत से पंडे पुजारी मंदिरों की जमीनों  का मनमाना इस्तेमाल नई कर पा रिए। कमलनाथ ने वादा करा कि खां, हमारी सराकर आ रई हे। हम पुराने कानून बदलके मंदिरों को पंडे पुजारियों के हवाले करेंगे। इसपे बीजेपी वाले भड़क गए ओर एक नेता तो कांगरेस को इच्छाधारी हिंदू बता दिया। जब चाहा भगवा ओढ़ा, जब चाहा छोड़ दिया। कांगरेस में दम हे तो मौलानाओं का सम्मेलन करके दिखाए। बीजेपी के एतराज पे कमलनाथ ने सवाल जड़ा के क्या बीजेपी के पास भगवा का ट्रेड मार्क हे? कोई भी जिसकी हिंदू धरम में आस्था हो, भगवा लहरा सकता हे।
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मियां, कांगरेस मान के चल रई हे के भगवा चोला पेन के वो बीजेपी के वोटों में सेंध लगा देगी। जबकि बीजेपी का मानना हे के कांगरेस के इन टोटकों से कुछ नई होगा। पब्लिक हे जो सब जानती हे। भगवा परचम बीजेपी के पास ई रेना हे। कांगरेस के लिहाज से खतरा ये हे के अगर उसने सेक्युलर चोला उतार दिया तो उसके हाथ से कहीं मुसलमान वोट भी छिटक जाएं। हिंदू उसपे कित्ता भरोसा करेंगे, कोई नई केह सकता। बहरहाल, कांगरेस ने जो दांव चला हे, उसमें दम तो हे पर खुटका ये भी हे के घर के चक्कर में कहीं घाट भी न सरक जाए।
 


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