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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Bhopal News ›   Miya Bhopali Jhole Batole Cheetah Project In Bhopali Slang

मियां भोपाली के झोले-बतोले: चीते जानवरों से तो दोस्ती कर लेंगे पर जंगली इंसानों का क्या?

Sat, 17 Sep 2022 03:24 PM IST
Ajay Bokil अजय बोकिल
Updated Sat, 17 Sep 2022 03:24 PM IST
सार

मध्यप्रदेश में अफ्रीका से चीतों का आगमन हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जन्मदिन पर चीतों को बाड़ों में छोड़ा। इस बड़ी खबर को भोपाली मियां ने अलग ही अंदाज में देखा और समझा। 

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Miya Bhopali Jhole Batole Cheetah Project In Bhopali Slang
अमर उजाला ग्राफिक्स - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

को खां, एमपी अपने गजब होने की हकीकत को एक बार फिर दोहरा रिया हे। देश में यूं तो शराध चल रिए हें पर मधपिरदेश में चीते लाने का जश्न मन रिया हे। सब ठीक रिया तो 17 सितंबर को पिरधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी नामीबिया से लाए गए विदेशी चीतों को एमपी के कूनो पालपुर अभयारण्य में छोड़ेंगे। पहली किस्त में आठ चीते खास हवाई जहाज से आ रिए हें। इनमें से मोदी तीन को क्वारंटीन बाड़े में छोड़ेंगे। एमपी की शिवराज सरकार को पूरा भरोसा हे के जो सूबा अब तक टाइगर स्टेट के नाम से मशहूर रिया हे वो मुस्तकबिल में चीता स्टेट के नाम मकबूल होगा। सारी तैयारी इसी बात की हेगी के पिरदेश में चीतों की आबादी बढ़े।

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मियां, कूनो पालपुर का घना जंगल पिरदेश के श्योपुर शिवपुरी जिलों के दर्मियां 750 वर्ग किलोमीटर में फेला हेगा। यहां शेर, भालू, तेंदुए जेसे तमाम जानवर पेले से रेते आए हें। अब इनमें उन चीतों का इजाफा भी होगा। पुराने जानवरों को नए दोस्त मिलेंगे या फिर वो नई दुश्मनी की वजह बनेंगे, खां, ये अभी देखने की बात हे। चीतों के लिए भी ये देस ओर हवा पानी भी अजनबी हे। मुमकिन हे के अफरीका के नामीबिया सा जंगल यहां न मिले। फिर भी सबको उम्मीद हे किे ये चीते लोकल माहोल में धीरे-धीरे ढल जाएंगे।

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बहरहाल नामीबिया से हिंदुस्तान तक साढ़े 8 हजार किमी का सफर इन चीतों के लिए आसान नई हेगा। उन्हें बेहोशी की दवा देकर पिंजरों में केद कर गवालियर लाया जाएगा। गवालियर से ये रोड से कूनो तक पोंचेंगे। वहीं मोदीजी इन्हें क्वारंटीन बाड़े में छोड़ेंगे। जहां ये 1 महीना रेंगे। उनकी सेहत ओर मिजाज की बारीकी से निगरानी करी जाएगी। उसके बाद ये चीते जंगल में छोड़े दिए जाएंगे। इत्ता ई नई इंडिया के साथ नामीबिया से भी इन चीतों की निगरानी होगी के इंडिया का माहोल इनको रास आ रिया हेगा के नई?

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खास बात ये भी हे के मोदीजी अमूमन अपनी सालगिरह पे अपनी मां के दीदार करने जाने हें या फिर किसी नई जगह पे जाते हेंगे। इस बार उन्होंने अपनी सालगिरह उन चीतों के बीच मनाने का फेसला करा हे, जिन्हें 75 साल पेले खुद हिंदुस्तानियों ने शिकार कर कर के मार डाला। लिहाजा इस खूबसूरत और दुनिया सबसे फुर्तीले जानवर की ये नई आमद हे।

मियां, अब सवाल ये हेगा के चीते एमपी की आबोहवा में घुल पाएंगे के नई? जंगल में अपने नए दोस्तों के साथ उनकी पटरी बेठ पाएगी या नई? कहीं इन सबमें शिकार को लेके मारकाट तो नई मचेगी? अभी तो जंगल महकमा चीतों की खुराक का खुद इंतजाम कर रिया हेगा। मगर आगे क्या होगा, इसपे सभी की निगाहें लगी हेंगी।

मियां, चीतों को बसाने को लेकर सोच तो सभी की अच्छी हे, तमन्ना भी माकूल हे मगर सबसे बड़ी चिंता हे अवेध शिकारियों की। मधपिरदेश में जंगल का राजा शेर तक इन जालिम शिकारियों की मार से नई बच पा रिया तो चीते खुद को किस हद तक बचा पाएंगे, केना मुश्किल हेगा। हालांकि जंगल महकमे ने इनकी हिफाजत के लिए बंदूकधारी गार्ड तेनात करे हें ओर कूनो इलाके में 150 चीता मित्र भी बनाए गए हें, जो लोगों को समझाइश देंगे के खां, चीता भोत खतरनाक जानवर नई हेगा। वो इंसानों पर हमला नई करता। लिहाजा उसकी हिफाजत करें ओर कूनो के जंगल में उन्हें फलने फूलने दें। उधर खबर आ रई हे के कूनो में जमीनों के भाव लपक के बढ़ रिए हें ओर अवेध शिकारियों ने इलाके की रेकी शुरू कर दी हेगी। चीते कूनो के जंगली जानवरों से तो पटरी बिठा लेंगे मगर इंसान के रूप में खतरनाक जानवर से केसे निपटेंगे, ये असल सवाल हेगा।

- बतोलेबाज

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw।co।in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

 

 

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