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मियां भोपाली के झोले-बतोले: महाकाल के दरबार में ‘राजा’ ओर ‘महाराजा’ की गुहार!

Sat, 06 May 2023 04:49 PM IST
Ajay Bokil अजय बोकिल
Updated Sat, 06 May 2023 04:49 PM IST
सार

दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया एक बार फिर आमने-सामने हैं। इस बार अर्जी लगी है महाकाल के दरबार में। दोनों की बयानबाजी इस समय मध्य प्रदेश राजनीति को गरमाए हुए हैं। 

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Miya Bhopali Jhole Batole Bhopali slang column digvijaya singh vs jyotiraditya scindia
अमर उजाला ग्राफिक्स - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

को खां, अपने एमपी में दिग्गी राजा ओर ‘महाराजा’ ज्योतिरादित्य सिंधिया की सियासी लड़ाई भगवान महाकाल के दरबार तक पोंच गई हे। महाकाल दोनो की सुन रिए हें ओर इसी साल सूबे में विधानसभा चुनाव होने हें। महाकाल की किरपा कोन पे बरसेगी, ये तो वक्त बताएगा पर जिस तरह से दोनो आला नेता एक दूसरे को गरिया रिए हें, उससे महाकाल के भक्त हेरान हें।

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मियां, राजा ओर महाराजा की ये लड़ाई यूं तो बरसो पुरानी हे। दिग्गी राजा यानी के कांग्रेस के नेता ओर माजी मुखमंतरी उस छोटी सी राघोगढ़ रियासत से राजा रिए, जो महाराजा सिंधिया दरबार में दरबारी हुआ करते थे। यूं देश आजादी का अमरित महोत्सव मना रिया हे पर भक्तों की राजभक्ति आज भी खतम नई हुई हेगी। कांगरेस में तो ये कुछ ज्यादा ही हे। तीस बरस पेले जब ज्योतिरादित्य के पिताश्री महाराजा माधवराव सिंधिया को ठेंगा बता के दिग्गी राजा एमपी के सीएम बन गए तब से दोनो खानदानों में ठनी हे। ‘राजा साब’ यानी के दिग्गी राजा इन दिनो बिखरी कांगरेस को एकजुट करने में जुटे हें। इसी सिलसिले में वो तीरथ नगरी उज्जेन में महाकाल के दर्शन कर आए। मीडिया ने सवाल करा के आपने महाकाल से क्या मांगा? दिग्गी बोले के हमने भगवान महाकाल से इत्ती दुआ करी के हे भगवान अब कांगरेस में आगे से कोई दूसरा ज्योतिरादित्य सिंधिया पेदा न हो। उनका मकसद महाराजा की ‘गद्दारी’ से था। दिग्गी यहीं पे नई रूके। उन्होंने ये भी बोला के एमपी में जब कमलनाथ की चुनी हुई सरकार को गिराया गया, उस समय बड़े-बड़े जमींदार, राजा-महाराजा लोग बिक गए। लेकिन न गरीब दलित विधायक बिका और न गरीब आदिवासी विधायक बिका। उन्होंने कहा कि गरीब विधायकों को बीजेपी ने खरीदने की कोशिश भी की लेकिन विधायकों ने पार्टी को धोखा नहीं दिया। यहां निशाना महाराज थे, जो अपने समर्थक विधायकों के साथ भाजपा के पाले में चले गए थे।

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खां, इससे इत्ता तो साफ हेगा के राजा साब अभी भी महाराज की बगावत की वजह से कांगरेस सरकार गिरने की फांस से उबर नई पाए हें। रेह रेह के उनका दरद उभर आता हे। राजा साब का मानना हेगा के ज्योतिरादित्य अपने बंदो के साथ कांगरेस में बने रेते तो कमलनाथ सरकार पांच साल चल जाती। मगर खुदा को कुछ ओर मंजूर था।

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मियां, उधर ज्योतिरादित्य को पक्का भरोसा हेगा के कांगरेस में उनकी तरक्की को रोकने में सबसे बड़ा रोड़ा दिग्गी राजा ही हेंगे। उन्होंने न तो ज्योतिरादित्य को पिरदेश कांगरेस अध्यक्ष बनने दिया ओर न ई राजसभा जाने दिया। सिंधिया का मानना हे के दिग्गी अपने लाडले बेटे जयवर्द्धन को आगे बढ़ाना चाहते हें। उस राह में ज्योतिरादित्य रोडा साबित हो रिए थे। लिहाजा दोनो में खुन्नस बरकरार हे।

इस लड़ाई में भगवान महाकाल बिला वजह उलझे हें। दोनो ई उनके भगत हें। उधर जब दिग्गी राजा ने ‘दूसरा ज्योतिरादित्य न होने देने की पिरारथना करी तो ज्योतिरादित्य ने भी लगे हाथ ट्विटर पर जवाब दे डाला। वेसे भी उज्जेन शहर उनके पुरखों की ग्वालियर रियासत का हिस्सा हुआ करता था। ज्योतिरादित्य ने लिखा के हे पिरभु दिग्विजय जेसे देश विरोधी ओर मधपिरदेश के बंटाढार भारत में पेदा न हों। वेसे बंटाढार लफ्ज राजा साब से यूं चिपका हे के हटते नई हट रिया।

मियां, अब सूबे में सियासी जंग का आलम ये हे के नेता लोग भगवान को भी नई बख्श रिए। उज्जेन में पिछले साल महाकाल लोक काॅरिडोर को लेके भी बीजेपी कांगरेस दोनो में जमकर जुबानी जंग हुई थी ओर दोनो ने इसकी किरेडिट लेने का कोई मोका नई छोड़ा था। वेसे महाकाल तो शिव हें। भोले भंडारी हें। कब किसपे मेहरबान हो जाएं कोई नई केह सकता। आगामी चुनाव में उसकी किरपा कोन पे बरसेगी, ये तो नतीजों से पता चलेगा।



- बतोलेबाज

 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw।co।in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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