भोपाल: ग्रामीण क्षेत्र में मुश्किल बढ़ने से रुका टीकाकरण, शहरी क्षेत्रों में ही लग रही 18+ वालों को वैक्सीन
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 18+ वालों के लिए टीकाकरण शुरू हुए 15 दिन से अधिक समय में बीत जाने पर भी ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को कोविड टीका नहीं लग सका है। इसकी वजह वैक्सीनेश की जटिल प्रक्रिया बताई जा रही है।
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कोरोना महामारी की दूसरी लहर का प्रकोप अभी थमा नहीं है। कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए सरकार तेजी से लोगों के टीकाकरण करने पर जोर दे रही है। एक मई से शुरू हुए कोविड टीकाकरण के तीसरे चरण में 18+ वालों को वैक्सीन लगाई जा रही है। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 18+ वालों के लिए टीकाकरण शुरू हुए 15 दिन से अधिक समय में बीत जाने पर भी ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को कोविड टीका नहीं लग सका है। इसकी वजह वैक्सीनेश की जटिल प्रक्रिया बताई जा रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्लाॅट बुकिंग की जटिल प्रक्रिया लोगों के टीकाकरण कराने में बाधा बन रही है। इसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले 18 वर्ष से अधिक उम्र के 2.50 करोड़ से अधिक लोगों को कोरोना की वैक्सीन नहीं लगाई जा सकी है। 18 साल से ऊपर के करीब 3.24 करोड़ युवाओं को अभी वैक्सीन लगाई जानी है, लेकिन वैक्सीन के लिए स्लॉट बुक करने की प्रक्रिया इतनी कठिन है कि उनमें से कई ऐसा नहीं कर पा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ लोग, जिनके पास स्मार्ट फोन और इंटरनेट है। वे ही लोग टीकाकरण के लिए रजिस्ट्रेशन करा सके हैं।
प्रदेश की राजधानी में कुछ पढ़े लिखे लोगों को भी वैक्सीनेशन के लिए स्लॉट बुक करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को ऐसा करने में कितनी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सुबह से शाम तक खाली पड़े रहते हैं वैक्सीनेशन सेंटर
बता दें कि शुरू में शहरी क्षेत्रों में भी वैक्सीन के प्रति लोगों का कम रुझान दिखाई दिया था, लेकिन बाद में काफी संख्या में लोगों ने टीका लगवाना शुरू कर दिया था। अब ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण को लेकर जागरूकता नहीं दिखाई दे रही है। कई केंद्र तो ऐसे हैं, जहां पर स्वास्थ्य विभाग की टीम सुबह से शाम तक बैठी रहती है, लेकिन टीका लगवाने कोई नहीं आता।
हालांकि, अब स्थानीय स्तर पर सरपंचों, जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों की मदद ली जा रही है।
