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भोपाल में संस्कृति बचाओ मंच की पहल: लव जिहाद को लेकर सामाजिक जागरूकता विशेष कार्यशाला आयोजित की
Thu, 01 May 2025 08:48 AM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Thu, 01 May 2025 08:48 AM IST
सार
राजधानी में संस्कृति बचाओ मंच द्वारा आयोजित विशेष कार्यशाला में सामाजिक जागरूकता को केंद्र में रखते हुए "लव जिहाद" जैसे संवेदनशील विषय पर चर्चा की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं, विशेषकर बेटियों और उनके अभिभावकों को भावनात्मक शोषण, सामाजिक धोखाधड़ी और महिला सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के प्रति सचेत करना था।
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संस्कृति बचाव मंच की कार्यशाला
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजधानी में लव जिहाद से बचाव के लिए संस्कृति बचाओ मंच की ओर से सामाजिक जागरूकता के लिए विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवा पीढ़ी, विशेष रूप से बेटियों और उनके अभिभावकों को सामाजिक चुनौतियों के प्रति सतर्क करना और उन्हें जागरूक करना था। कार्यक्रम का आयोजन संस्कृति बचाओ मंच की ओर से किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। संस्कृति बचाओ मंच के अनुसार, इस पहल के तहत युवाओं को सामाजिक धोखाधड़ी और भावनात्मक शोषण जैसी स्थितियों से बचने के उपाय बताए गए। साथ ही, महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी उपयोगी जानकारियां साझा की गईं।
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कार्यशाला में मौजूद वक्ताओं ने पारिवारिक संवाद, पारंपरिक मूल्यों और आत्मरक्षा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि माता-पिता की भूमिका सिर्फ पालन-पोषण तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें अपनी संतानों के सामाजिक व्यवहार पर भी सतत निगरानी रखनी चाहिए। कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि धार्मिक और सांस्कृतिक संस्थानों को समाज को जागरूक करने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। समाज में उत्पन्न हो रहे कई संवेदनशील मुद्दों पर संवाद और जागरूकता ही समाधान का मार्ग खोल सकते हैं। संस्कृति बचाओ मंच की तरफ से आयोजित कार्यक्रम में दो हजार से अधिक लोगों की उपस्थिति रही, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं।
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कार्यशाला में मौजूद वक्ताओं ने पारिवारिक संवाद, पारंपरिक मूल्यों और आत्मरक्षा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि माता-पिता की भूमिका सिर्फ पालन-पोषण तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें अपनी संतानों के सामाजिक व्यवहार पर भी सतत निगरानी रखनी चाहिए। कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि धार्मिक और सांस्कृतिक संस्थानों को समाज को जागरूक करने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। समाज में उत्पन्न हो रहे कई संवेदनशील मुद्दों पर संवाद और जागरूकता ही समाधान का मार्ग खोल सकते हैं। संस्कृति बचाओ मंच की तरफ से आयोजित कार्यक्रम में दो हजार से अधिक लोगों की उपस्थिति रही, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं।
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