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हमीदिया अस्पताल फिर सवालों में: जिंदा नवजात को बताया मृत, हफ्ते में दूसरा मामला, परिजनों का देर रात तक हंगामा

Sat, 21 Mar 2026 11:38 AM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Sat, 21 Mar 2026 11:38 AM IST
सार

हमीदिया अस्पताल में एक हफ्ते में दूसरी बार नवजात को मृत घोषित करने के बाद उसमें हरकत मिलने का मामला सामने आया है। घटना के बाद परिजनों ने हंगामा किया, जबकि डॉक्टर इसे अत्यंत प्रीमेच्योर केस बता रहे हैं। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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Hamidia Hospital Under Scrutiny Again: Live Newborn Declared Dead—Second Such Incident in a Week; Family Creat
अस्पताल में परिजनों का विरोध - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भोपाल के हमीदिया अस्पताल में लापरवाही का एक और गंभीर मामला सामने आया है। जिंदा नवजात को मृत घोषित करने के आरोप के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। चौंकाने वाली बात यह है कि एक हफ्ते के भीतर यह दूसरा मामला है, जिससे अस्पताल की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
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इमरजेंसी डिलीवरी के बाद मृत बताया, फिर दिखी हरकत
जानकारी के मुताबिक शुक्रवार दोपहर करीब 4 बजे मानताशा नाम की महिला को गंभीर हालत में हमीदिया अस्पताल लाया गया। वह करीब 6 माह की गर्भवती थी और अस्पताल पहुंचने के दौरान ही शिशु का सिर बाहर आ चुका था। डॉक्टरों ने तत्काल लेबर रूम में इमरजेंसी डिलीवरी कराई और नवजात को मृत घोषित कर दिया। लेकिन कुछ ही देर बाद बच्चे में हलचल जैसी स्थिति नजर आई, जिससे परिजन भड़क गए और अस्पताल में विवाद खड़ा हो गया।
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अस्पताल में हंगामा, पुलिस बुलानी पड़ी
घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया, जो देर रात तक चलता रहा। स्थिति बिगड़ती देख अस्पताल प्रबंधन को पुलिस बुलानी पड़ी। कोहेफिजा थाने से पुलिस मौके पर पहुंची और समझाइश देकर मामला शांत कराया।
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हफ्ते में दूसरा मामला, बढ़ी चिंता
इससे पहले बुधवार को भी इसी तरह का मामला सामने आया था। तब एक नवजात बच्ची को मृत घोषित कर डेथ सर्टिफिकेट तक जारी कर दिया गया था, लेकिन परिजनों ने दावा किया कि कुछ घंटे बाद बच्ची में सांस चल रही थी। उन्होंने इसका वीडियो भी बनाया, जिसमें पेट हिलता नजर आया था। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने अस्पताल की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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डॉक्टरों का बचाव- अत्यंत प्रीमेच्योर केस
अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि यह बेहद प्रीमेच्योर (अधपका) मामला था, जिसे एबॉर्टस की श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे मामलों में नवजात का वजन बहुत कम होता है और कई बार जांच में हार्टबीट नहीं मिलती। प्रोटोकॉल के तहत ऐसी स्थिति में नवजात को मृत घोषित किया जाता है।

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सिस्टम पर उठे सवाल
लगातार दो मामलों के सामने आने के बाद हमीदिया अस्पताल की कार्यप्रणाली, जांच प्रक्रिया और जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। परिजनों में नाराजगी है, वहीं प्रशासन के सामने अब जवाबदेही तय करने की चुनौती खड़ी हो गई है।


 
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