भोपाल: दूसरे के नाम-पते से झूठी शिकायतें भेजने वाली महिला इंस्पेक्टर बबीता कठेरिया बर्खास्त, ये रची थी साजिश
भोपाल जीआरपी में पदस्थ कार्यवाहक निरीक्षक बबीता कठेरिया को फर्जी नाम और पते से शिकायतें भेजने तथा वरिष्ठ अधिकारियों को गुमराह करने के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया। विभागीय जांच में तीनों आरोप सही पाए गए। शिकायतों के जरिए इटारसी और भोपाल के थाना प्रभारियों को हटवाने की कोशिश का आरोप था।
विस्तार
अलग-अलग नामों से भेजी थीं शिकायतें
विभागीय जांच के अनुसार, बबीता कठेरिया ने इटारसी जीआरपी थाना प्रभारी संजय चौकसे के खिलाफ दो शिकायतें भेजी थीं। पहली शिकायत 26 अगस्त 2025 को पवन कुमार गुप्ता के नाम से और दूसरी छह सितंबर 2025 को श्यामलाल मीणा के नाम से भेजी गई थी। दोनों शिकायतें भोपाल रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-एक स्थित डाकघर से भेजे जाने की बात जांच में सामने आई। इसी तरह, भोपाल जीआरपी थाना प्रभारी जहीर खान के खिलाफ 28 अगस्त 2025 को रामलाल सिंह के नाम से शिकायत भेजने का आरोप भी लगा था। इन शिकायतों के जरिए दोनों थाना प्रभारियों के खिलाफ कार्रवाई कराने की कोशिश की गई थी।
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एक जैसी लिखावट से खुला फर्जी शिकायतों का मामला
विभागीय जांच में सामने आया कि अलग-अलग व्यक्तियों के नाम से भेजी गई शिकायतों की लिखावट एक जैसी थी। जांच में शिकायतकर्ताओं के नाम और पते का गलत इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई। विभाग का आरोप था कि इन शिकायतों के माध्यम से वरिष्ठ अधिकारियों को गुमराह कर इटारसी और भोपाल के थाना प्रभारियों को हटवाने तथा उन पदों पर खुद की नियुक्ति कराने की कोशिश की गई। जांच में इसे पुलिस विभाग के नियमों और अनुशासन के विरुद्ध गंभीर कदाचार माना गया।
विभागीय आदेश के मुताबिक, बबीता कठेरिया को पूर्व में भी कई बार दंडित किया जा चुका था, लेकिन उनके आचरण में सुधार नहीं हुआ। विभाग ने माना कि ऐसे कर्मचारी को सेवा में बनाए रखने से पुलिस बल के अनुशासन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसके बाद उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया गया।
अनुशासनहीन कर्मचारी नहीं रख सकते
पुलिस की वर्दी पहनने का मतलब यह नहीं है कि कोई भी अपनी मर्जी से काम करे। अनुशासनहीन कर्मचारी को नौकरी में बनाए रखने से पूरे पुलिस बल पर बुरा असर पड़ता है।
- राजाबाबू सिंह, एडीजी रेल
