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Bmhrc bhopal: मध्य प्रदेश में पहली बार AI की मदद से होगा मानसिक बीमारियों का इलाज, कनाडा की कंपनी से हुआ एमओयू
Thu, 31 Jul 2025 06:32 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Thu, 31 Jul 2025 06:32 PM IST
सार
बीएमएचआरसी में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई)की मदद से मानसिक रोगियों की जांच और उपचार किया जाएगा। इसके लिए एआई के क्षेत्र में काम करने वाली कनाडा की कंपनी ऑरेंज न्यूरोसाइंसेज (Orange और बीएमएचआरसी ने एक समझौता किया है।
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बीएमएचआरसी और ऑरेंज न्यूरोसाइंसेज के बीच समझौता
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भोपाल मेमोरियल अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (बीएमएचआरसी) में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से मानसिक रोगियों की जांच और उपचार किया जाएगा। इसके लिए एआई के क्षेत्र में काम करने वाली कनाडा की कंपनी ऑरेंज न्यूरोसाइंसेज (Orange Neurosciences) और बीएमएचआरसी ने एक समझौता किया है। गुरूवार को बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ मनीषा श्रीवास्त्व और ऑरेंज न्यूरोसाइंसेज़ के अध्यक्ष डॉ विनय सिंह ने इस पर हस्ताक्षर किए। समझौते के तहत बीएमएचआरसी और ऑरेंज न्यूरोसाइंसेज़ इन एआई टूल्स की मदद से मानसिक रोग के क्षेत्र में रिसर्च भी करेंगे। इस तरह बीएमएचआरसी मध्यप्रदेश का पहला और एकमात्र संस्थान बन गया है, जहां एआई की मदद से मनोरोगियों की जांच और उपचार होगा।
वीडियो गेम की तरह होते हैं एआई टूल्स
प्रभारी निदेशक डॉ मनीषा श्रीवास्तव ने बताया कि पूरी दुनिया में मानसिक रोगियों की पहचान और उपचार के लिए अब तक परंपरागत तरीकों जैसे बातचीत करना, फॉर्म भरना, काउंसलिंग करना आदि का प्रयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया के जरिये कई बार मरीज को होने वाली मानसिक बीमारी या समस्या की पहचान करने में ही काफी वक्त लग जाता है। मरीज़ का बार-बार अस्पताल आना भी अपने आप में चुनौती होता है। अब ऐसे एआई टूल्स या वेब बेस्ड प्लेटफॉर्म तैयार हो गए हैं, जो मरीज की बीमारी को समझने में मदद करते हैं। ये टूल्स वीडियो गेम की तरह होते हैं। मरीज के लक्षण के आधार पर संबंधित एआई टूल्स के एप्लिकेशन को मरीज को इस्तेमाल करने दिया जाता है। इस दौरान यह एप्लिकेशन मरीज़ की हर गतिविधि को रिकॉर्ड करता है। सेशन पूरा हो जाने के बाद यह ऐप्लिकेशन मरीज की एक्टिविटी का विश्लेषण करता है और इसके अनुसार अपने रिजल्ट देता है।
देश में चुनिंदा स्थानों पर प्रयोग
श्रीवास्तव ने बताया कि इस तरह एक बार मरीज की बीमारी की पहचान हो गई तो एआई बेस्ड अन्य टूल्स इसी तरह की एक्टिविटी के जरिए मरीज़ के उपचार की मदद करते हैं। डॉ श्रीवास्तव ने बताया कि आॅरेंज न्यूरोसाइंसेज़ ने भी इस तरह के वेब बेस्ड प्लेटफॉर्म तैयार किए हैं, जिनका देश में चुनिंदा स्थानों पर प्रयोग किया जा रहा है। ऑरेंज न्यूरोसाइंसेज़ बीएमएचआरसी को इन एआई टूल्स और एप्लिकेशन को निशुल्क इस्तेमाल करने की इजाज़त देगा। अस्पताल के सभी मनोचिकित्सक एवं नैदानिक मनोवैज्ञानिक इसका इस्तेमाल कर पाएंगे।
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इन बीमारियों का होगा इलाज
इन एआई टूल्स की मदद से डिप्रेशन, एटेंशन डिफेसिट हाइपर डिसऑर्डर, ऑटिज्म, डिसलेक्सिया आदि कई बीमारियों के उपचार किया जा सकेगा। ऑरेंज न्यूरोसाइंसेज़ के अध्यक्ष डॉ विनय सिंह ने बताया कि हमारे इन सभी प्रॉडक्ट पूरी तरह विश्वसनीय, सुरक्षित और मान्यता प्राप्त हैं। भारत के कुछ अन्य बड़े अस्पताल भी इनकी सेवाएं ले रहे हैं।
डिजिटल कॉग्निटिव थेरेपी सेंटर बनेगा
मनोचिकित्सा विभाग में नैदानिक मनोवैज्ञानिक डॉ रूपेश रंजन ने बताया कि सभी कार्यों के लिए विभाग में एक अलग डिजिटल कॉग्निटिव थेरेपी सेंटर बनाया जा रहा है। जहां मरीजों की जांच एवं उपचार किया जाएगा। ऑरेंज न्यूरोसाइंसेज इस सेंटर की स्थापना में मदद करेगा और विभाग के सभी चिकित्सकों व अन्य स्टाफ को प्रशिक्षित करेगा। हालांकि इन एआई टूल्स का इस्तेमाल करने के लिए इस सेंटर के बनने का इंतजार नहीं किया जाएगा। उपलब्ध संसाधनों के साथ ही इन एआई टूल्स से मरीजों का उपचार शुरू कर दिया जाएगा।
यह भी पढ़ें-कानून व्यवस्था,लव जिहाद और ड्रग्स केस को लेकर कांग्रेस का सदन से वॉकआउट
एआई के इस्तेमाल से होंगे ये फायदे
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वीडियो गेम की तरह होते हैं एआई टूल्स
प्रभारी निदेशक डॉ मनीषा श्रीवास्तव ने बताया कि पूरी दुनिया में मानसिक रोगियों की पहचान और उपचार के लिए अब तक परंपरागत तरीकों जैसे बातचीत करना, फॉर्म भरना, काउंसलिंग करना आदि का प्रयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया के जरिये कई बार मरीज को होने वाली मानसिक बीमारी या समस्या की पहचान करने में ही काफी वक्त लग जाता है। मरीज़ का बार-बार अस्पताल आना भी अपने आप में चुनौती होता है। अब ऐसे एआई टूल्स या वेब बेस्ड प्लेटफॉर्म तैयार हो गए हैं, जो मरीज की बीमारी को समझने में मदद करते हैं। ये टूल्स वीडियो गेम की तरह होते हैं। मरीज के लक्षण के आधार पर संबंधित एआई टूल्स के एप्लिकेशन को मरीज को इस्तेमाल करने दिया जाता है। इस दौरान यह एप्लिकेशन मरीज़ की हर गतिविधि को रिकॉर्ड करता है। सेशन पूरा हो जाने के बाद यह ऐप्लिकेशन मरीज की एक्टिविटी का विश्लेषण करता है और इसके अनुसार अपने रिजल्ट देता है।
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देश में चुनिंदा स्थानों पर प्रयोग
श्रीवास्तव ने बताया कि इस तरह एक बार मरीज की बीमारी की पहचान हो गई तो एआई बेस्ड अन्य टूल्स इसी तरह की एक्टिविटी के जरिए मरीज़ के उपचार की मदद करते हैं। डॉ श्रीवास्तव ने बताया कि आॅरेंज न्यूरोसाइंसेज़ ने भी इस तरह के वेब बेस्ड प्लेटफॉर्म तैयार किए हैं, जिनका देश में चुनिंदा स्थानों पर प्रयोग किया जा रहा है। ऑरेंज न्यूरोसाइंसेज़ बीएमएचआरसी को इन एआई टूल्स और एप्लिकेशन को निशुल्क इस्तेमाल करने की इजाज़त देगा। अस्पताल के सभी मनोचिकित्सक एवं नैदानिक मनोवैज्ञानिक इसका इस्तेमाल कर पाएंगे।
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इन बीमारियों का होगा इलाज
इन एआई टूल्स की मदद से डिप्रेशन, एटेंशन डिफेसिट हाइपर डिसऑर्डर, ऑटिज्म, डिसलेक्सिया आदि कई बीमारियों के उपचार किया जा सकेगा। ऑरेंज न्यूरोसाइंसेज़ के अध्यक्ष डॉ विनय सिंह ने बताया कि हमारे इन सभी प्रॉडक्ट पूरी तरह विश्वसनीय, सुरक्षित और मान्यता प्राप्त हैं। भारत के कुछ अन्य बड़े अस्पताल भी इनकी सेवाएं ले रहे हैं।
डिजिटल कॉग्निटिव थेरेपी सेंटर बनेगा
मनोचिकित्सा विभाग में नैदानिक मनोवैज्ञानिक डॉ रूपेश रंजन ने बताया कि सभी कार्यों के लिए विभाग में एक अलग डिजिटल कॉग्निटिव थेरेपी सेंटर बनाया जा रहा है। जहां मरीजों की जांच एवं उपचार किया जाएगा। ऑरेंज न्यूरोसाइंसेज इस सेंटर की स्थापना में मदद करेगा और विभाग के सभी चिकित्सकों व अन्य स्टाफ को प्रशिक्षित करेगा। हालांकि इन एआई टूल्स का इस्तेमाल करने के लिए इस सेंटर के बनने का इंतजार नहीं किया जाएगा। उपलब्ध संसाधनों के साथ ही इन एआई टूल्स से मरीजों का उपचार शुरू कर दिया जाएगा।
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एआई के इस्तेमाल से होंगे ये फायदे
- बीमारी की पहचान जल्दी होगी, जल्द उपचार मिलेगा
- उपचार की गुणवत्ता भी बढ़ेगी। सटीक नतीजे मिलेंगे।
- मरीज को बार-बार अस्पताल नहीं आना पड़ेगा।
- मनोचिकित्सक का समय बचेगा। अधिक मरीजों को परामर्श दे पाएंगे और उपचार कर पाएंगे।
