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Bhopal: एम्स भोपाल में एंडोवास्कुलर मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी से स्ट्रोक का सफल उपचार, मरीज को मिली नई जिंदगी

Fri, 20 Sep 2024 06:56 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Fri, 20 Sep 2024 06:56 PM IST
सार

एम्स भोपाल ने एक नई तकनीकी एंडोवास्कुलर मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी द्वारा एक युवा स्ट्रोक मरीज का जीवन बचाकर चिकित्सा क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। 

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Bhopal: Successful treatment of stroke with endovascular mechanical thrombectomy at AIIMS Bhopal, patients got
AIIMS BHOPAL - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 राजधानी भोपाल एम्स के चिकित्सकों का कहना है कि समय पर स्ट्रोक की पहचान हो जाए तो मरीज को बचाया जा सकता है।ऐसा ही एक मामला सामने आया है जिसमें  एम्स भोपाल ने एक नई तकनीकी एंडोवास्कुलर मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी द्वारा एक युवा स्ट्रोक मरीज का जीवन बचाकर चिकित्सा क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इस प्रकार का उपचार गंभीर स्ट्रोक की बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए एक नया समाधान बनकर उभरा है, जिससे मरीजों और उनके परिवारों को नई उम्मीद मिल रही है।
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युवक के मस्तिष्क को पहले ही हो चुका था काफी नुकसान 
एक 35 वर्षीय पुरुष को शरीर के बाईं ओर अचानक लकवा मारने के बाद एम्स भोपाल के आपातकालीन विभाग में लाया गया। सीटी स्कैन से पता चला कि मरीज के मस्तिष्क की प्रमुख धमनी (मिडल सेरेब्रल आर्टरी) में रुकावट है, जिसके कारण मस्तिष्क को पहले ही काफी नुकसान हो चुका था। मरीज को तुरंत इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी उपचार केंद्र में स्थानांतरित किया गया, जहां डॉ. अमन कुमार ने प्रोफेसर डॉ. राजेश मलिक, विभागाध्यक्ष रेडियोडायग्नोसिस के मार्गदर्शन में थ्रोम्बेक्टॉमी की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया। समय पर हस्तक्षेप और विशेषज्ञ देखभाल के कारण, प्रक्रिया सफल रही और अब मरीज के हाथ-पैर भी काम करने लगे हैं। पोस्ट थ्रोम्बेक्टोमी, मरीज का न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रियंका कश्यप, डॉ. अग्रता शर्मा और क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्ट डॉ. सौरभ सैगल की विशेषज्ञ टीम द्वारा उपचार किया गया।
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जाने क्या है मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी
मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी एक अत्याधुनिक प्रक्रिया है जिसमें एक विशेष उपकरण का उपयोग करके अवरुद्ध धमनी से खून के थक्के को हटाया जाता है। इस उपकरण को स्टेंट्रिवर कहा जाता है, जिसे रक्त वाहिकाओं के माध्यम से थक्के के स्थान तक पहुंचाया जाता है। यह थक्का हटाने के बाद मस्तिष्क में रक्त प्रवाह को सामान्य करता है। अध्ययनों से पता चलता है कि स्टोक के 6 से 24 घंटे के भीतर उपचार प्राप्त करने वाले मरीजों के ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
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समय पर हस्तक्षेप से इलाज संभव 
एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) अजय सिंह ने कहा कि इस प्रकार के केस यह साबित करते हैं कि समय पर हस्तक्षेप और उन्नत चिकित्सा तकनीक कितनी महत्वपूर्ण है। मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी ने मरीजों को एक नया जीवन दिया है और एम्स भोपाल इस तरह की जीवनरक्षक प्रक्रियाओं के माध्यम से बेहतर से बेहतर इलाज प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। जनता में इस प्रक्रिया के बारे में जागरूकता कम होने के कारण, स्ट्रोक के प्रारंभिक लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है। एफएएसटी. (चेहरे का झुकना, हाथों में कमजोरी, बोलने में कठिनाई, और तुरंत मदद के लिए समय) का ध्यान रखकर स्ट्रोक की पहचान की जा सकती है। एम्स भोपाल उन्नत चिकित्सा के साथ आगे बढ़ते हुए स्ट्रोक के मरीजों को नई उम्मीद और इलाज का भरोसा देता है।
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