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Bhopal: जल संसाधन विभाग में रिटायर्ड इंजीनियर को बनाया प्रमुख अभियंता, हाईकोर्ट ने लगाई रोक, पीएस को नोटिस

Fri, 10 May 2024 07:59 PM IST
दिनेश शर्मा अमर उजाला, न्यूज डेस्क, भोपाल
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, भोपाल Published by: दिनेश शर्मा Updated Fri, 10 May 2024 07:59 PM IST
सार

मध्य प्रदेश जल संसाधन विभाग में इंजीनियरों की वरिष्ठता की अनदेखी करते हुए संविदा पर रिटायर्ड इंजीनियर को प्रमुख अभियंता बनाया गया है। मामले में हाईकोर्ट ने नियुक्ति पर रोक लगाते हुए विभाग के पीएस से जवाब मांगा है। 

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Bhopal: Retired engineer made Chief Engineer in Water Resources Department, High Court bans it, notice to PS
मामले में जल संसाधन विभाग मुख्य सचिव से जवाब मांगा गया है। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मध्य प्रदेश का जल संसाधन में प्रमोशन नहीं होने की वजह से सीनियर अधिकारियों की कमी से जूझ रहा है। हालात यह हैं कि यहां रिटायर्ड अधिकारियों को संविदा नियुक्ति पर प्रमुख अभियंता तक बनाना पड़ रहा है। इंजीनियरों की वरिष्ठता की अनदेखी करते हुए संविदा पर प्रमुख अभियंता बनाया गया है। अब यह मामला हाईकोर्ट जबलपुर पहुंच गया है। मामले में जल संसाधन विभाग मुख्य सचिव से जवाब मांगा गया है। 
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मप्र हाईकोर्ट जबलपुर ने सेवानिवृत्त अधीक्षण यंत्री शिरीष मिश्रा को इंजीनियर-इन-चीफ का प्रभार देने पर आगामी आदेश तक रोक लगा दी। जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने मामले में मुख्य सचिव व जल संसाधन विभाग के एडीशनल सेक्रेटरी और शिरीष मिश्रा को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
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पहले भी में इंजीनियरों की वरिष्ठता की हुई है अनदेखी
विभाग के एक इंजीनियर ने बताया कि इसके पहले विभाग में इंजीनियरों की वरिष्ठता की अनदेखी करते हुए संविदा पर प्रमुख अभियंता की संविदा नियुक्ति  की जा चुकी है। विभाग में प्रमुख अभियंता के पद पर एमएस डाबर की पदस्थापना के बाद वे रिटायर हुए तो सरकार ने उन्हें संविदा पर वापस उसी पद पर पदस्थ कर दिया था। इसके बाद उनकी संविदा अवधि खत्म हुई तो अब अधीक्षण यंत्री के पद से रिटायर हुए शिशिर कुशवाहा को प्रमुख अभियंता बना दिया गया है, जबकि कई अधीक्षण यंत्री के रूप में काम करने वाले कई इंजीनियर मुख्य अभियंता और प्रमुख अभियंता के पद की पात्रता रखते हैं।
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नियम की जा रही अनदेखी
विभाग के जानकार बताते हैं कि विभागीय पदोन्नति की जो व्यवस्था है उसके अनुसार पांच साल तक सहायक यंत्री पद पर कार्य करने के बाद कार्यपालन यंत्री बनाया जाता है तथा पांच साल की सेवा के बाद कार्यपालन यंत्री को अधीक्षण यंत्री बनाया जाता है। इसी प्रकार पांच साल या तीन साल की सेवा करने के बाद अधीक्षण यंत्री को मुख्य अभियंता बनाया जा सकता है। तीन साल की सेवा पूर्ण करने पर या वरिष्ठ मुख्य अभियंता को प्रमुख अभियंता मेंबर इंजीनियर एवं सचिव बनाया जा सकता है। 


जानकारी के लिए बता दें कि जल संसाधन विभाग में पदस्थ कई इंजीनियर अधीक्षण यंत्री के पद पर काम कर रहे हैं, लेकिन वे प्रमुख अभियंता नहीं बन सके। ये अधिकारी मुख्य अभियंता पद से रिटायर हो रहे हैं। ऐसे अधीक्षण यंत्रियों की संख्या दस बताई जा रही है जो प्रमुख अभियंता के पद की पात्रता के बाद भी वंचित हैं। इधर, संविदा पर प्रमुख अभियंता का पद भरने की कार्यवाही जल संसाधन विभाग के अफसरों ने कर दी है।
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