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Bhopal: प्रदेश के नर्सिंग कॉलेज की मान्यता जारी,जांच में सही पाए गए कॉलेजो को दी मान्यता,फीस का निर्धारण नहीं

Sat, 04 Jan 2025 07:16 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Sat, 04 Jan 2025 07:16 PM IST
सार

प्रदेश के नर्सिंग कॉलेज की मान्यता जारी की गई 666 कालेजों में केवल 294 को मान्यता दी गई है। मान्यता केवल उन्हीं कॉलेजों को दी गई है जिन्हें सीबीआई की दोनों जांच और हाईकोर्ट द्वारा गठित समिति ने सूटेबल (उपयुक्त) पाया है।

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Bhopal: Recognition of nursing colleges of the state issued, colleges found correct in investigation given rec
मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल ने मान्यता जारी की प्रदेश के  666 कालेजों में केवल 294 को मान्यता दी गई है। भोपाल के 29 नर्सिंग कॉलेज को मान्यता मिली है।इसमें मुख्य रूप से आरकेडीएफ, पीपुल्स कॉलेज, जय नारायण कॉलेज, राजीव गांधी, वीएनएस और टीआईटी जैसे कॉलेज शामिल हैं। इनमें से GNM नर्सिंग ( जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफ़री ) और B.Sc. नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता जारी की है। मान्यता केवल उन्हीं कॉलेजों को दी गई है जिन्हें सीबीआई की दोनों जांचों और हाईकोर्ट द्वारा गठित समिति ने उपयुक्त पाया है। हालांकि कॉलेजों का फीस निर्धारण नहीं किया गया है। साथ कॉलेजों को काफी लेट मान्यता दी गई है। जिस पर सवाल उठ रहे हैं।
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कॉलेजों को मिली मान्यता और उनकी सीटें
GNM नर्सिंग कॉलेजों की संख्या- 138
B.Sc. नर्सिंग कॉलेजों की संख्या- 156

कॉलेजों की सीटें
GNM नर्सिंग की कुल सीटें: 6816
B.Sc. नर्सिंग की कुल सीटें: 7864

यह है कोर्स
जानकारी के लिए बतादें कि GNM ( जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफ़री ) यह एक डिप्लोमा कोर्स है, यह कोर्स तीन साल का होता है, जिसमें छह महीने की इंटर्नशिप भी शामिल होती है। जबकि Bsc नर्सिंग ( बैचलर ऑफ़ साइंस इन नर्सिंग ) यह एक स्नातक स्तर का कोर्स है यह कोर्स 4 साल का होता हैं। 
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काउंसिल का गंभीर लापरवाही का आरोप
कालेजों की मान्यता जारी होने के बाद NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल और सरकार पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। रवि परमार ने कहा कि सत्र 2024-25 की मान्यता जनवरी 2025 में जारी करना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। आधा से ज्यादा सत्र बीत चुका है, जिससे न केवल छात्रों के सिलेबस पर बुरा प्रभाव पड़ेगा, बल्कि हजारों छात्र अन्य राज्यों में पलायन करने के लिए मजबूर हो गए हैं।
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फीस निर्धारण और छात्रवृत्ति का मुद्दा भी उठाया 
रवि परमार ने यह भी मांग की कि नर्सिंग कॉलेजों की फीस संरचना को तुरंत निर्धारित किया जाए ताकि कॉलेज संचालक छात्रों से मनमानी फीस वसूल न सकें। वर्तमान में फीस को लेकर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश न होने से छात्र और उनके अभिभावक आर्थिक शोषण का शिकार हो रहे हैं। एनएसयूआई ने चेतावनी दी है कि यदि इन मुद्दों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो वह बड़े पैमाने पर आंदोलन करेगी। छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए एनएसयूआई सड़क से लेकर हर मंच तक लड़ाई लड़ेगी। परमार ने यह भी बताया कि पिछले चार वर्षों से नर्सिंग छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं दी गई है, जिससे कई छात्र आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। यह न केवल शिक्षा के प्रति सरकार की उदासीनता को दर्शाता है, बल्कि छात्रों के भविष्य पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

एनएसयूआई ने सरकार से प्रमुख मांगें की
1. नर्सिंग कॉलेजों की फीस का निर्धारण कर मनमानी वसूली पर रोक लगाई जाए।
2. नर्सिंग छात्रों की लंबित छात्रवृत्ति तुरंत जारी की जाए।
3. छात्रों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए अतिरिक्त कक्षाओं और अन्य सहायता की व्यवस्था की जाए।
4. फर्जी नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता दी गई तो करेंगे प्रदेशव्यापी आंदोलन । 

 
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