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Bhopal: पुलिस ने सीखा कैसे करें अपराधों की जांच, सीन ऑफ क्राइम वर्कशॉप आयोजित
Wed, 29 Nov 2023 08:48 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 29 Nov 2023 08:48 PM IST
सार
गंभीर अपराध होने के बाद उसकी जांच की कितनी महत्वपूर्ण है, ये समझाने के लिए एक वर्कशॉप का आयोजन किया है। इसमें फॉरेंसिक साइंस के एक्सपर्ट ने प्रशिक्षण दिया।
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भोपाल पुलिस की कार्यशाला
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
भोपाल पुलिस ने बुधवार को सीन ऑफ क्राइम वर्कशॉप में अपराध की जांच करना सीखा। गंभीर अपराधों की जांच में अधिकारियों और विवेचकों की व्यावसायिक दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से इस वर्कशॉप का आयोजन कमिश्नर कार्यालय सभागार में किया गया था। इसमें नगरीय पुलिस भोपाल के समस्त राजपत्रित अधिकारियों एवं थाना प्रभारियों को प्रशिक्षण प्राप्त किया।
इस अवसर पर सेमिनार में उपस्थित अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अवधेश गोस्वामी ने समस्त अधिकारियों को व्यावहारिक उदाहरण देते हुए उत्कृष्ट जांचकर्ता बनने के लिए अपराध स्थल का गंभीरता एवं विवेकपूर्ण तरीके से निरीक्षण, साक्ष्य संरक्षण इत्यादि विषयों पर महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया।
ये था सेमिनार का उद्देश्य
सीन ऑफ क्राइम कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य महिला और पुरुष संबंधी गंभीर अपराधों में अपराध स्थल पर जांचकर्ता को क्या-क्या साक्ष्य मिल सकते हैं और अपराध स्थल का निरीक्षण करते समय क्या-क्या महत्वपूर्ण सावधानियां रखी जाएं, ताकि पीड़ित को न्याय एवं गुनाहगारों को सजा दिलाई जा सके ये सिखाना था।
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इन्होंने दिया प्रशिक्षण
कार्यशाला में फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट डॉ. हर्ष शर्मा ने बताया कि एक अनुसंधानकर्ता को गंभीर अपराधों में अपराध स्थल पर क्या-क्या साक्ष्य मिल सकते हैं, उन्हें कब और कैसे संरक्षित करना है। अपराध स्थल का निरीक्षण करते समय उन्हें संवेदनशीलता से एवं विवेकपूर्ण तरीके से क्या-क्या महत्वपूर्ण सावधानियां बरती जानी चाहिए, ताकि पीड़ित को न्याय एवं गुनाहगारों को सजा दिलाई जा सके।
इन अपराधों के बारे में बताया
डॉ. शर्मा ने हत्या, रेप, चोरी, लूट एवं डकैती समेत अनेक मामलों में विभिन्न तथ्यों एवं साक्ष्य के आधार में मामलों के पर्दाफाश करने तथा अपराधियों को सजा दिलाने में पुलिस को मिली सफ़लता के बारे में व्यावहारिक उदाहरण दिए। साथ ही बताया कि उनके द्वारा 40 वर्ष की सेवा अवधि में लगभग 4 हजार केस सॉल्व किए गए, जिनमें केवल अपराध स्थल से मिले महत्वपूर्ण साक्ष्य के आधार पर पीड़ित को न्याय एवं अपराधियों को दंड मिल सका। डॉ. शर्मा प्रदेश में ही नहीं ब्लकि अन्य प्रदेशों एवं विदेशों में भी प्रशिक्षण देते हैं।
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इस अवसर पर सेमिनार में उपस्थित अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अवधेश गोस्वामी ने समस्त अधिकारियों को व्यावहारिक उदाहरण देते हुए उत्कृष्ट जांचकर्ता बनने के लिए अपराध स्थल का गंभीरता एवं विवेकपूर्ण तरीके से निरीक्षण, साक्ष्य संरक्षण इत्यादि विषयों पर महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया।
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ये था सेमिनार का उद्देश्य
सीन ऑफ क्राइम कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य महिला और पुरुष संबंधी गंभीर अपराधों में अपराध स्थल पर जांचकर्ता को क्या-क्या साक्ष्य मिल सकते हैं और अपराध स्थल का निरीक्षण करते समय क्या-क्या महत्वपूर्ण सावधानियां रखी जाएं, ताकि पीड़ित को न्याय एवं गुनाहगारों को सजा दिलाई जा सके ये सिखाना था।
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इन्होंने दिया प्रशिक्षण
कार्यशाला में फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट डॉ. हर्ष शर्मा ने बताया कि एक अनुसंधानकर्ता को गंभीर अपराधों में अपराध स्थल पर क्या-क्या साक्ष्य मिल सकते हैं, उन्हें कब और कैसे संरक्षित करना है। अपराध स्थल का निरीक्षण करते समय उन्हें संवेदनशीलता से एवं विवेकपूर्ण तरीके से क्या-क्या महत्वपूर्ण सावधानियां बरती जानी चाहिए, ताकि पीड़ित को न्याय एवं गुनाहगारों को सजा दिलाई जा सके।
इन अपराधों के बारे में बताया
डॉ. शर्मा ने हत्या, रेप, चोरी, लूट एवं डकैती समेत अनेक मामलों में विभिन्न तथ्यों एवं साक्ष्य के आधार में मामलों के पर्दाफाश करने तथा अपराधियों को सजा दिलाने में पुलिस को मिली सफ़लता के बारे में व्यावहारिक उदाहरण दिए। साथ ही बताया कि उनके द्वारा 40 वर्ष की सेवा अवधि में लगभग 4 हजार केस सॉल्व किए गए, जिनमें केवल अपराध स्थल से मिले महत्वपूर्ण साक्ष्य के आधार पर पीड़ित को न्याय एवं अपराधियों को दंड मिल सका। डॉ. शर्मा प्रदेश में ही नहीं ब्लकि अन्य प्रदेशों एवं विदेशों में भी प्रशिक्षण देते हैं।
