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Bhopal: MP के मेडिकल कॉलेजों में घोषणा के 2 साल बाद भी नहीं शुरू हो पाया फिजियोथैरेपी कोर्स, एक बार फिर चर्चा

Mon, 06 Jan 2025 07:52 PM IST
Sandeep Tiwari संदीप तिवारी
Updated Mon, 06 Jan 2025 07:52 PM IST
सार

प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फिजियोथेरेपी पाठ्यक्रम शुरू करने की घोषणा दो साल पहवले 5 जनवरी 2023 को मंत्री सारंग ने की थी,लेकिन दो साल बाद भी यह घोषणा केवल कागजों पर है। अब एक बार फिर से चर्चा शुरू हो गई है।

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Bhopal: Physiotherapy course could not be started in MP's medical college even after 2 years of announcement,
दो साल पहले कोर्स शुरू करने की घोषणा करते मंत्री सारंग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फिजियोथेरेपी पाठ्यक्रम शुरू करने की घोषणा दो साल पहले 5 जनवरी 2023 को तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने की थी,लेकिन दो साल बाद भी यह घोषणा केवल कागजों पर है। अब एक बार फिर से इस पर चर्चा शुरू हो गई है। दरअसल कुछ दिन पहले फिजियोथेरेपिस्ट संघ ने डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेन्द्र शुक्ल से मुलाकात की थी। उम्मीद लगाई जा रही है कि अगले सत्र में  फिजियोथेरेपिस्ट (बीपीटी) कोर्स शुरू किया जाएगा। 
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जीएमसी में सबसे  ज्यादा जरूरत
उस समय मंत्री सारंग ने कहा था कि भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में जल्द ही इसके कोर्स की शुरुआत की जाएगी। जिसके बाद अन्य मेडिकल कॉलेज में भी इसे लागू किया जाएगा।  जीएमसी से आधुनिक चिकित्सा पद्धति के लगभग 100 से अधिक चिकित्सक प्रति वर्ष तैयार होकर निकलते हैं। इस कॉलेज के अस्पताल से लाखों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। किन्तु इस कॉलेज में फिजियोथेरेपी पाठ्यक्रम संचालित नहीं है।दरअसल आधुनिक युग में फिजियोथेरेपी अनिवार्य आवश्यकता के रूप में उभर कर सामने आई है। खेल के मैदान से लेकर गहन चिकित्सा इकाई तक एवं नवजात शिशु से लेकर बृद्धावस्था की गंभीर समस्याओं की चिकित्सा में फिजियोथेरेपी कारगर साबित हुई है।
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केलव जबलपुर और इंदौर में होता है कोर्स
गौलतलब है कि मध्यप्रदेश में अभी जबलपुर और इंदौर में ही सरकारी तौर पर इसका कोर्स कराया जाता है जबकि प्राइवेट कई कॉलेज हैं जहां पर फिजियोथैरेपिस्ट की डिग्री पढ़ाई के बाद मिल जाती है। फिजियोथेरेपी में साढ़े चार वर्ष की बैचलर डिग्री (चार वर्ष की थ्योरी एवं छह माह की अनिवार्य रोटेटरी इन्टर्नशिप) के अलावा अनेक विषयों में दो वर्ष अवधि के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं। जैसे आर्थोपेडिक, न्यूरोलॉजी, गायनेकोलॉजी, पिडियाट्रिक्स, जिरियाटिक केयर, स्पोर्टस्, पुनर्वास, कम्युनिटी बेस्ड रिहेबिलिटेशन, एवं मस्क्युलो रिहेबिलिटेशन आदि की विशेषज्ञता में मास्टर्स डिग्री के साथ ही पीएचडी पाठ्यक्रम भी संचालित है। फिजियोथेरेपी के पाठ्कम में माडर्न मेडिसिन (एलोपैथी) के लगभग सभी विषय सम्मिलित हैं।
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जीवन रक्षा में फिजियोथेरेपी आवश्यक
मध्य प्रदेश फिजियोथैरेपिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ.सुनील पांडेय ने बताया कि इस पद्धति के अंतर्गत जटिल से जटिल सर्जरी, हड्डियों की टूटफूट, खेल के मैदान में खिलाड़ियों को आने वाली चोटों तथा मांस-पेसियों जोडों एवं न्यूरो तंत्र से संबंधित समस्याओं, बीमारियों, चोटों के इलाज में फिजियोथेरेपी की महत्वपूर्ण भूमिका स्थापित हो चुकी, बहुत बड़ी संख्या में सामान्य जन एवं मरीज इसकी चिकित्सा प्राप्त करते हैं। इस तरह रोगियों के स्वास्थ्य एवं जीवन रक्षा में फिजियोथेरेपी एवं फिजियोथेरेपिस्ट को उच्चस्तरीय शिक्षण प्रशिक्षण की सुविधाएं उपलब्ध कराना अति आवश्यक है।


नहीं मिलाती बेहतर नौकरी
डॉ. सुनील पांडेय ने बताया कि मध्य प्रदेश में आठ से 10 हजार फिजियोथैरेपिस्ट हैं, लेकिन सरकारी कॉलेजों से डिग्री नहीं होने के चलते उन्हें बेहतर जॉब नहीं मिल पाता। साथ ही प्राइवेट कॉलेजों की डिग्री होने से उनका वेतन मान भी कम होता है। ऐसे में सभी मेडिकल कॉलेजों में जल्द से जल्द कोर्स शुरू किया जाना चाहिए। पांडेय ने बताया कि फिजियोथेरेपी के लगभग सभी विषय एलोपैथी के ही होते हैं। इस कारण मेडिकल कालेजों में पदस्थ प्रोफेसर एवं विषय विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों के अध्यापन की उच्चस्तरीय व्यवस्था सहजता पूर्वक उपलब्ध कराई जा सकती है।


 
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