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Bhopal: GI समिट को लेकर PCC चीफ और सिंघार ने सरकार को घेरा, बोले-सरकार की निवेश नौटंकी, पुराने आंकड़े गिनाए

Fri, 21 Feb 2025 08:33 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Fri, 21 Feb 2025 08:33 PM IST
सार

भोपाल में होने वाले जीआई समिट 2025 को लेकर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने  पत्रकार वार्ता कर ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को MP सरकार की निवेश नौटंकी बताया है। और पूराने आकड़े गिनाए हैं।उद्योगपतियों को पत्र लिखेंगे।

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Bhopal: PCC Chief and Singhar cornered the government over GI Summit, said it is government's investment drama
पीपीसी में प्रेसवार्ता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी भोपाल में होने वाले ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 को लेकर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने शुक्रवार को पत्रकार वार्ता की और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को MP सरकार की निवेश नौटंकी बताया है। इस दौरान उन्होने पिछली समिटों में उद्योगपतियों द्वारा की घोषणाओं के आकड़े गिनाए। पटवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश में निवेश की स्थिति 2023 के स्तर पर पहुंच गई है। इससे पहले आठवें समिट के दौरान 32 लाख करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की गई थी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कई बयान दिए, जिन्हें मीडिया ने व्यापक रूप से कवर किया, जिससे लोगों में सकारात्मक आर्थिक प्रभावों की उम्मीद जगी। हालांकि, जमीनी हकीकत काफी अलग है। यह मध्य प्रदेश सरकार की निवेश नौटंकी को उजागर करती है। 
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पिछले 6 ग्लोबलइन्वेस्टर्स समिट का रिकॉर्ड जीरो
पीसीसी चीफ ने कहा कि अब तक पिछले 6 ग्लोबलइन्वेस्टर्स समिट का रिकॉर्ड देखे तो जमीन पर मामला शून्य नजर आता है। और इसका कोई हिसाब किताब भी सरकार के पास नहीं है। 2003 से लेकर वर्ष 2016 तक पांच इन्वेस्टर्स समिटमें 17 लाख 50 हजार करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव का दावा किया गया। इसके बाद इंदौर में ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट 2023 में शिवराज की सरकार ने राज्य में लगभग15 लाख 40 हज़ार करोड़ के निवेश का दावा कर दिया। यानी करीब 32 लाख करोड रुपए के निवेश का दावा मध्यप्रदेश की धरती पर किया गया। जबकि हकीकत यह है कि 2003 से लेकरवर्ष 2023 तक 6 इन्वेस्टर्स समिट में 32 लाख 45 हजार करोड़ के दावे के मुकाबले जमीन पर केवल 3 लाख 47 हजार करोड़ का आकड़ा ही सामने आया जो सरकार को प्राप्त कुल निवेश प्रस्ताव का 10% ही है। यह आकड़ा भी सरकारी आकड़ा है, हकीकत में मध्यप्रदेश में निवेश प्रस्ताव के मुकाबले कुल 3% हीनिवेश आने का संकेत कई रिपोर्ट देती हैं।
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पीएम और उद्योगपितयों कों लिखेंगे पत्र
जीतू पटवारी ने कहा है कि जीआई समिट में आ रहे उद्योगपतियों का स्वागत करते हैं, लेकिन जो उद्योगपित पूरानी समिटों में एमपी आ कर उद्योग लगाने का वादा किया और अभी तक पूरा नहीं किया उनको पत्र लिखेंगे। साथ ही प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भी पत्र लिख कर ऐसे उद्योगपितयों की जानकारी देंगे। उन्होने कई उद्योगपतियों के नाम भी बताए जिन्होंने उद्योग लगाने का वादा तो किया लेकिन जमीन पर अभी तक कुछ नहीं किया। 
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हर माह करीब 5000 करोड़ का ले रहे कर्ज
पीसीसी चीफ ने कहा कि डॉ. मोहन यादव की सरकार में भारी भरकम खर्च किया जा रहा है। करोड़ों रुपए खर्चकरके उद्योगपतियों और निवेशकों की मेजबानी करने की तैयारी है। जैसा पिछली छह बारकिया गया वैसा ही इस बार भी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के नाम पर सरकारी खजाने कोखाली किया जा रहा है। हर माह करीब 5000 करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज लेने वालीसरकार  ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट पर पानी कीतरह पैसा बहा रही है।


सरकार युवाओं का वोट तो लेना चाहती
 नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि, मध्य प्रदेश की सरकार युवाओं का वोट तो लेना चाहती है, लेकिन उनको रोजगार नहीं देना चाहती। उन्होंने आगे कहा कि, इंदौर के अलावा सरकार ने कौनसे शहर को विकसित किया है। जबलपुर, ग्वालियर स्मार्ट सिटी केवल कागजों पर बनकर रह गई हैं। उमंग सिंघार ने कहा कि पिछले बार शिवराज सिंह के कार्यकाल में 68 प्रस्ताव आये थे उनको कैबिनेट में पास करने में डेढ़ साल का वक्त लग गया। ये शर्म की बात है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि भाजपा सरकार ने स्मार्ट सिटी की बात की, लेकिन इंदौर के अलावा प्रदेश के किस शहर को भाजपा सरकार ने विकसित किया ये उन्हें बताना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को ये भी बताना चाहिए कि जबलपुर, ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में वो सुविधाएं दी हैं क्या जो उद्योग धंदे के लिए अनुकूल होती हैं।
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