{"_id":"68385829f724c1256803f3aa","slug":"bhopal-patient-dies-after-heart-transplant-in-aiims-doctors-say-death-was-due-to-acute-rejection-syndrome-2025-05-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bhopal: एम्स में हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद मरीज की मौत, डॉक्टर बोले एक्यूट रिजेक्शन सिंड्रोम की वजह से हुई मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bhopal: एम्स में हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद मरीज की मौत, डॉक्टर बोले एक्यूट रिजेक्शन सिंड्रोम की वजह से हुई मौत
Thu, 29 May 2025 06:21 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Thu, 29 May 2025 06:21 PM IST
सार
एम्स में एक दिन पहले जिंदगी दोबारा मिलने के उम्मीद के साथ किए गए हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद मरीज की जान चली गई है। दरसअल एम्स में बुधवार को एक मरीज को ह्रदय प्रत्यारोपित किया गया, उसकी गुरुवार सुबह मौत हो गई है।
विज्ञापन
एक दिन पहले मरीज के साथ एम्स की टीम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजधानी भोपाल के एम्स में एक दिन पहले जिंदगी दोबारा मिलने के उम्मीद के साथ किए गए हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद मरीज की जान चली गई है। दरसअल एम्स में बुधवार को एक मरीज को ह्रदय प्रत्यारोपित किया गया, उसकी गुरुवार सुबह मौत हो गई है। जिसका कारण एक्यूट रिजेक्शन सिंड्रोम बताया जा रहा है। एम्स प्रबंधन के अनुसार, यह स्थिति ट्रांसप्लांट के कुल मरीजों में से 30 फीसदी में बनती है।
हार्ट ट्रांसप्लांट के 3 घंटे बाद बिगड़ने लगी थी हालत
एम्स भोपाल में हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए मरीज को ओटी में बुधवार सुबह 10 बजे अंदर लिया गया। दोपहर 12 बजे तक अंग दाता से निकाला गया हार्ट, रिसीवर मरीज में लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई। पूरी प्रक्रिया के दौरान मुख्य धमनियों में क्लैम्प लगाए जाते हैं। साथ ही हार्ट का ब्लड फ्लो करने का काम एक मशीन के द्वारा होता है। इसी बीच मरीज के शरीर से पुराने हार्ट को निकाल कर नया हार्ट लगाया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया रात 9 बजे चली। इसके बाद क्लैम्प हटा दिए गए और नए हार्ट ने ब्लड फ्लो करने का काम शुरू कर दिया। हार्ट ट्रांसप्लांट पूरा होने के करीब 3 घंटे बाद 12 बजे, अचानक मरीज की स्थिति बिगड़ने लगी। मरीज की हार्ट की रिदम बिगड़ने लगी। इस समय डॉक्टरों को पता चला कि बॉडी ने नए हार्ट को दुश्मन मान लिया है और उस पर अटैक कर दिया है।
काफी प्रयास के बाद भी नहीं बच सका मरीज
मरीज की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने रिजेक्शन को स्लो करने के लिए इलाज शुरू किया। जिसमें शरीर की इम्यूनिटी जो हार्ट पर अटैक कर रही होती है, उसे दवाओं के जरिए कमजोर किया जाता है। रात 3 बजे तक यह प्रक्रिया चली, इस बीच मरीज को आईसीयू से वेंटिलेटर पर शिफ्ट कर दिया गया था। करीब साढ़े 3 घंटे के प्रयास के बाद भी मरीज को बचाया नहीं जा सका। गुरुवार तड़के सुबह 3:55 बजे मरीज को मृत घोषित कर दिया गया।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें-मासिक धर्म पर बात करने में लोग करते हैं संकोच, NHM की एमडी सिडाना बोलीं- अब छठी से देंगे इसकी शिक्षा
मरीज का शरीर दूसरे के अंग को विदेशी समझता है
एम्स के डॉ. केतन मेहरा ने बताया कि अंग प्रत्यारोपण के बाद मरीज का शरीर दूसरे के अंग को विदेशी समझता है। और उस पर हमला करना शुरू कर देता है। इसे एक्यूट रिएक्शन इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह आमतौर पर प्रत्यारोपण के बाद कभी भी हो सकता है। यही नहीं, इसमें शरीर अचानक अपनी पूरी ताकत से अंग के खिलाफ हमला शुरू कर देता है। इसके उलट ऐसे मरीजों में एक क्रोनिक रिजेक्शन की स्थिति भी बनती है। जो महीनों या सालों बाद धीरे-धीरे नए अंग पर हमला शुरू करती है।
यह भी पढ़ें-जंबूरी मैदान जाने वाला हर मार्ग देवी अहिल्याबाई की थीम पर सज रहा, सिर्फ इनके वाहन आएंगे शहर में
किडनी ट्रांसप्लांट के मरीज की स्थिति में सुधार
एम्स में हार्ट ट्रांसप्लांट के साथ किडनी ट्रांसप्लांट भी हुआ। किडनी ट्रांसप्लांट के मरीज की स्थिति में सुधार देखा जा रहा है। एम्स के निदेशक डॉ. अजय सिंह ने बताया कि हार्ट ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया सफल रही थी। लेकिन, मरीज एक्यूट रिजेक्शन सिंड्रोम की स्थिति में चला गया। डॉक्टरों की टीम ने काफी प्रयास किया लेकिन मरीज को बचा नहीं सके।
विज्ञापन
हार्ट ट्रांसप्लांट के 3 घंटे बाद बिगड़ने लगी थी हालत
एम्स भोपाल में हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए मरीज को ओटी में बुधवार सुबह 10 बजे अंदर लिया गया। दोपहर 12 बजे तक अंग दाता से निकाला गया हार्ट, रिसीवर मरीज में लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई। पूरी प्रक्रिया के दौरान मुख्य धमनियों में क्लैम्प लगाए जाते हैं। साथ ही हार्ट का ब्लड फ्लो करने का काम एक मशीन के द्वारा होता है। इसी बीच मरीज के शरीर से पुराने हार्ट को निकाल कर नया हार्ट लगाया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया रात 9 बजे चली। इसके बाद क्लैम्प हटा दिए गए और नए हार्ट ने ब्लड फ्लो करने का काम शुरू कर दिया। हार्ट ट्रांसप्लांट पूरा होने के करीब 3 घंटे बाद 12 बजे, अचानक मरीज की स्थिति बिगड़ने लगी। मरीज की हार्ट की रिदम बिगड़ने लगी। इस समय डॉक्टरों को पता चला कि बॉडी ने नए हार्ट को दुश्मन मान लिया है और उस पर अटैक कर दिया है।
विज्ञापन
काफी प्रयास के बाद भी नहीं बच सका मरीज
मरीज की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने रिजेक्शन को स्लो करने के लिए इलाज शुरू किया। जिसमें शरीर की इम्यूनिटी जो हार्ट पर अटैक कर रही होती है, उसे दवाओं के जरिए कमजोर किया जाता है। रात 3 बजे तक यह प्रक्रिया चली, इस बीच मरीज को आईसीयू से वेंटिलेटर पर शिफ्ट कर दिया गया था। करीब साढ़े 3 घंटे के प्रयास के बाद भी मरीज को बचाया नहीं जा सका। गुरुवार तड़के सुबह 3:55 बजे मरीज को मृत घोषित कर दिया गया।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें-मासिक धर्म पर बात करने में लोग करते हैं संकोच, NHM की एमडी सिडाना बोलीं- अब छठी से देंगे इसकी शिक्षा
मरीज का शरीर दूसरे के अंग को विदेशी समझता है
एम्स के डॉ. केतन मेहरा ने बताया कि अंग प्रत्यारोपण के बाद मरीज का शरीर दूसरे के अंग को विदेशी समझता है। और उस पर हमला करना शुरू कर देता है। इसे एक्यूट रिएक्शन इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह आमतौर पर प्रत्यारोपण के बाद कभी भी हो सकता है। यही नहीं, इसमें शरीर अचानक अपनी पूरी ताकत से अंग के खिलाफ हमला शुरू कर देता है। इसके उलट ऐसे मरीजों में एक क्रोनिक रिजेक्शन की स्थिति भी बनती है। जो महीनों या सालों बाद धीरे-धीरे नए अंग पर हमला शुरू करती है।
यह भी पढ़ें-जंबूरी मैदान जाने वाला हर मार्ग देवी अहिल्याबाई की थीम पर सज रहा, सिर्फ इनके वाहन आएंगे शहर में
किडनी ट्रांसप्लांट के मरीज की स्थिति में सुधार
एम्स में हार्ट ट्रांसप्लांट के साथ किडनी ट्रांसप्लांट भी हुआ। किडनी ट्रांसप्लांट के मरीज की स्थिति में सुधार देखा जा रहा है। एम्स के निदेशक डॉ. अजय सिंह ने बताया कि हार्ट ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया सफल रही थी। लेकिन, मरीज एक्यूट रिजेक्शन सिंड्रोम की स्थिति में चला गया। डॉक्टरों की टीम ने काफी प्रयास किया लेकिन मरीज को बचा नहीं सके।
