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Bhopal News: भोपाल के वन विहार में सफेद बाघिन की मौत, 15 वर्षीय 'रिद्धि' बीमार थी, इंदौर से 2013 में लाए थे
Thu, 19 Sep 2024 10:23 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Thu, 19 Sep 2024 10:23 PM IST
सार
रिद्धि को पशु विनिमय कार्यक्रम के तहत इंदौर के चिड़ियाघर से 2013 में लाया गया था, उस समय वह चार साल की थी। उसे एक बाड़े में रखा गया था और वह वन विभाग में आने वाले पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी हुई थी।
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सफेद बाघिन की मौत
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भोपाल के वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में कई वर्षों से पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रही 15 वर्षीय सफेद बाघिन 'रिद्धि' की गुरुवार को मौत हो गई। रिद्धि कुछ दिन से बीमार थी। दो दिन से खाना भी नहीं खा रही थी। रिद्धि को पशु विनिमय कार्यक्रम के तहत इंदौर के चिड़ियाघर से 2013 में लाया गया था, उस समय वह चार साल की थी। उसे एक बाड़े में रखा गया था और वह वन विभाग में आने वाले पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी हुई थी।
पार्क के वन्यजीव पशु चिकित्सक अतुल गुप्ता ने बताया कि पिछले दो दिनों से बाघिन ने अपना नियमित भोजन भी नहीं ले रही थी। बुधवार तक अपने बाड़े में सामान्य दिखाई दे रही थी, लेकिन गुरुवार सुबह वह बेहोश पाई गई। गुप्ता ने कहा कि प्रथमदष्टया मौत का कारण अधिक उम्र होने के चलते उसके आतंरिक अंगों का काम नहीं करना है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार बाघों का जीवनकाल आमतौर पर जंगल में 15 से 16 साल का होता है, जबकि कैद में संरक्षित वातावरण और उन्हें दी गई देखभाल के कारण वे अपेक्षाकृत लंबी अवधि तक जीवित रहते हैं।
मृत सफेद बाघिन का सैंपल एकत्रित कर परीक्षण के लिए स्कूल आफ वाइल्ड लाइफ फॉरेंसिक हेल्थ जबलपुर भेजे गए हैं। पोस्टमार्टम उपरांत मृत बाघिन का नियमानुसार वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में वन संरक्षक भोपाल वृत भोपाल, संचालक वन विहार एवं अन्य अधिकारियों/कर्मचारियों की उपस्थिति में दाह संस्कार किया गया।
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पार्क के वन्यजीव पशु चिकित्सक अतुल गुप्ता ने बताया कि पिछले दो दिनों से बाघिन ने अपना नियमित भोजन भी नहीं ले रही थी। बुधवार तक अपने बाड़े में सामान्य दिखाई दे रही थी, लेकिन गुरुवार सुबह वह बेहोश पाई गई। गुप्ता ने कहा कि प्रथमदष्टया मौत का कारण अधिक उम्र होने के चलते उसके आतंरिक अंगों का काम नहीं करना है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार बाघों का जीवनकाल आमतौर पर जंगल में 15 से 16 साल का होता है, जबकि कैद में संरक्षित वातावरण और उन्हें दी गई देखभाल के कारण वे अपेक्षाकृत लंबी अवधि तक जीवित रहते हैं।
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मृत सफेद बाघिन का सैंपल एकत्रित कर परीक्षण के लिए स्कूल आफ वाइल्ड लाइफ फॉरेंसिक हेल्थ जबलपुर भेजे गए हैं। पोस्टमार्टम उपरांत मृत बाघिन का नियमानुसार वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में वन संरक्षक भोपाल वृत भोपाल, संचालक वन विहार एवं अन्य अधिकारियों/कर्मचारियों की उपस्थिति में दाह संस्कार किया गया।
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