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Bhopal News: भोपाल के केरवा बांध में बड़ा हादसा टला, 60 साल पुराने स्ट्रक्चर का स्लैब गिरा, आवाजाही पर रोक
Tue, 11 Nov 2025 09:11 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Tue, 11 Nov 2025 09:11 PM IST
सार
भोपाल के केरवा बांध में मंगलवार को बड़ा हादसा टल गया, जब गेट नंबर 8 के ऊपर बना पुराना स्लैब अचानक टूटकर गिर गया। किसी के घायल न होने के बावजूद प्रशासन ने तुरंत पूरे क्षेत्र में आवाजाही रोककर सुरक्षा बढ़ा दी है।
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केरवा डेम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजधानी में मंगलवार दोपहर उस समय हड़कंप की स्थिति बन गई जब शहर के लोकप्रिय केरवा बांध के एक हिस्से का स्लैब अचानक टूटकर गिर गया। सौभाग्य से कोई व्यक्ति इसकी चपेट में नहीं आया, लेकिन एहतियातन बांध क्षेत्र में आवाजाही बंद कर दी गई है। करीब छह दशक पहले बनाए गए इस बांध की मजबूती को लेकर भी अब सवाल उठने लगे हैं। प्रबंधन ने कहा है कि फिलहाल स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है और आगे की मरम्मत संबंधी कार्रवाई जल्द शुरू की जाएगी।
गेट नंबर 8 के ऊपर बना स्लैब ढहा
गौरतलब है कि बांध के जिस हिस्से से ग्रामीणों और आम नागरिकों की आवाजाही होती है, उसी पुल पर गेट नंबर 8 के ऊपर बने सीमेंट-कंक्रीट स्लैब का हिस्सा टूटकर नीचे जा गिरा। हादसे के बाद बांध प्रबंधन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाते हुए पूरे क्षेत्र को घेराबंदी में ले लिया है। स्थानीय लोगों के अनुसार दुर्घटना से चंद क्षण पहले ही कुछ लोग उस पुल से होकर निकले थे। अगर स्लैब कुछ मिनट पहले गिरता, तो बड़ा हादसा हो सकता था ।
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शहर का लोकप्रिय टूरिस्ट पॉइंट
केरवा बांध भोपालवासियों का पसंदीदा पर्यटन स्थल है। खासकर वीकेंड और छुट्टियों में यहां बड़ी संख्या में लोग घूमने पहुंचते हैं। बारिश के दिनों में यहां भीड़ और बढ़ जाती है। ढहे हुए मार्ग से ही पर्यटक और ग्रामीण आवाजाही करते थे।सौभाग्य से मंगलवार को सामान्य दिनों की तरह पर्यटकों की भीड़ नहीं थी, जिससे एक बड़ी दुर्घटना टल गई।
यह भी पढ़ें-सीएम बोले- लापरवाही करने वाले सचिव के खिलाफ होगी कार्रवाई, 2026 कृषि वर्ष घोषित होगा
कई हिस्सों में कंक्रीट टूट रहा
हादसे के बाद पुलिस और जल संसाधन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सुरक्षा घेरा बना दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई हिस्सों में कंक्रीट टूट रहा है। अगर समय रहते मरम्मत नहीं की गई, तो बारिश के मौसम में बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
जल संसाधन विभाग की सफाई
जल संसाधन विभाग ने केरवा बांध हादसे पर अपनी सफाई देते हुए कहा है कि फुट ब्रिज के लगभग 70 मीटर लंबे हिस्से में से केवल एक स्पैन, यानी करीब 17.5 मीटर क्षेत्र में आंशिक क्षति की सूचना मिली है। विभाग का कहना है कि यह ब्रिज 1980 में बांध निर्माण के दौरान बनाया गया था और इसे नियमित आवाजाही के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ निरीक्षण कार्यों के लिए उपयोग में लाया जाता था। विभाग का दावा है कि घटना में किसी भी तरह की जनहानि या अन्य नुकसान की रिपोर्ट नहीं है। हालांकि, स्थानीय लोगों के अनुभव इस दावे से मेल नहीं खाते। मौके पर आने-जाने वाले लोगों के अनुसार, यह पुल आज भी कई ग्रामीणों के लिए रोजमर्रा का मार्ग था और प्रतिबंध के बावजूद इसका निरंतर उपयोग हो रहा था। दूसरी बात यह कि क्षति केवल एक छोटे हिस्से तक सीमित नहीं दिखती, बल्कि पुल के कई भाग पहले से जर्जर होते नजर आ रहे हैं और गिरे हुए हिस्से की चौड़ाई भी विभाग की बताई तुलना में कहीं ज्यादा दिखाई देती है।
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गेट नंबर 8 के ऊपर बना स्लैब ढहा
गौरतलब है कि बांध के जिस हिस्से से ग्रामीणों और आम नागरिकों की आवाजाही होती है, उसी पुल पर गेट नंबर 8 के ऊपर बने सीमेंट-कंक्रीट स्लैब का हिस्सा टूटकर नीचे जा गिरा। हादसे के बाद बांध प्रबंधन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाते हुए पूरे क्षेत्र को घेराबंदी में ले लिया है। स्थानीय लोगों के अनुसार दुर्घटना से चंद क्षण पहले ही कुछ लोग उस पुल से होकर निकले थे। अगर स्लैब कुछ मिनट पहले गिरता, तो बड़ा हादसा हो सकता था ।
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केरवा बांध भोपालवासियों का पसंदीदा पर्यटन स्थल है। खासकर वीकेंड और छुट्टियों में यहां बड़ी संख्या में लोग घूमने पहुंचते हैं। बारिश के दिनों में यहां भीड़ और बढ़ जाती है। ढहे हुए मार्ग से ही पर्यटक और ग्रामीण आवाजाही करते थे।सौभाग्य से मंगलवार को सामान्य दिनों की तरह पर्यटकों की भीड़ नहीं थी, जिससे एक बड़ी दुर्घटना टल गई।
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कई हिस्सों में कंक्रीट टूट रहा
हादसे के बाद पुलिस और जल संसाधन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सुरक्षा घेरा बना दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई हिस्सों में कंक्रीट टूट रहा है। अगर समय रहते मरम्मत नहीं की गई, तो बारिश के मौसम में बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
जल संसाधन विभाग की सफाई
जल संसाधन विभाग ने केरवा बांध हादसे पर अपनी सफाई देते हुए कहा है कि फुट ब्रिज के लगभग 70 मीटर लंबे हिस्से में से केवल एक स्पैन, यानी करीब 17.5 मीटर क्षेत्र में आंशिक क्षति की सूचना मिली है। विभाग का कहना है कि यह ब्रिज 1980 में बांध निर्माण के दौरान बनाया गया था और इसे नियमित आवाजाही के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ निरीक्षण कार्यों के लिए उपयोग में लाया जाता था। विभाग का दावा है कि घटना में किसी भी तरह की जनहानि या अन्य नुकसान की रिपोर्ट नहीं है। हालांकि, स्थानीय लोगों के अनुभव इस दावे से मेल नहीं खाते। मौके पर आने-जाने वाले लोगों के अनुसार, यह पुल आज भी कई ग्रामीणों के लिए रोजमर्रा का मार्ग था और प्रतिबंध के बावजूद इसका निरंतर उपयोग हो रहा था। दूसरी बात यह कि क्षति केवल एक छोटे हिस्से तक सीमित नहीं दिखती, बल्कि पुल के कई भाग पहले से जर्जर होते नजर आ रहे हैं और गिरे हुए हिस्से की चौड़ाई भी विभाग की बताई तुलना में कहीं ज्यादा दिखाई देती है।
