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Bhopal News: गजलों की विरासत लेकर आया जश्न-ए-अदब कल्चरल कारवां, गुलजार हुई महफिलें, श्रोता हुए मुग्ध

Mon, 23 Sep 2024 04:04 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: दिनेश शर्मा Updated Mon, 23 Sep 2024 04:04 PM IST
सार

साहित्योत्सव जश्न-ए-अदब कल्चरल कारवां विरासत 2024 भारतीय कला, संस्कृति और साहित्य का जीवंत उत्सव है। इसे कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आयोजित किया जा चुका है। 

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Bhopal News: Jashn-e-Adaab cultural caravan brought the heritage of ghazals, the gatherings were buzzing
भोपाल में आयोजित कल्चरल कारवां में अपनी बात रखते अतिथि। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भारतीय कला, संस्कृति और साहित्य को जीवंत रखने वाला महत्वपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रम, साहित्योत्सव जश्न-ए-अदब कल्चरल कारवां विरासत का दो दिवसीय आयोजन राजधानी भोपाल में संपन्न हुआ। इस दौरान संस्कृति के कई रंग देखने को मिले।
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संस्कृति मंत्रालय (भारत सरकार), पर्यटन मंत्रालय (भारत सरकार) और आयकर विभाग, भोपाल के सहयोग से आयोजित साहित्योत्सव में पूरे भारत के प्रतिष्ठित कलाकारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और एक से बढ़कर एक कलात्मक प्रस्तुतियों के साथ दर्शकों का मन मोह लिया। दर्शकों ने कार्यक्रम में गज़ल, नाटक, मुशायरा एवं कवि सम्मेलन जैसे विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भरपूर लुफ्त उठाया गया।
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विद्या शाह द्वारा एक से बढ़कर एक दिल छू लेने वाली गजलें प्रस्तुत की गईं, जिनमें हमारी अटरिया पर आओ सांवरिया, रंगी गुलाबी चुनरिया रे और आज जाने की जिद न करो शामिल रही। इसके बाद साजन मिश्रा द्वारा राग का आयोजन किया गया। वहीं, 'शाम-ए-गज़ल' के दौरान पद्मश्री उस्ताद अहमद हुसैन और पद्मश्री उस्ताद मोहम्मद हुसैन ने अपनी खूबसूरत गज़लों से महफिल में चार चांद लगा दिए। 
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डॉ. ओम निश्चल के नजरिए से पेश किया गया 'हिंदी भाषा के 75 वर्ष' विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जिसके अंतर्गत उन्होंने बताया कि हमारी मातृभाषा आजादी के 75 वर्षों में कितने उतार चढ़ावों से गुजरी है। फिर, प्रोफेसर दानिश इकबाल द्वारा लिखित और अनिल शर्मा द्वारा निर्देशित नाटक 'कटघरे में ग़ालिब' का मंचन हुआ।

ओटीटी और सिनेमा पर बात
कार्यक्रम के दौरान ओटीटी और सिनेमा का भाषाई सरोकार आयोजित हुआ। जिसके अंतर्गत जानी मानी अदाकारा सुनीता रजवार ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। ये रिश्ता क्या कहलाता है, श्श्श्श... कोई है, सीआईडी और सावधान इंडिया जैसे शोज में एक से बढ़कर एक किरदार निभा चुकीं सुनीता ने ओटीटी और सिनेमा पर आने वाली कहानियों के बारे में बताते हुए कहा कि सिनेमा कभी भी गलत को प्रमोट नहीं करती है। वह आपको फिल्म के माध्यम से एक कहानी दिखाती है। अब यह आप पर निर्भर करता है कि आप उसे कैसे लेते हैं। कोई भी कहानी आपको अपने मन में गलत धारणा बनाने को नहीं कहती। इसे आपको एक सीख के तौर पर लेना चाहिए कि यदि आप गलत करेंगे, तो स्वाभाविक सी बात है कि आपके साथ भी गलत ही होगा। अब यदि किसी गुंडागिर्दी संबंधी कहानी दिखाई जा रही है, तो गाली गलोंच का आना भी स्वाभाविक है। 
 
ना आना इस देस मेरी लाडो शो से अपनी अलग पहचान बनाने वालीं और अम्मा जी का दबंग किरदार निभाने वालीं मेघना मलिक भी इस आयोजन में नजर आईं। इस किरदार के बारे में बोलते हुए उन्होंने बताया कि यह किरदार निभाना मेरे लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा। अम्मा जी शारीरिक और मानसिक दोनों ही रूप से मजबूत महिला थी, जिसे दबंग कहा जाना गलत नहीं होगा, इस पर काम करना वास्तव में बेहद कठिन था, लेकिन आज भी लोग इस किरदार को याद करते हैं, इससे मेरी सारी मेहनत सफल हो गई। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में करीब 5 से 6 वेब सीरीज और फिल्मों में दिखूंगी, जिनमें मेरा किरदार अलग-अलग प्रकार का ही है।


कारवां यूंही चलता रहेगा
कार्यक्रम की सफलता पर खुशी व्यक्त करते हुए, कवि और साहित्योत्सव जश्न-ए-अदब के संस्थापक, कुंवर रंजीत चौहान ने कहा कि साहित्योत्सव जश्न-ए-अदब कल्चरल कारवां विरासत 2024 भारतीय कला, संस्कृति और साहित्य का जीवंत उत्सव है। इसे कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आयोजित किया जा चुका है। यह कार्यक्रम भारतीय कला और संस्कृति को संरक्षित करने के सबसे सार्थक माध्यमों में से एक है। हमारा उद्देश्य भारतीय कला और साहित्य की धरोहर को जन-जन तक पहुंचाना है, और यह आयोजन उस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि यह साहित्योत्सव ने एक ऐसे मंच के रूप में अपनी पहचान बनाई है, जहां भारतीय संस्कृति की विविधता और समृद्धि का सम्मान किया जाता है। 
 
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