{"_id":"698f257f81d7749d7f015c3f","slug":"bhopal-news-employees-have-high-expectations-from-madhya-pradesh-s-budget-eyes-set-on-da-pay-scale-and-cash-2026-02-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bhopal News: मध्य प्रदेश के बजट से कर्मचारियों को बड़ी उम्मीदें, डीए, वेतनमान और कैशलेस इलाज पर टिकी निगाहें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bhopal News: मध्य प्रदेश के बजट से कर्मचारियों को बड़ी उम्मीदें, डीए, वेतनमान और कैशलेस इलाज पर टिकी निगाहें
Fri, 13 Feb 2026 08:35 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Fri, 13 Feb 2026 08:35 PM IST
सार
मध्य प्रदेश सरकार 18 फरवरी को पेपरलेस बजट पेश करेगी। राज्य के कर्मचारी 3% महंगाई भत्ता, सातवां वेतनमान, दैनिक वेतनभोगियों का नियमितीकरण, अंशकालिक कर्मचारियों को कलेक्टर दर से वेतन, मंत्रालय कर्मचारियों को चौथा समयमान, अग्रिम राशि बढ़ाने, व्यवसायिक कर में राहत और कैशलेस चिकित्सा सुविधा जैसे मुद्दों पर ठोस प्रावधान की उम्मीद कर रहे हैं।
विज्ञापन
बजट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश सरकार 18 फरवरी को विधानसभा में अपना पहला पेपरलेस बजट पेश करेगी। जानकारी के अनुसार इस वर्ष का बजट आकार में पिछले साल से बड़ा हो सकता है। बजट से पहले कर्मचारी संगठनों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार से स्पष्ट प्रावधान करने की मांग की है। मध्य प्रदेश राज्य अधिकारी कर्मचारी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष अशोक पांडे ने कहा कि केंद्र सरकार के बराबर 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता राज्य कर्मचारियों को दिया जाना चाहिए। यह राशि लंबे समय से लंबित है और बजट में इसका प्रावधान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थाई कर्मियों को सातवें वेतनमान का लाभ अब तक नहीं मिला है, जबकि इसकी चर्चा पहले भी हो चुकी है।
विज्ञापन
दैनिक वेतनभोगियों को नियमित किया जाए
उन्होंने मांग की है कि दैनिक वेतनभोगियों को नियमित किया जाए और अंशकालिक कर्मचारियों को कलेक्टर दर से वेतन दिया जाए। अशोक पांडे ने यह भी कहा कि केंद्र में आठवें वेतन आयोग के गठन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और समिति भी बन चुकी है। राज्य सरकार ने भी समिति बनाने की बात कही थी, लेकिन अब तक उस पर कार्रवाई नहीं हुई। कर्मचारियों की मांग है कि बजट में आठवें वेतन आयोग से संबंधित स्पष्ट प्रावधान किया जाए। उन्होंने दो प्रकार के कर लगाए जाने पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि एक कर राज्य स्तर पर और दूसरा केंद्र स्तर पर लिया जा रहा है, जबकि कर व्यवस्था सरल होनी चाहिए। इसके अलावा कर्मचारियों के लिए घोषित कैशलेस चिकित्सा सुविधा अभी तक लागू नहीं हुई है। बजट में इसके लिए धनराशि निर्धारित कर इसे लागू किया जाए।
मंत्रालय कर्मचारियों को चौथा समयमान वेतन की उम्मीद
मंत्रालय अधिकारी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक ने कहा कि मंत्रालय कर्मचारियों को अब तक चौथा समयमान नहीं मिला है, जबकि अन्य विभागों में यह लाभ दिया जा चुका है। उन्होंने 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता देने की मांग दोहराई। सुधीर नायक ने कहा कि अनाज अग्रिम और त्योहार अग्रिम की राशि पिछले 10 वर्षों से 4 हजार रुपए ही है, जबकि महंगाई काफी बढ़ चुकी है। इसे बढ़ाकर कम से कम 10 हजार रुपए किया जाए।
यह भी पढ़ें-मध्य प्रदेश में बदला मौसम का मिजाज, दिन में गर्मी का एहसास, रातें भी हो रहीं सामान्य
कई घोषणाएं अधूरी
उन्होंने यह भी मांग की कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से व्यवसायिक कर नहीं लिया जाना चाहिए। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पिछले बजट में कई घोषणाएं की गई थीं, लेकिन वे अभी तक लागू नहीं हो सकी हैं। ऐसे में 18 फरवरी को पेश होने वाला पेपरलेस बजट कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब निगाह इस बात पर है कि सरकार लंबित मांगों पर ठोस निर्णय लेती है या नहीं।
वेतन विसंगति दूर करने मिले विशेष पैकेज
समस्त स्वास्थ्य अधिकारी कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह कौरव ने कहा कि आगामी बजट में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए विशेष पैकेज का प्रावधान किया जाना चाहिए, ताकि उनकी वेतन विसंगतियां दूर हो सकें। उन्होंने कहा कि संविदा कर्मचारी नियमित कर्मचारियों के समान कार्य कर रहे हैं, लेकिन वेतन और सुविधाओं में अंतर बना हुआ है, जिसे समाप्त करना आवश्यक है। कौरव ने मांग की कि चिकित्सकों की तरह नर्सिंग ऑफिसरों को भी रात्रिकालीन ड्यूटी के लिए भत्ता दिया जाए और इसके लिए बजट में अलग से प्रावधान किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि स्वशासी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत नर्सिंग ऑफिसरों को तीसरी और चौथी वेतन वृद्धि का लाभ दिया जाना चाहिए, ताकि वेतन संबंधी असमानता समाप्त हो सके।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
दैनिक वेतनभोगियों को नियमित किया जाए
उन्होंने मांग की है कि दैनिक वेतनभोगियों को नियमित किया जाए और अंशकालिक कर्मचारियों को कलेक्टर दर से वेतन दिया जाए। अशोक पांडे ने यह भी कहा कि केंद्र में आठवें वेतन आयोग के गठन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और समिति भी बन चुकी है। राज्य सरकार ने भी समिति बनाने की बात कही थी, लेकिन अब तक उस पर कार्रवाई नहीं हुई। कर्मचारियों की मांग है कि बजट में आठवें वेतन आयोग से संबंधित स्पष्ट प्रावधान किया जाए। उन्होंने दो प्रकार के कर लगाए जाने पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि एक कर राज्य स्तर पर और दूसरा केंद्र स्तर पर लिया जा रहा है, जबकि कर व्यवस्था सरल होनी चाहिए। इसके अलावा कर्मचारियों के लिए घोषित कैशलेस चिकित्सा सुविधा अभी तक लागू नहीं हुई है। बजट में इसके लिए धनराशि निर्धारित कर इसे लागू किया जाए।
मंत्रालय कर्मचारियों को चौथा समयमान वेतन की उम्मीद
मंत्रालय अधिकारी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक ने कहा कि मंत्रालय कर्मचारियों को अब तक चौथा समयमान नहीं मिला है, जबकि अन्य विभागों में यह लाभ दिया जा चुका है। उन्होंने 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता देने की मांग दोहराई। सुधीर नायक ने कहा कि अनाज अग्रिम और त्योहार अग्रिम की राशि पिछले 10 वर्षों से 4 हजार रुपए ही है, जबकि महंगाई काफी बढ़ चुकी है। इसे बढ़ाकर कम से कम 10 हजार रुपए किया जाए।
यह भी पढ़ें-मध्य प्रदेश में बदला मौसम का मिजाज, दिन में गर्मी का एहसास, रातें भी हो रहीं सामान्य
कई घोषणाएं अधूरी
उन्होंने यह भी मांग की कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से व्यवसायिक कर नहीं लिया जाना चाहिए। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पिछले बजट में कई घोषणाएं की गई थीं, लेकिन वे अभी तक लागू नहीं हो सकी हैं। ऐसे में 18 फरवरी को पेश होने वाला पेपरलेस बजट कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब निगाह इस बात पर है कि सरकार लंबित मांगों पर ठोस निर्णय लेती है या नहीं।
वेतन विसंगति दूर करने मिले विशेष पैकेज
समस्त स्वास्थ्य अधिकारी कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह कौरव ने कहा कि आगामी बजट में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए विशेष पैकेज का प्रावधान किया जाना चाहिए, ताकि उनकी वेतन विसंगतियां दूर हो सकें। उन्होंने कहा कि संविदा कर्मचारी नियमित कर्मचारियों के समान कार्य कर रहे हैं, लेकिन वेतन और सुविधाओं में अंतर बना हुआ है, जिसे समाप्त करना आवश्यक है। कौरव ने मांग की कि चिकित्सकों की तरह नर्सिंग ऑफिसरों को भी रात्रिकालीन ड्यूटी के लिए भत्ता दिया जाए और इसके लिए बजट में अलग से प्रावधान किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि स्वशासी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत नर्सिंग ऑफिसरों को तीसरी और चौथी वेतन वृद्धि का लाभ दिया जाना चाहिए, ताकि वेतन संबंधी असमानता समाप्त हो सके।
