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भोपाल मास्टर प्लान: रहवासियों ने दर्ज कराई आपत्ति, अवैध निर्माणों को वैध करने और कैचमेंट में निर्माण का विरोध

Thu, 22 Oct 2026 06:29 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Thu, 22 Oct 2026 06:29 PM IST
सार

भोपाल मास्टर प्लान 2047 के विरोध में संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने टीएंडसीपी कार्यालय में दो हजार के करीब आपत्तियां दर्ज कराईं। समिति ने आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के नियमितीकरण, मार्केट स्ट्रीट, बड़े तालाब के कैचमेंट और टाइगर मूवमेंट क्षेत्र में निर्माण संबंधी प्रावधान हटाने की मांग की।

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Bhopal Master Plan: Residents file objections; oppose the regularization of illegal constructions and developm
टीएंडसीपी पहुंचे रहवासी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भोपाल मास्टर प्लान 2047 के प्रारूप को लेकर विरोध तेज हो गया है। संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति के नेतृत्व में गुरुवार को विभिन्न कॉलोनियों के रहवासी टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएंडसीपी) कार्यालय पहुंचे और दो हजार के करीब आपत्तियां दर्ज कराईं। रहवासियों ने आवासीय भूखंडों पर चल रही कथित अवैध व्यावसायिक गतिविधियों को नियमित करने, मार्केट स्ट्रीट विकसित करने तथा बड़े तालाब के कैचमेंट, हरित भूमि और टाइगर मूवमेंट क्षेत्र में निर्माण संबंधी प्रावधानों पर सवाल उठाए। समिति ने कहा कि मास्टर प्लान शहर के सुनियोजित विकास का आधार होना चाहिए, न कि अनधिकृत निर्माणों को वैधता देने और प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने का माध्यम। प्रदर्शन में अरेरा कॉलोनी, गौतम नगर, रोहित नगर, रचना नगर, बावड़िया, साकेत नगर, भेल, कोटरा, लालघाटी, शक्तिनगर, शाहपुरा विकास कुंज, कोलार रोड, नेहरू नगर, प्रियदर्शिनी, गुलमोहर, डीके कॉटेज, ग्रीन सिटी सोसाइटी और रामशरण सोसाइटी सहित विभिन्न क्षेत्रों के रहवासी शामिल हुए।
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आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों पर आपत्ति
याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने भोपाल विकास योजना के अध्याय 15.38 में आवासीय परिसरों में गैर-आवासीय गतिविधियों के नियमितीकरण संबंधी प्रावधानों को हटाने की मांग की। उनका कहना है कि यह प्रावधान सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के विपरीत है। समिति ने आदेश क्रमांक 17103/2026 का हवाला देते हुए कहा कि नियमों के विरुद्ध चल रही व्यावसायिक गतिविधियों और स्वीकृत नक्शे से अलग निर्माणों पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए, न कि उन्हें नियमित करने का रास्ता दिया जाए। त्रिपाठी ने कहा कि भोपाल मास्टर प्लान 2047 का ड्राफ्ट विकास के लिए नहीं, भोपाल के विनाश के लिए है। जब तक सुधार नहीं होगा, हम इसे लागू नहीं होने देंगे। समिति ने आरजी-3 क्षेत्र में मिश्रित भू-उपयोग से जुड़े विरोधाभास दूर करने और अरेरा कॉलोनी के ई-1 से ई-5 तक के आवासीय स्वरूप को यथावत रखने की मांग की। ड्राफ्ट के पृष्ठ 6752 पर बिंदु 15.39 में प्रस्तावित मार्केट स्ट्रीट को भी हटाने की मांग की गई। समिति का कहना है कि इससे आवासीय सड़कों पर व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं, जिससे यातायात, पार्किंग, वायु-ध्वनि और सीवेज प्रदूषण की समस्या बढ़ेगी। इसका असर वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा तथा संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत शांतिपूर्ण जीवन जीने के अधिकार पर पड़ सकता है।
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बड़े तालाब, हरियाली और टाइगर मूवमेंट क्षेत्र पर चिंता
समिति ने पश्चिमी बायपास, बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र, हरित क्षेत्रों और टाइगर मूवमेंट क्षेत्र में निर्माण की अनुमति तथा एफएआर बढ़ाने संबंधी प्रावधानों पर पुनर्विचार की मांग की। रहवासियों के अनुसार, अनियोजित शहरीकरण से जलस्रोतों, वेटलैंड, हरियाली और वन्यजीवों को नुकसान पहुंच सकता है। समिति ने भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु के डॉ. टीवी रामचंद्र के शहरीकरण संबंधी अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि भोपाल के भविष्य की योजना जलस्रोतों और पर्यावरण को केंद्र में रखकर बननी चाहिए। रहवासियों ने भारतीय सड़क कांग्रेस के मानकों और न्यायालयीन आदेशों के अनुरूप आवासीय मार्गों पर 1.8 मीटर तथा व्यावसायिक मार्गों पर 2.5 मीटर फुटपाथ बनाने की मांग की। समिति के अनुसार, उपलब्ध भूमि और प्रस्तावित सड़कों का विकास किए बिना स्थापित आवासीय क्षेत्रों का मूल स्वरूप बदलना उचित नहीं है। नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धाराओं 36 और 37 के बावजूद अरेरा कॉलोनी जैसे क्षेत्रों में अवैध भू-उपयोग और अनधिकृत निर्माणों पर प्रभावी रोक नहीं लगने पर भी सवाल उठाए गए।
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दस्तावेजों की गुणवत्ता और यातायात योजना पर सवाल
समिति ने ड्राफ्ट की प्रतियों के धुंधले होने और अंग्रेजी प्रारूप के लिंक पर हिंदी दस्तावेज खुलने जैसी शिकायतें कीं। हिंदी और अंग्रेजी में स्पष्ट, सुपाठ्य प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की गई, ताकि नागरिक और विशेषज्ञ प्रारूप का अध्ययन कर सकें। रहवासियों ने भविष्य की यातायात जरूरतों के हिसाब से फ्लाईओवर और प्रमुख मार्गों की ठोस योजना नहीं होने पर भी आपत्ति जताई। समिति ने कहा कि आवासीय क्षेत्रों में बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों से यातायात और पार्किंग का दबाव बढ़ रहा है। इसे दूर करने के लिए व्यावहारिक योजना जरूरी है।

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ये प्रमुख मांगें रखीं
- संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने प्रारूप में सात प्रमुख बदलाव मांगे हैं। इनमें आवासीय भूखंडों पर अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के नियमितीकरण का प्रावधान हटाना, अरेरा कॉलोनी के ई-1 से ई-5 तक आवासीय स्वरूप बनाए रखना, आरजी-3 क्षेत्र में फुटपाथ, सर्विस रोड और पार्किंग की व्यवस्था करना तथा स्वीकृत अभिन्यास के पार्कों, खुले स्थानों और हरित क्षेत्रों को सुरक्षित रखना शामिल है।

- समिति ने आवासीय सड़कों की चौड़ाई के आधार पर व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति देने संबंधी प्रावधान हटाने, न्यायालयीन आदेशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने और पश्चिमी बायपास, बड़े तालाब के कैचमेंट व टाइगर मूवमेंट क्षेत्र में आवासीय गतिविधियों तथा एफएआर बढ़ाने के प्रस्ताव वापस लेने की मांग की। साथ ही, मेट्रो रीजन में व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की बात कही, ताकि भोपाल के स्थापित आवासीय क्षेत्रों पर व्यावसायिक दबाव कम हो सके।
- समिति ने सभी आपत्तियों पर पारदर्शी विचार, व्यक्तिगत सुनवाई और स्पष्ट निर्णय की मांग की। चेतावनी दी कि यदि मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो याचिकाकर्ता अगली सुनवाई में यह मुद्दा सर्वोच्च न्यायालय के सामने उठाएंगे।
कई कॉलोनियों के रहवासी हुए शामिल



 
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