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Bhopal: कॉलेज के सिलेबस होगा भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेश, परमार बोले-वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाला था हमारा समाज
Sun, 11 May 2025 08:19 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Sun, 11 May 2025 08:19 PM IST
सार
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर सृजन कार्यक्रम में पहुंचे उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि प्रदेश में नई शिक्षा नीति के 4 साल पूरे हो गए हैं। इस साल हम फर्स्ट ईयर में भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेश करने जा रहे हैं।
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उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश की राजधानी में शिक्षा और शोध से जुड़ा हुआ एक आयोजन राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में किया जा रहा है। यहां पर 150 नवाचारी प्रोजेक्ट्स का लाइव प्रदर्शन किया जा रहा है। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के उपलक्ष्य में हो रहे सृजन कार्यक्रम में रविवार को पहुंचे उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने अमर उजाला से विशेष चर्चा की। मंत्री ने कहा कि प्रदेश में नई शिक्षा नीति के 4 साल पूरे हो गए हैं। इस साल हम स्नातक प्रथम वर्ष के पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेश करने जा रहे हैं। शिक्षाविद इस पर लगातार काम कर रहे हैं। सिलेबस तैयार किया जा रहा। आगे भारतीय ज्ञान परंपरा को हर विषय में शामिल किया जाएगा।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाला था भारत का समाज
परमार ने कहा कि जो दुनिया के लोग नहीं जानते हैं, वह भारत के लोग पहले से जानते थे। वह हम पाठ्यक्रम में शामिल करेंगे ताकि विद्यार्थियों के मन में आए कि हमारे पूर्वज ज्ञानवान थे। यह धारणा बना ली गई है कि हमले पूर्वज अशिक्षित थे, चरवाहे थे, गड़रिया थे। परमार ने कहा कि भारत का समाज सुसंगठित समाज था, भारत का समाज वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाला समाज था। भारत का समाज रूढ़ीवादी नहीं था। भारत के समाज से जो भी विज्ञान उपलब्ध होता है उसको हम सामने लाएंगे और उसे विद्यार्थियों तक पहुंचाएंगे।
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यह भी पढ़ें-मानसून के पहले भोपाल के नाले-नालियों मे सफाई अभियान, मंत्री सारंग ने किया निरीक्षण, दिए निर्देश
तकनीकी और नवाचार को लगातार दे रहे बढ़ावा
परमार ने बताया कि नई शिक्षा नीति 2020 के तहत मध्य प्रदेश में विज्ञान तकनीकी और नवाचार को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। शोध के माध्यम से शिक्षा को उत्कृष्ट करने की पहल की जा रही है। मंत्री परमार ने कहा कि सृजन कार्यक्रम में प्रदेश भर से एक से बढ़कर एक मॉडल आए हैं, जिसमें कहीं ड्रोन टेक्नोलॉजी के बारे में बताया गया है तो कहीं कृषि नवाचार की अवधारणा को प्रस्तुत किया गया है।
यह भी पढ़ें-दिग्विजय सिंह का सीएम डॉ. यादव को पत्र, लिखा- नरवाई जलाने पर जुर्माने के बजाय किसानों को जागरूक करें
नवाचारी प्रोजेक्ट्स का जीवंत प्रदर्शन
राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. राजीव त्रिपाठी ने बताया कि सृजन कार्यक्रम के तहत पूरे प्रदेश से इंजीनियरिंग एवं तकनीकी विषय के पॉलिटेक्निक कॉलेज के विद्यार्थियों ने अपने मॉडल प्रस्तुत किए हैं। वहीं, कुलसचिव डॉ. मोहन सेन ने बताया कि प्रदेश भर से चयनित 150 नवाचारी प्रोजेक्ट्स का लाइव प्रदर्शन किया जा रहा है। सृजन कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में रिसर्च की प्रवृत्ति को बढ़ाना है। यह कार्यक्रम आने वाले वर्षों में संपूर्ण प्रदेश में संचालित किया जाएगा।
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वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाला था भारत का समाज
परमार ने कहा कि जो दुनिया के लोग नहीं जानते हैं, वह भारत के लोग पहले से जानते थे। वह हम पाठ्यक्रम में शामिल करेंगे ताकि विद्यार्थियों के मन में आए कि हमारे पूर्वज ज्ञानवान थे। यह धारणा बना ली गई है कि हमले पूर्वज अशिक्षित थे, चरवाहे थे, गड़रिया थे। परमार ने कहा कि भारत का समाज सुसंगठित समाज था, भारत का समाज वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाला समाज था। भारत का समाज रूढ़ीवादी नहीं था। भारत के समाज से जो भी विज्ञान उपलब्ध होता है उसको हम सामने लाएंगे और उसे विद्यार्थियों तक पहुंचाएंगे।
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तकनीकी और नवाचार को लगातार दे रहे बढ़ावा
परमार ने बताया कि नई शिक्षा नीति 2020 के तहत मध्य प्रदेश में विज्ञान तकनीकी और नवाचार को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। शोध के माध्यम से शिक्षा को उत्कृष्ट करने की पहल की जा रही है। मंत्री परमार ने कहा कि सृजन कार्यक्रम में प्रदेश भर से एक से बढ़कर एक मॉडल आए हैं, जिसमें कहीं ड्रोन टेक्नोलॉजी के बारे में बताया गया है तो कहीं कृषि नवाचार की अवधारणा को प्रस्तुत किया गया है।
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नवाचारी प्रोजेक्ट्स का जीवंत प्रदर्शन
राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. राजीव त्रिपाठी ने बताया कि सृजन कार्यक्रम के तहत पूरे प्रदेश से इंजीनियरिंग एवं तकनीकी विषय के पॉलिटेक्निक कॉलेज के विद्यार्थियों ने अपने मॉडल प्रस्तुत किए हैं। वहीं, कुलसचिव डॉ. मोहन सेन ने बताया कि प्रदेश भर से चयनित 150 नवाचारी प्रोजेक्ट्स का लाइव प्रदर्शन किया जा रहा है। सृजन कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में रिसर्च की प्रवृत्ति को बढ़ाना है। यह कार्यक्रम आने वाले वर्षों में संपूर्ण प्रदेश में संचालित किया जाएगा।
