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Bhopal Gas Tragedy: पूर्व फॉरेंसिक डॉ. डीके सतपथी बोले- भोपाल गैस लीक का प्रभाव दिख रहा अगली पीढ़ी पर

Sun, 24 Nov 2024 04:31 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Sun, 24 Nov 2024 04:31 PM IST
सार

भोपाल गैस त्रासदी की 40वीं बरसी पर आयोजित कार्यक्रम में पूर्व फोरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. डीके सतपथी ने कहा कि यूनियन कार्बाइड के कारखाने से गैस लीक का असर गैस पीड़ितों की अगली पीढ़ी पर भी पड़ा है।

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Bhopal Gas Tragedy: Former forensic Dr. DK Satpathy said – The impact of Bhopal gas leak is visible on the nex
भोपाल गैस त्रासदी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश के भोपाल में यूनियन कार्बाइड कारखाने से 40 साल पहले गैस लीक होने के असर को अब गैस पीड़ित लोगों की अगली पीढ़ी में भी देखा गया है। यह बात पूर्व फोरेंसिक डॉ.क्टर डीके सतपथी ने कही। वह भोपाल गैस त्रासदी की 40वीं बरसी पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने  गैस त्रासदी में गैस पीड़ितों के बच्चों पर पड़े दीर्घकालिक प्रभाव को लेकर अपने अनुभव साझा किए। शनिवार को गैस त्रासदी के पीड़ितों के लिए काम करने वाले समूहों द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में डॉ. डी.के. सतपथी ने इस त्रासदी के दौरान अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने पहले दिन 875 पोस्टमार्टम किए थे और अगले पांच वर्षों में 18,000 शव परीक्षण किए।  बता दें 2 और 3 दिसंबर 1984 की रात को यूनियन कार्बाइड के कीटनाशक कारखाने से ज़हरीली गैस लीक होने के कारण कम से कम 5479 लोग मारे गए थे, और 5 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए थे। इस त्रासदी के बाद बहुत से लोगों को दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएं हुईं।
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गर्भ में मौजूद बच्चों के शरीर भी हुए प्रभावित 
डॉ. सतपथी ने कहा कि यूनियन कार्बाइड ने कभी इस बात को स्वीकार नहीं किया था कि गैसों के प्रभाव से महिलाओं के गर्भस्थ बच्चों पर असर पड़ेगा। उनका कहना था कि इन गैसों के प्रभाव से बच्चा प्रभावित नहीं हो सकता। लेकिन डॉ. सतपथी ने बताया कि जब उन्होंने त्रासदी में मारे गए गर्भवती महिलाओं के खून के नमूनों की जांच की, तो पाया गया कि मां के शरीर में जो 50% जहर था, वही बच्चे के शरीर में भी पाया गया। डॉ. सतपथी ने दावा किया कि जो बच्चे  महिलाओं के गर्भ में थे, उनका शरीर भी इन जहरीले पदार्थों से प्रभावित हुआ था और इसका असर अगली पीढ़ी की सेहत पर पड़ा।
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शोध बंद करने पर उठाए विशेषज्ञों ने सवाल
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि गैस के प्रभाव को जानने के लिए शुरू शोध क्यों बंद कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इसका असर गैस पीड़ितों की आने वाली पीढ़ियों पर देखा जा रहा और यह जारी रहेगा। डॉ. सतपथी ने बताया कि यूनियन कार्बाइड के कारखाने से  मीथाइल आइसोसायनेट (MIC) गैस लीक हुई थी। उन्होंने कहा कि इस गैस के पानी से संपर्क करने पर जहरीली गैसे बनी, जिनमें से कुछ कैंसर, उच्च रक्तचाप और यकृत क्षति जैसी बीमारियों का कारण बनी। 
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4 दिसंबर को पोस्टर प्रदर्शन का आयोजन 
भोपाल गैस पीड़ितों के लिए काम करने वाली रचना ढिंगरा ने कहा कि डॉ. सतपथी और अन्य मौजूद लोग गैस त्रासदी के समय आपातकालीन कक्ष के वरिष्ठ डॉक्टर के सदस्यों में शामिल थे। उन्होंने आज अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा किया है।  भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्ष राशिदा बी ने भी घोषणा की कि इस त्रासदी के हर पहलू को दिखाते हुए एक पोस्टर प्रदर्शनी 4 दिसंबर तक आयोजित की जाएगी। इसके अलावा, इस त्रासदी की 40वीं वर्षगांठ पर एक रैली आयोजित की जाएगी, जो वैश्विक कारपोरेट अपराधों जैसे औद्योगिक प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन पर ध्यान केंद्रित करेगी।


 
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