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Bhopal Gas Kand: डाउ केमिकल ने उतारी 10 वकीलों की फौज, अब सुनवाई होगी अगले साल
Sat, 25 Nov 2023 10:30 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sat, 25 Nov 2023 10:30 PM IST
सार
देश की बड़ी त्रासदी में से एक भोपाल गैस कांड में पीड़ितों को न्याय का इंतजार है। अब मामले में अगली सुनवाई 6 जनवरी को होगी।
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भोपाल गैस त्रासदी
- फोटो : AMAR UJALA
विस्तार
भोपाल गैस कांड मामले में शनिवार को भोपाल जिला न्यायालय में सुनवाई हुई। विशेष न्यायाधीश विधान माहेश्वरी ने डाउ केमिकल्स मामले की सुनवाई की। अब इसमें मामले में अगली सुनवाई 6 जनवरी 2024 में की जाएगी। इसमें डाउ केमिकल्स कंपनी की तरफ से 10 वकीलों की एक फौज कंपनी का पक्ष रखने के लिए पहुंची।
बता दें, 1984 में 2 और 3 दरमियानी रात को डाउ केमिकल्स कंपनी की भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फेक्ट्री में गैस का रिसाव हुआ था। इससे हजारों जानें गईं थीं। ये विश्व की सबसे बड़ी त्रासदी में से एक है।
ये रखे गए गए तर्क
कंपनी के वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि इस न्यायालय का क्षेत्राधिकार न होने पर आगामी स्तर पर तर्क करना चाहते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि उनका क्लाइंट एक मल्टी नेशनल अमरीकी कंपनी है। ऐसे में भारत की अदालत उनके ऊपर किसी भी प्रकार का कोई जूरिडिक्शन नहीं रखती है। इस पर भोपाल ग्रुप फोर इन्फॉर्मेशन एवं एक्शन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अवी सिंह ने आपत्ति जताई। सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 2012 में क्षेत्राधिकार के मुद्दे पर फैसला किया था। इस प्रकार डाउ केमिकल को मामले में आरोपी बनाया जाना चाहिए।
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39 साल में तामील हुआ समन
कंपनी को 39 सालों में कुल सात बार समन भेजा गया है। इसमें सातवां समन तामील हुआ। इसके बाद 39 साल पहली बार कंपनी की ओर से कोई प्रतिनिधि कोर्ट में पक्ष रखने उपस्थित हुआ। ये मामला अमरीकी संसद में भी उठ चुका है। इतना ही नहीं इस कंपनी को भारत से भगोड़ा घोषित किया गया है।
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बता दें, 1984 में 2 और 3 दरमियानी रात को डाउ केमिकल्स कंपनी की भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फेक्ट्री में गैस का रिसाव हुआ था। इससे हजारों जानें गईं थीं। ये विश्व की सबसे बड़ी त्रासदी में से एक है।
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ये रखे गए गए तर्क
कंपनी के वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि इस न्यायालय का क्षेत्राधिकार न होने पर आगामी स्तर पर तर्क करना चाहते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि उनका क्लाइंट एक मल्टी नेशनल अमरीकी कंपनी है। ऐसे में भारत की अदालत उनके ऊपर किसी भी प्रकार का कोई जूरिडिक्शन नहीं रखती है। इस पर भोपाल ग्रुप फोर इन्फॉर्मेशन एवं एक्शन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अवी सिंह ने आपत्ति जताई। सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 2012 में क्षेत्राधिकार के मुद्दे पर फैसला किया था। इस प्रकार डाउ केमिकल को मामले में आरोपी बनाया जाना चाहिए।
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39 साल में तामील हुआ समन
कंपनी को 39 सालों में कुल सात बार समन भेजा गया है। इसमें सातवां समन तामील हुआ। इसके बाद 39 साल पहली बार कंपनी की ओर से कोई प्रतिनिधि कोर्ट में पक्ष रखने उपस्थित हुआ। ये मामला अमरीकी संसद में भी उठ चुका है। इतना ही नहीं इस कंपनी को भारत से भगोड़ा घोषित किया गया है।
