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Bhopal: मंत्री प्रतिमा बागरी पर कांग्रेस का बड़ा आरोप, अनुसूचित जाति वर्ग के प्रमाण पत्र को फर्जी बताया
Tue, 25 Mar 2025 04:12 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Tue, 25 Mar 2025 04:12 PM IST
सार
कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार नेआरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश सरकार की मंत्री प्रतिमा बागरी का जाति प्रमाण पत्र फर्जी। उन्होंने अनुसूचित जाति के आरक्षण का गलत तरीके से लाभ उठाया है। मामले में कोर्ट जाने की तैयारी है।
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पीसीसी में प्रेसवार्ता
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मप्र शासन में राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी का जाति प्रमाण पत्र फर्जी है और उन्होंने अनुसूचित जाति के आरक्षण का गलत तरीके से लाभ उठाया है। अहिरवार ने कहा कि अगर राज्य सरकार इस मामले में कानूनी कार्रवाई कर निष्पक्ष जांच नहीं कराती है कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी।
राजपूत समुदाय में आदे हैं बागरी
उन्होंने कहा कि सतना जिले के रैगांव विधानसभा क्षेत्र, जहां से प्रतिमा बागरी विधायक हैं, वह अनुसूचित जाति (अजा) के लिए आरक्षित है। लेकिन तथ्य यह है कि बुंदेलखंड, महाकौशल और विंध्य क्षेत्र में रहने वाले ‘बागरी’ जाति के लोग मूल रूप से ठाकुर (राजपूत) समुदाय से आते हैं और अनुसूचित जाति की श्रेणी में नहीं आते। इसके बावजूद, प्रतिमा बागरी एवं इनके परिवार ने प्रशासनिक मिलीभगत से फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाकर आरक्षित सीट से चुनाव लड़ा और मंत्री पद हासिल कर लिया, जो संविधान और सामाजिक न्याय की मूल भावना के खिलाफ है।
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अनुसूचित जाति में शामिल नहीं
अहिरवार ने कहा कि 1961 व 1971 की जाति जनगणना में पन्ना, सतना और सिवनी जिलों में अनुसूचित जाति में शामिल नहीं थी। जाति छानबीन समीति मध्य प्रदेश के 2003 निर्णय एवं 2007 भारत सरकार के राजपत्र के सरकारी आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि राजपूत समुदाय के ‘बागरी’ जाति के लोग अनुसूचित जाति का लाभ नहीं ले सकते। इसके बावजूद, कुछ लोगों ने फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर सरकारी नौकरियों और चुनावी आरक्षण का दुरुपयोग किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रतिमा बागरी भी इसी प्रक्रिया के तहत गलत तरीके से अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र प्राप्त कर विधायक और मंत्री बनी हैं।
सभी कलेक्टरों को जारी किए थे निर्देश
अहिरवार आगे कहा कि 2003 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी किए गए थे कि बुंदेलखंड, महाकौशल और विंध्य क्षेत्र में रहने वाले राजपूत बागरी समाज के लोगों को अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र जारी न किया जाए। इसके बाद 2007 में भारत सरकार द्वारा भी यह स्पष्ट कर दिया गया था कि राजपूत ठाकुर समुदाय के ‘बागरी’ जाति के लोग अनुसूचित जाति में शामिल नहीं हैं, इसलिए उन्हें अनुसूचित जाति वर्ग का प्रमाण पत्र नहीं दिया जाना चाहिए।
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गलत तरीके से जारी किया गया जाति प्रमाण पत्र
अहिरवार ने बताया कि राज्य शासन एवं मप्र उच्चस्तरीय छानबीन समिति के स्पष्ठ आदेश है कि बुंदलेखंड, महाकौशल, विंध्य क्षेत्र में रहने वाले उपनाम बागरी का प्रयोग करने वाले लोग राजपूत/ ठाकुर जाति के है एवं ये बड़े किसान है और इन्हें अनुसूचित जाति को दी जाने वाली सुविधाएं न दी जाए। इसके बावजूद, प्रतिमा बागरी को गलत तरीके से जाति प्रमाण पत्र जारी किया गया और उन्होंने इसका लाभ लेकर राजनीति में प्रवेश किया। अनुसूचित जाति वर्ग की जाति बागरी और राजपूत समाज की जाति बागरी के लोग जाति नाम समानता का लाभ ले रहे है। जबकि राजपूत बागरी लोग अनुसूचित जाति वर्ग के न होकर राजपूत/ठाकुर समुदाय से सम्बंध रखते है। उदाहरण स्वरूप जैसे कुशवाहा जाति माली पिछड़ा वर्ग में आते है, एवं राजपूत/ठाकुर (सामान्य) समाज में भी कुशवाहा जाति आती है। ऐसे ही अन्य उदाहरण भी सामने आते है। जिनमें सामान्य वर्ग के जातीया एवं अनुसूचित जाति/जनजाति और पिछड़े वर्ग की जातियों में जाति नाम की समानता है।
निष्पक्ष जांच कराकर,तत्काल बर्खास्त की मांग
अहिरवार ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री मोहन यादव से मांग की कि प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र की निष्पक्ष जांच कराकर उन्हें मंत्री पद से तत्काल बर्खास्त कर, वास्तविक अनुसूचित जाति वर्ग के विधायक को मंत्री परिषद में शामिल किया जाए एवं विधायक पद से इस्तीफा लेकर पुनः उप चुनाव कराया जाए।
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राजपूत समुदाय में आदे हैं बागरी
उन्होंने कहा कि सतना जिले के रैगांव विधानसभा क्षेत्र, जहां से प्रतिमा बागरी विधायक हैं, वह अनुसूचित जाति (अजा) के लिए आरक्षित है। लेकिन तथ्य यह है कि बुंदेलखंड, महाकौशल और विंध्य क्षेत्र में रहने वाले ‘बागरी’ जाति के लोग मूल रूप से ठाकुर (राजपूत) समुदाय से आते हैं और अनुसूचित जाति की श्रेणी में नहीं आते। इसके बावजूद, प्रतिमा बागरी एवं इनके परिवार ने प्रशासनिक मिलीभगत से फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाकर आरक्षित सीट से चुनाव लड़ा और मंत्री पद हासिल कर लिया, जो संविधान और सामाजिक न्याय की मूल भावना के खिलाफ है।
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अनुसूचित जाति में शामिल नहीं
अहिरवार ने कहा कि 1961 व 1971 की जाति जनगणना में पन्ना, सतना और सिवनी जिलों में अनुसूचित जाति में शामिल नहीं थी। जाति छानबीन समीति मध्य प्रदेश के 2003 निर्णय एवं 2007 भारत सरकार के राजपत्र के सरकारी आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि राजपूत समुदाय के ‘बागरी’ जाति के लोग अनुसूचित जाति का लाभ नहीं ले सकते। इसके बावजूद, कुछ लोगों ने फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर सरकारी नौकरियों और चुनावी आरक्षण का दुरुपयोग किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रतिमा बागरी भी इसी प्रक्रिया के तहत गलत तरीके से अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र प्राप्त कर विधायक और मंत्री बनी हैं।
सभी कलेक्टरों को जारी किए थे निर्देश
अहिरवार आगे कहा कि 2003 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी किए गए थे कि बुंदेलखंड, महाकौशल और विंध्य क्षेत्र में रहने वाले राजपूत बागरी समाज के लोगों को अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र जारी न किया जाए। इसके बाद 2007 में भारत सरकार द्वारा भी यह स्पष्ट कर दिया गया था कि राजपूत ठाकुर समुदाय के ‘बागरी’ जाति के लोग अनुसूचित जाति में शामिल नहीं हैं, इसलिए उन्हें अनुसूचित जाति वर्ग का प्रमाण पत्र नहीं दिया जाना चाहिए।
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गलत तरीके से जारी किया गया जाति प्रमाण पत्र
अहिरवार ने बताया कि राज्य शासन एवं मप्र उच्चस्तरीय छानबीन समिति के स्पष्ठ आदेश है कि बुंदलेखंड, महाकौशल, विंध्य क्षेत्र में रहने वाले उपनाम बागरी का प्रयोग करने वाले लोग राजपूत/ ठाकुर जाति के है एवं ये बड़े किसान है और इन्हें अनुसूचित जाति को दी जाने वाली सुविधाएं न दी जाए। इसके बावजूद, प्रतिमा बागरी को गलत तरीके से जाति प्रमाण पत्र जारी किया गया और उन्होंने इसका लाभ लेकर राजनीति में प्रवेश किया। अनुसूचित जाति वर्ग की जाति बागरी और राजपूत समाज की जाति बागरी के लोग जाति नाम समानता का लाभ ले रहे है। जबकि राजपूत बागरी लोग अनुसूचित जाति वर्ग के न होकर राजपूत/ठाकुर समुदाय से सम्बंध रखते है। उदाहरण स्वरूप जैसे कुशवाहा जाति माली पिछड़ा वर्ग में आते है, एवं राजपूत/ठाकुर (सामान्य) समाज में भी कुशवाहा जाति आती है। ऐसे ही अन्य उदाहरण भी सामने आते है। जिनमें सामान्य वर्ग के जातीया एवं अनुसूचित जाति/जनजाति और पिछड़े वर्ग की जातियों में जाति नाम की समानता है।
निष्पक्ष जांच कराकर,तत्काल बर्खास्त की मांग
अहिरवार ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री मोहन यादव से मांग की कि प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र की निष्पक्ष जांच कराकर उन्हें मंत्री पद से तत्काल बर्खास्त कर, वास्तविक अनुसूचित जाति वर्ग के विधायक को मंत्री परिषद में शामिल किया जाए एवं विधायक पद से इस्तीफा लेकर पुनः उप चुनाव कराया जाए।
