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Bhopal: RGPV में खाली रह गई 427 PHD की सीटें, 645 में से केवल 218 विद्यार्थी मिले, 6 महीना बाद दोबारा परीक्षा

Sat, 01 Feb 2025 06:46 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Sat, 01 Feb 2025 06:46 PM IST
सार

आरजीपीवी में 645 पीएचडी की सीटों में से 218 विद्यार्थी चयनित हो सके हैं। जबकि परीक्षा के लिए एक हजार 140 विद्यार्थियों के प्रवेश पत्र जारी किए गए थे। सभी सीटों पर प्रवेश देने के बाद शेष 427 सीटों पर छह माह बाद दोबारा परीक्षा कराना पड़ेगा।
 

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Bhopal: 427 PHD seats remained vacant in RGPV, only 218 students were found out of 645, re-examination after 6
आरजीपीवी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी भोपाल स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी)  यूटीडी सहित सात कालेजों की 17 ब्रांच की 645 पीएचडी की सीटों पर प्रवेश कराने के लिऐ ऑफलाइन परीक्षा का आयोजन 21 दिसंबर 2024 को किया गया था। लेकिन 17 ब्रांचों में 645 पीएचडी की सीटों में से 218 विद्यार्थी चयनित हुए हुए हैं। जबकि परीक्षा के लिए एक हजार 140 विद्यार्थियों के प्रवेश पत्र जारी किए गए थे। सभी सीटों पर प्रवेश देने के बाद शेष 427 सीटों खाली रह गईं हैं। अब इन सीटों को भरने के लिए छह माह बाद दोबारा प्रवेश परीक्षा करानी पडेगी। 
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अगले सप्ताह शुरू होगा साक्षात्कार
पीएचडी की इस परीक्षा में पास हुए 218 विद्यार्थियों के साक्षात्कार अगले सप्ताह से शुरू किया जाएगा। विश्वविद्याल ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। आरजीपीवी को साल में दो बार प्रवेश परीक्षा कराना होती है। अब दिसंबर सत्र की परीक्षा हो चुकी है। जुलाई सत्र की परीक्षा के लिए छह माह का इंतजार करना होगा।
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कड़ी सुरक्षा के बीच कराई गई थी प्रवेश परीक्षा
परीक्षा में कोई गड़बड़ी नहीं हो आरजीपीवी मे कड़े सुरक्षा के इंतजाम किया गया था। इसमें गांधी नगर थाना से पुलिसकर्मियों को सभी परीक्षा केंद्र पर तैनात करा दिया गया था। वहीं सभी विद्यार्थी ही हरकत पर नजर रखने के लिऐ पूर्व आईपीएस अधिकारियों का नियुक्त किया गया था। प्रत्येक केंद्र पर पर्यवेक्षक पदस्थ किए गए। परीक्षा में मोबाइल को प्रतिबंधित किया गया था।पीएचडी प्रवेश परीक्षा के लिए एक हजार 40 विद्यार्थियों में से 486 विद्यार्थी ही शामिल हुए हैं। 56 फीसदी से विद्यार्थी परीक्षा में पास नहीं हुए हैं। 44 फीसदी विद्यार्थी ही पीएचडी की सीटों पर प्रवेश लेने की पात्रता हासिल कर सके हैं। 
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