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एम्स भोपाल: डॉक्टरों ने सीखी रोबोटिक तकनीक, कैमरा कंट्रोल से लेकर टांके लगाने और सुई संभालने तक का अभ्यास

Sat, 31 Oct 2026 07:36 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Sat, 31 Oct 2026 07:36 PM IST
सार

एम्स भोपाल में दो दिवसीय कार्यशाला में डॉक्टरों को रोबोटिक और लैप्रोस्कोपिक सर्जरी का सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण दिया गया। जबड़े के पुनर्निर्माण, डेंटल इम्प्लांट और थ्रीडी सर्जिकल गाइड की डिजिटल प्लानिंग भी सिखाई गई।

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AIIMS Bhopal: Doctors learn robotic techniques, practicing everything from camera control to suturing and hand
एम्स भोपाल के चिकित्सक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रोबोटिक सर्जरी में छोटी-सी चूक भी ऑपरेशन की जटिलता बढ़ा सकती है। ऐसे में डॉक्टरों को सीधे मरीज पर सर्जरी करने से पहले मशीनों के संचालन और हाथों के तालमेल में दक्ष बनाना जरूरी है। इसी दिशा में एम्स भोपाल में चिकित्सकों को सिमुलेटर पर रोबोटिक सर्जरी की ट्रेनिंग दी गई। यहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन की वास्तविक परिस्थितियों जैसा अभ्यास करते हुए कैमरा नियंत्रित करने, सर्जिकल उपकरण चलाने, सुई संभालने और टांके लगाने के गुर सीखे। एम्स भोपाल की सुश्रुत स्किल्स लैब में आयोजित दो दिवसीय सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम और कार्यशाला में रोबोटिक सर्जरी के साथ लैप्रोस्कोपिक तकनीकों का भी व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। रोबोटिक्स मेंटर सिमुलेटर पर डॉक्टरों को कैमरा कंट्रोल, उपकरणों के संचालन और फुट पेडल के साथ हाथों का तालमेल बैठाने का अभ्यास कराया गया। इसका उद्देश्य चिकित्सकों को जटिल सर्जिकल प्रक्रियाओं के लिए तकनीकी रूप से अधिक दक्ष बनाना है।
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सिमुलेटर पर सीखा, ऑपरेशन में काम आएगा कौशल
प्रशिक्षण में डॉक्टरों ने केवल रोबोटिक मशीन चलाना ही नहीं सीखा, बल्कि ऑपरेशन के दौरान जरूरी बारीकियों का अभ्यास भी किया। इसमें सुई को नियंत्रित करना, उपकरणों की सटीक मूवमेंट और हाथ-आंख के बीच बेहतर तालमेल विकसित करना शामिल रहा। स्त्री रोग, बड़ी आंत एवं मलाशय की सर्जरी, यूरोलॉजी, छाती और सामान्य सर्जरी से जुड़े रोबोटिक प्रशिक्षण मॉड्यूल भी रखे गए।
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जबड़े के पुनर्निर्माण की पहले ही तैयार होगी डिजिटल योजना
कार्यशाला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कैंसर सर्जरी के बाद मरीजों के पुनर्निर्माण और पुनर्वास से जुड़ा रहा। इसमें फिबुला फ्री फ्लैप तकनीक से जबड़े के पुनर्निर्माण की डिजिटल प्लानिंग सिखाई गई। इस प्रक्रिया में पैर की हड्डी (फिबुला) के एक हिस्से का उपयोग कर जबड़े का पुनर्निर्माण किया जाता है। इसके अलावा डेंटल इम्प्लांट लगाने की वर्चुअल सर्जिकल प्लानिंग और थ्रीडी प्रिंटेड सर्जिकल गाइड तैयार करने का प्रशिक्षण भी दिया गया। इससे ऑपरेशन से पहले ही उपचार की योजना और सर्जिकल प्रक्रिया को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलती है।
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लैप्रोस्कोपी में भी हाथों का तालमेल परखा
लैप्रोस्कोपिक एंडोट्रेनर कार्यशाला में कैमरा नेविगेशन, सर्जिकल उपकरणों का संचालन, टांके लगाने और गांठ बांधने का अभ्यास कराया गया। विशेषज्ञों ने सिमुलेशन के माध्यम से चिकित्सकों को तकनीक की बारीकियां समझाईं। इस दो दिवसीय आयोजन को सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, दंत चिकित्सा, बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी तथा रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभागों ने संयुक्त रूप से आयोजित किया।

 
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