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Aiims: प्रोटेस्ट कैंसर के शोध में एम्स को विश्व पटल पर मिली पहचान, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में मिला दूसरा स्थान
Sun, 17 Nov 2024 06:45 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Sun, 17 Nov 2024 06:45 PM IST
सार
एम्स भोपाल को प्रोटेस्ट कैंसर के शोध में विश्व पटल पर पहचान मिली है।श्रीलंकन एसोसिएशन ऑफ यूरोलॉजिकल सर्जन्स (SLUS) के रजत जयंती अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत का गौरव बढ़ाया है। एम्स ने सम्मेलन में दूसरा स्थान प्राप्त किया है।
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कोलंबों में एस्स के शोध का प्रेजेंटेशन देते डॉ. उदित खुराना
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजधानी भोपाल स्थित एम्स में जहां संस्थान लेवल पर मरीजों के इलाज में विस्तार किया जा रहा है वही रिसर्च के मामले में भी एम्स विश्व पटल पर परचम लहरा रहा है। एम्स भोपाल ने कोलंबो, श्रीलंका में 13-14 नवंबर 2024 को आयोजित श्रीलंकन एसोसिएशन ऑफ यूरोलॉजिकल सर्जन्स (SLUS) के रजत जयंती अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत का गौरव बढ़ाया। एम्स भोपाल के यूरोलॉजी विभाग के रेजिडेंट डॉ. उदित खुराना ने प्रोस्टेट कैंसर उपचार पर अपना शोध प्रस्तुत कर मंच प्रस्तुतियों में दूसरा स्थान प्राप्त किया। यह शोध डॉ. के माधवन के निर्देशन और डॉ. देवाशीष कौशल, अध्यक्ष, यूरोलॉजी विभाग, के मार्गदर्शन में किया गया।
जाने क्या है एम्स का शोध
शोध का विषय रैडिकल प्रोस्टेटेक्टमी (प्रोस्टेट ग्रंथि को हटाने की सर्जरी) का प्रोस्टेट कैंसर के स्थानीय रूप से उन्नत और ओलिगोमेटास्टेटिक प्रकारों के इलाज में उपयोग था। परंपरागत रूप से, प्रोस्टेट कैंसर जो प्रोस्टेट से बाहर फैल जाता है, उसे आमतौर पर दवाओं या विकिरण से प्रबंधित किया जाता है। हालांकि, एम्स भोपाल के अध्ययन से यह सामने आता है कि रैडिकल प्रोस्टेटेक्टमी (प्रोस्टेट ग्रंथि को हटाने की सर्जरी) चुनिंदा रोगियों में उपयोग की जाती है, तो यह रोग पर बेहतर नियंत्रण स्थापित करने में मदद कर सकती है, भले ही प्रोस्टेट थोड़ा सा बाहर फैल चुका हो। यह विशेष रूप से उन मरीजों के लिए महत्वपूर्ण है जिनमें कैंसर का फैलाव सीमित (ओलिगोमेटास्टेटिक) है, क्योंकि सर्जरी कैंसर को अधिक प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने में मदद कर सकती है और इसके प्रसार को धीमा करने में सहायक हो सकती है। एक संभावित अधिक प्रभावी उपचार प्रदान करके, यह तरीका लंबी अवधि तक चलने वाली कैंसर चिकित्सा से जुड़ी कुल लागत और तनाव को कम कर सकता है, जिससे न केवल मरीजों को बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य प्रणाली को भी लाभ होगा।
भोपाल और भारत दोनों के लिए गर्व का क्षण
एम्स के निदेशक डॉ. अजय सिंह ने कहा है कि यह उपलब्धि एम्स भोपाल की टीम की प्रतिभा, समर्पण और नवाचार की भावना का प्रमाण है। प्रोस्टेट कैंसर उपचार पर किया गया यह शोध न केवल चिकित्सा विज्ञान को आगे बढ़ाता है बल्कि रोगियों की बेहतर देखभाल सुनिश्चित करने में भी सहायक है। यह अंतरराष्ट्रीय मान्यता न केवल हमारे संस्थान के लिए गौरव का क्षण है बल्कि वैश्विक चिकित्सा समुदाय में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा को भी दर्शाता है। SLUS सम्मेलन में मिली यह मान्यता एम्स भोपाल और भारत दोनों के लिए गर्व का क्षण है। यह शोध अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय चिकित्सा अनुसंधान की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। इस अध्ययन के निष्कर्ष नई उपचार दिशानिर्देश तैयार करने में मददगार साबित हो सकते हैं और भारत के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर मरीजों को लाभ पहुंचा सकते हैं।
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जाने क्या है एम्स का शोध
शोध का विषय रैडिकल प्रोस्टेटेक्टमी (प्रोस्टेट ग्रंथि को हटाने की सर्जरी) का प्रोस्टेट कैंसर के स्थानीय रूप से उन्नत और ओलिगोमेटास्टेटिक प्रकारों के इलाज में उपयोग था। परंपरागत रूप से, प्रोस्टेट कैंसर जो प्रोस्टेट से बाहर फैल जाता है, उसे आमतौर पर दवाओं या विकिरण से प्रबंधित किया जाता है। हालांकि, एम्स भोपाल के अध्ययन से यह सामने आता है कि रैडिकल प्रोस्टेटेक्टमी (प्रोस्टेट ग्रंथि को हटाने की सर्जरी) चुनिंदा रोगियों में उपयोग की जाती है, तो यह रोग पर बेहतर नियंत्रण स्थापित करने में मदद कर सकती है, भले ही प्रोस्टेट थोड़ा सा बाहर फैल चुका हो। यह विशेष रूप से उन मरीजों के लिए महत्वपूर्ण है जिनमें कैंसर का फैलाव सीमित (ओलिगोमेटास्टेटिक) है, क्योंकि सर्जरी कैंसर को अधिक प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने में मदद कर सकती है और इसके प्रसार को धीमा करने में सहायक हो सकती है। एक संभावित अधिक प्रभावी उपचार प्रदान करके, यह तरीका लंबी अवधि तक चलने वाली कैंसर चिकित्सा से जुड़ी कुल लागत और तनाव को कम कर सकता है, जिससे न केवल मरीजों को बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य प्रणाली को भी लाभ होगा।
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भोपाल और भारत दोनों के लिए गर्व का क्षण
एम्स के निदेशक डॉ. अजय सिंह ने कहा है कि यह उपलब्धि एम्स भोपाल की टीम की प्रतिभा, समर्पण और नवाचार की भावना का प्रमाण है। प्रोस्टेट कैंसर उपचार पर किया गया यह शोध न केवल चिकित्सा विज्ञान को आगे बढ़ाता है बल्कि रोगियों की बेहतर देखभाल सुनिश्चित करने में भी सहायक है। यह अंतरराष्ट्रीय मान्यता न केवल हमारे संस्थान के लिए गौरव का क्षण है बल्कि वैश्विक चिकित्सा समुदाय में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा को भी दर्शाता है। SLUS सम्मेलन में मिली यह मान्यता एम्स भोपाल और भारत दोनों के लिए गर्व का क्षण है। यह शोध अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय चिकित्सा अनुसंधान की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। इस अध्ययन के निष्कर्ष नई उपचार दिशानिर्देश तैयार करने में मददगार साबित हो सकते हैं और भारत के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर मरीजों को लाभ पहुंचा सकते हैं।
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