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वन विकास निगम की 50वीं वर्षगांठ: CM डॉ. यादव ने किया ‘विजन 2047’ का अनावरण, बोले- राख के पहाड़ों पर भी बनाए वन
Thu, 24 Jul 2025 06:58 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Thu, 24 Jul 2025 06:58 PM IST
सार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। खनन और बिजली उत्पादन से बने राख के पहाड़ों पर भी वन लगाए गए हैं, जिससे 3 लाख 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में वनों का पुनर्वास हुआ है। यह कार्य राज्य वन विकास निगम द्वारा किया गया, जिसकी पूरे देश में सराहना हो रही है। उन्होंने वन्यजीवों की सुरक्षा, ईको-टूरिज्म और जल-संरक्षण पर भी जोर दिया।
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश ने खनन और बिजली उत्पादन के कारण बने राख के पहाड़ों पर भी वन विकसित कर एक बड़ी चुनौती को सफलतापूर्वक स्वीकार किया है। प्रदेश में 3 लाख 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में वनों का पुनर्वास एक बड़ी उपलब्धि है और इसके लिए राज्य वन विकास निगम बधाई का पात्र है। अन्य राज्य भी अब इस मॉडल को अपनाने के लिए उत्सुक हैं। मुख्यमंत्री गुरुवार को वन विकास निगम की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर भारतीय वन प्रबंधन संस्थान, भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने ‘विजन डॉक्यूमेंट 2047’ का अनावरण किया और निगम की उपलब्धियों पर आधारित लघु फिल्म भी देखी। उन्होंने निगम के उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित भी किया।
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सीएम डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में वनों का संरक्षण, वन्य जीवों की रक्षा और वन उपज का बेहतर प्रबंधन किया जा रहा है। प्रदेश में सघन वन क्षेत्र की रक्षा और वन्यजीवों के संरक्षण में कार्यरत वन सेवा के अधिकारी-कर्मचारी प्रशंसा के पात्र हैं। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार अब जू (चिड़ियाघर) और वन्य जीव रेस्क्यू सेंटर भी स्थापित कर रही है। उन्होंने वन क्षेत्रों में ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने और सागौन जैसी श्रेष्ठ लकड़ियों के उपयोग से फर्नीचर हब विकसित करने का सुझाव भी दिया।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। यहां के वन अनेक प्रमुख नदियों की जलराशि को संजोते हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में देश में सबसे ज्यादा बाघ, चंबल में घड़ियाल और गिद्धों का पुनः संरक्षण जैसी पहलें वन्यजीव पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण की मिसाल हैं। राज्य में अब सर्पदंश से मृत्यु रोकने और सांपों की गणना की तैयारी भी की जा रही है। कार्यक्रम में वन राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार ने बताया कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ और ‘जल-गंगा संवर्धन अभियान’ जैसे नवाचारों से राज्य को हरित और जल समृद्ध बनाया जा रहा है। वहीं अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने कहा कि 1975 में गठित निगम ने अब तक 3.90 लाख हेक्टेयर जंगलों का विकास किया है और वह लगातार लाभ में भी रहा है।
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सीएम डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में वनों का संरक्षण, वन्य जीवों की रक्षा और वन उपज का बेहतर प्रबंधन किया जा रहा है। प्रदेश में सघन वन क्षेत्र की रक्षा और वन्यजीवों के संरक्षण में कार्यरत वन सेवा के अधिकारी-कर्मचारी प्रशंसा के पात्र हैं। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार अब जू (चिड़ियाघर) और वन्य जीव रेस्क्यू सेंटर भी स्थापित कर रही है। उन्होंने वन क्षेत्रों में ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने और सागौन जैसी श्रेष्ठ लकड़ियों के उपयोग से फर्नीचर हब विकसित करने का सुझाव भी दिया।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। यहां के वन अनेक प्रमुख नदियों की जलराशि को संजोते हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में देश में सबसे ज्यादा बाघ, चंबल में घड़ियाल और गिद्धों का पुनः संरक्षण जैसी पहलें वन्यजीव पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण की मिसाल हैं। राज्य में अब सर्पदंश से मृत्यु रोकने और सांपों की गणना की तैयारी भी की जा रही है। कार्यक्रम में वन राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार ने बताया कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ और ‘जल-गंगा संवर्धन अभियान’ जैसे नवाचारों से राज्य को हरित और जल समृद्ध बनाया जा रहा है। वहीं अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने कहा कि 1975 में गठित निगम ने अब तक 3.90 लाख हेक्टेयर जंगलों का विकास किया है और वह लगातार लाभ में भी रहा है।
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