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भोपाल में कौव्वों ने एक मजदूर का जीना किया मुहाल, घर से निकलते ही करते हैं हमला
Wed, 04 Sep 2019 06:53 PM IST
Prachi Priyam
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Prachi Priyam
Updated Wed, 04 Sep 2019 06:53 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Social media
भोपाल के शिवपुरी जिले के सुमेला गांव में रहने वाले एक दिहाड़ी मजदूर का घर से बाहर निकलना दूभर हो गया है। वह घर से बाहर निकलता है और उन पर कौव्वों का एक झुंड हमला शुरू कर देता है। यह सिलसिला पिछले तीन सालों से चल रहा है।
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कौव्वों के हमले से बचने के लिये शिव केवट हमेशा एक छड़ी लेकर चलता है, लेकिन आसमान में उड़ते कौव्वे हमेशा मौके की तलाश में रहते हैं कि कब उसके सिर पर चोंच से वार कर दें ।
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केवट ने बताया कि यह सब तीन साल पहले शुरु हुआ था। उसने लोहे की तार में फंसे कौवे के एक बच्चे को बचाने के लिये उठाया था लेकिन उसने उसके हाथ में ही दम तोड़ दिया। इसके बाद कौव्वों को लगा कि केवट ने ही उसे मारा है। केवट बेहद अफसोस जताते हुए कहता है कि काश मैं उन्हें समझा पाता कि मैं केवल उसकी मदद करने की कोशिश कर रहा था।
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केवट ने कहा कि उस दिन के बाद से जब भी मैं घर से बाहर निकलता हूं तो अपने बचाव के लिये एक छड़ी रखता हूं। इसके बावजूद कई बार उनके हमले से बच नहीं पाता। 35 वर्षीय दिहाड़ी मजदूर केवट के ठेकेदार काले खटीक ने बताया कि कौव्वों का दोष दूर करने और इस मुसीबत से छुटकारा पाने के लिये केवट ने एक साल पहले पूजा-पाठ भी करवाया था , लेकिन उससे कोई फायदा नहीं हुआ।
केवट के इस दावे के संबंध में पक्षी विशेषज्ञ अजय गड़ीकर ने बताया कि यह बिल्कुल संभव है क्योंकि पक्षियों की याददाश्त अच्छी होती है । उनकी कई इंद्रियां मनुष्य से अधिक तेज होती हैं , इसलिये पक्षियों की कई प्रजातियां हजारों मील तक एक जगह से दूसरी जगह विस्थापित होने के बाद फिर से अपने मूल स्थान पर लौट आती हैं।
उन्होंने बताया कि कौव्वे एक आदमी को चेहरे से पहचान सकते हैं और पक्षियों में कौव्वे आक्रामक भी होते हैं। उनकी देखने, सुनने की शक्ति मानव से अधिक होती है।
