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आरटीआई के तहत मांगी लाखों पन्नों की जानकारी

Wed, 16 Apr 2014 12:39 PM IST
Updated Wed, 16 Apr 2014 12:39 PM IST
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मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के नगर निगम के कर्मचारी आजकल सूचना के अधिकार(आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी को लेकर एक अलग तरह की उलझन में है। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई इस जानकारी को उपलब्ध करा पाना नगर-निगम को लगभग असंभव लग रहा है।

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शहर के जहांगीराबाद निवासी और राष्ट्र सेवक संघ नाम की संस्था के प्रदेश अध्यक्ष विजय विश्वकर्मा ने नगर निगम से सूचना के अधिकार के तहत नगर निगम के पूरे कार्य की फाइलों की फ़ोटोकॉपी मांग ली है। भोपाल के 14 ज़ोनों में बंटे 66 वार्ड से संबंधित जानकारी इतनी अधिक है कि इन्हें लेने के लिए ही कई ट्रक लग सकते हैं।
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फ़ोटोकॉपी करने का व्यवसाय करने वाले विजय विश्वकर्मा ने जो जानकारी मांगी है उसके तहत उन्होंने नगर निगम के सभी वार्ड में रहने वाले लोगों के संपत्तिकर और जल कर के निर्धारण से संबंधित काग़ज़ात मांगे हैं।

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एक ज़ोन में ढाई लाख पेज

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भोपाल की आबादी इस वक़्त 19,14,339 मानी जाती है। हर परिवार की संपत्ति और पानी के कर की गणना अलग-अलग की जाती है। विश्वकर्मा ने आरटीआई के तहत भोपाल नगर निगम द्वारा केंद्र सरकार, राज्य सरकार और दूसरी वित्तीय संस्थाओं से लिए गए लोन की राशि और फाइल, एडवांस में दिया गया पैसा और अमानत का रजिस्टर भी मांग लिया है।

नगर निगम मुख्यालय की मुख्य कैश बुक, बैंक स्टेटमेंट्स, चेक बुक रजिस्टर, पेड पार्किंग, नगर निगम के वाहन, विद्युत उपकरण, फर्नीचर, जल प्रदाय मोटर, पंप के रजिस्टर, तहबाज़ारी, नीलामी संबंधी फोटो कापी की भी मांग उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत की है। विजय विश्वकर्मा ने बताया, "मैंने जानकारी नगर निगम मुख्यालय से मांगी थी लेकिन इसका जवाब अलग-अलग जगहों से आ रहा है। मुझे पूरी जानकारी एक ही जगह से मिलनी चाहिए।"

वहीं निगम के अधिकारियों का कहना है कि जानकारी इतनी अधिक है कि अलग-अलग जगहों से इकठ्ठा करके ही उन्हें उपलब्ध कराई जा सकती है। निगम के एक ज़ोन से मिले जवाब में उन्हें बताया गया है कि जानकारी लगभग 2,50,000 लाख पेज की होगी। वहीं एक ज़ोन के अधिकारी ने जानकारी को 2,02,740 पेजों में होना बताकर 4 रुपये प्रति पेज के हिसाब से 8,10,920 रुपये की मांग की है।

एक ज़ोन के अधिकारी ने अपने जवाब में लिखा है कि यह जानकारी बहुत ही विस्तृत और विशालकाय है, जिसे उपलब्ध कराया जाना संभव नहीं है। उन्होंने आगे लिखा कि इस प्रकार की सूचना का अनुरोध व्यापक लोकहित में न होकर संपूर्ण निकाय को अंत्यंत जटिल कार्य में उलझाकर अकारण समय बर्बाद करने और परेशान करने की मानसिकता से प्रतिपादित होता है।

आरटीआई का असर

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निगम अपर आयुक्त और अपीलीय अधिकारी जीपी माली बताते हैं, "नगर निगम से संबंधित सभी जानकारी इस सूचना के अधिकार के तहत मांग ली गई है। मुझे नहीं लगता कि इसे उपलब्ध करना इतना आसान है। यह जानकारी इतनी है कि इसकी गणना करना भी मुश्किल है। यह करोड़ों में जाएगी। लेकिन हम निराकरण जल्द ही कर देंगे।"

वहीं विजय विश्वकर्मा का कहना है कि भष्टाचार को रोकने के लिए उन्हें इस पूरी जानकारी की ज़रूरत है। वह स्वंय भी मानते हैं कि इसे उपलब्ध कराना आसान नहीं होगा। ग़रीबी रेखा का होने की वजह से वह यह पूरी जानकारी मुफ्त में चाह रहे हैं। वही राज्य शासन के प्रावधान के मुताबिक अधिकतम 50 पेज मुफ़्त में दिए जा सकते हैं।

विजय कहते हैं, "जानकारी दो करोड़ से भी ज्यादा पेजों की हो सकती है। यह सब भष्टाचार के ख़िलाफ किया जा रहा है।" राष्ट्र सेवक संघ जिसके प्रदेश अध्यक्ष विश्वकर्मा हैं, उसके महासचिव काज़ी कयामउद्दीन भी नगर निगम से सूचना के अधिकार के तहत कई बार जानकारियां ले चुके हैं। दोनों ने अब तक लगभग 120 बार आरटीआई के तहत सूचनाएँ ली हैं।

काज़ी कयामउद्दीन ने बताया, "नगर निगम के स्लाटर हाउस में बीमार, गर्भवती जानवरों को मारा जा रहा था। इस मामले को लेकर हमने सूचना के अधिकार के तहत आवेदन किया और जानकारी को लेकर हाईकोर्ट में मामला लगाया, जिसके बाद वहां सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश हुआ।"

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