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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Bhopal: In the name of providing jobs to the unemployed, opening bank accounts, selling them for cyber fraud; Inter-state gang arrested

भोपाल: बेरोजगारों को जॉब दिलवाने के नाम पर बैंक खाते खुलवाते, साइबर फ्रॉड के लिए उन्हें बेचते; इंटर-स्टेट गैंग गिरफ्तार

Sat, 18 Dec 2021 06:33 PM IST
रवींद्र भजनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: रवींद्र भजनी Updated Sat, 18 Dec 2021 06:33 PM IST
सार

भोपाल की साइबर पुलिस ने बेरोजगार युवाओं को जॉब का लालच देकर ठगी करने वाले इंटर-स्टेट गैंग को गिरफ्तार किया है। गिरोह खाते खुलवाता, फिर उन्हें साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल करने के लिए बेच देते। एक खाते में 41 लाख रुपये के ट्रांजेक्शन हुए तो उठा संदेह। 
 

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Bhopal: In the name of providing jobs to the unemployed, opening bank accounts, selling them for cyber fraud; Inter-state gang arrested
भोपाल में साइबर क्राइम पुलिस ने इंटरस्टेट गैंग से सिम, एटीएम और देसी कट्टे बरामद किए। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भोपाल पुलिस ने साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल करने के लिए बैंक खातों को बेचने वाले इंटर-स्टेट गैंग को गिरफ्तार किया है। आरोपी बेरोजगार युवाओं को जॉब का लालच देते थे। उनसे सैलरी के लिए बैंक में अकाउंट खुलवाते। फिर उन खातों की पासबुक और एटीएम साइबर फ्रॉड करने वाले गिरोह को बेच देते। एक खाते में एक 41 लाख रुपये के ट्रांजेक्शन हुए तो उसने साइबर पुलिस को शिकायत की और जांच में इस गैंग का खुलासा हुआ। पुलिस ने बिहारी गिरोह के 6 सदस्यों को गिरफ्तार किया है।  
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भोपाल की एक युवती को आयुष लिटोरिया ने नौकरी दिलाने का लालच दिया था। सैलरी के लिए उसने कैनरा बैंक में खाता खोला। वेरिफिकेशन के नाम पर लिटोरिया ने उससे एटीएम और पासबुक रखवा लिए। कुछ दिन बाद युवती को पता चला कि लाखों रुपये का लेन-देन उसके खाते में हो रहा है। बैंक अधिकारी भी वेरिफिकेशन के लिए उसके घर पहुंच गए। तब उसे गड़बड़ी का शक हुआ और उसने साइबर पुलिस को शिकायत की। इसके आधार पर बैंक खाता संचालित करने वालों और उससे लिंक मोबाइल नंबर के उपयोगकर्ताओं के खिलाफ धोखाधड़ी (धारा 420) का केस दर्ज किया गया। गिरफ्तार युवकों में आयुष लिटोरिया (भोपाल), निखिल शर्मा (भोपाल), मोहम्मद अजहरुद्दीन (पश्चिमी चंपारण), कुंदन कुमार सिंह (रोहतास), आलोक कुमार यादव (पश्चिमी चंपारण) और राहुल आलम (पश्चिम चंपारण)  शामिल है। 
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ऐसे करते थे वारदात
आयुष लिटोरिया बेरोजगार युवाओं से संपर्क करता। नौकरी के नाम पर बैंक में खाता खुलवाता है। बैंक खाते से लिंक करने के लिए मोबाइल नंबर कंपनी के नाम से देता है। उसी मोबाइल नंबर पर नेट बैंकिंग शुरू करवाते। फिर वह सिम, पासबुक और एटीएम बिहार के मोहम्मद अजरूद्दीन उर्फ डक् को बेचते, जो भोपाल में पढ़ाई करता था। खाते की पासबुक, सिम और एटीएम कार्ड पार्सल से भेजते या आलोक और राहुल खुद की गाड़ी से भोपाल आकर ले जाते। अभी तक आरोपियों से लगभग सभी राज्यों में बैंक खाते, सिमकार्ड एवं एटीएम कार्ड बेचने के इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। 
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पुलिस ने पकड़ा 6 लोगों को 
भोपाल की साइबर क्राइम पुलिस ने टेक्निकल एनालिसिस के आधार पर भोपाल से 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों से अपराध में इस्तेमाल हुए बैंक पासबुक और एटीएम कार्ड के साथ-साथ 25 बैंक पासबुक, 22 एटीएम कार्ड, 22 सिम और मोबाइल फोन, 18 सिम और दो देसी कट्टे के साथ ही महिन्द्रा स्कॉर्पियो कार जब्त की है।  
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