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Bhind Loksabha Seat: क्या भिंड में भाजपा के दबदबे को रोक सकेंगे बरैया? बीएसपी ने बनाया मुकाबले को रोचक
Wed, 29 May 2024 06:36 PM IST
दिनेश शर्मा
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, भिंड
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, भिंड
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 29 May 2024 06:36 PM IST
सार
मध्य प्रदेश की भिंड लोकसभा सीट पर भाजपा से सांसद संध्या राय चुनाव मैदान में हैं। उनके सामने कांग्रेस विधायक फूलसिंह बरैया की चुनौती है तो वहीं बसपा के कल्याण सिंह कंसाना ने कांग्रेस की मुसीबत बढ़ा दी है।
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भिंड में भी त्रिकोणीय मुकाबला है।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भिंड लोकसभा सीट पर 1989 से भाजपा का दबदबा है। परिसीमन के बाद यह सीट अनूसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई। इसके बाद भी भाजपा ने इस सीट पर अपना दबदबा कमजोर नहीं होने दिया। इस बार मुख्य मुकाबला भाजपा की मौजूदा सांसद संध्या राय और कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया के बीच है। देवाशीष जरारिया के बीएसपी के टिकट पर चुनाव लड़ने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। इस सीट पर कुल सात उम्मीदवार भाग्य आजमा रहे हैं।
भिंड लोकसभा सीट पर तीसरे चरण में मतदान हुआ। 54.93 प्रतिशत मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया। 2019 में यहां 54.42 प्रतिशत और 2014 में 45.63 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट किया था। 2019 से मामूली बढ़त के साथ मतदान हुआ लेकिन इस बार मुकाबला त्रिकोणीय होने से जीत-हार के मार्जिन और कम होने की बात कही जा रही है। भिंड लोकसभा सीट में आठ विधानसभा क्षेत्र आते हैं, जिनमें अटेर, भिंड, लाहर, मेहगांव, गोहाद, सेवदा, भांडेर और दतिया शामिल है। खास बात यह है कि 2023 के विधानसभा चुनावों में चार-चार सीटों पर भाजपा और कांग्रेस को जीत मिली थी। इस वजह से कांग्रेस इस सीट को लेकर आशान्वित नजर आ रही है।
2008 में हुई थी आरक्षित
भिंड लोकसभा सीट 2008 के परिसीमन के बाद अनूसूचित जाति के लिए आरक्षित है। इसके बाद के तीनों लोकसभा चुनावों में भाजपा को यहां जीत मिलती रही है। भाजपा ने 2019 में यह सीट संध्या राय ने जीती थी। इससे पहले 2014 में भागीरथ प्रसाद ने यहां से जीत हासिल की थी। 2009 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव हारे भागीरथ प्रसाद को 2014 में भी पार्टी ने उम्मीदवार बनाया था। इसके बाद उन्होंने पार्टी छोड़कर भाजपा की सदस्यता ली और उन्हें तत्काल टिकट भी मिल गया था। तब वे 2014 में यहां से सांसद बने थे।
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राजमाता और वसुंधरा भी लड़े हैं यहां से चुनाव
भिंड लोकसभा सीट 2008 में आरक्षित हुई। इससे पहले 1971 में जनसंघ के उम्मीदवार के तौर पर राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने इस सीट को कांग्रेस से छीना था। हालांकि, 1984 में कांग्रेस की लहर में उनकी बेटी वसुंधरा राजे को यहां हार का सामना करना पड़ा था। 1989 के बाद से भाजपा ने यहां लगातार जीत का सिलसिला कायम रखा है।
यह हैं उम्मीदवार
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भिंड लोकसभा सीट पर तीसरे चरण में मतदान हुआ। 54.93 प्रतिशत मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया। 2019 में यहां 54.42 प्रतिशत और 2014 में 45.63 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट किया था। 2019 से मामूली बढ़त के साथ मतदान हुआ लेकिन इस बार मुकाबला त्रिकोणीय होने से जीत-हार के मार्जिन और कम होने की बात कही जा रही है। भिंड लोकसभा सीट में आठ विधानसभा क्षेत्र आते हैं, जिनमें अटेर, भिंड, लाहर, मेहगांव, गोहाद, सेवदा, भांडेर और दतिया शामिल है। खास बात यह है कि 2023 के विधानसभा चुनावों में चार-चार सीटों पर भाजपा और कांग्रेस को जीत मिली थी। इस वजह से कांग्रेस इस सीट को लेकर आशान्वित नजर आ रही है।
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2008 में हुई थी आरक्षित
भिंड लोकसभा सीट 2008 के परिसीमन के बाद अनूसूचित जाति के लिए आरक्षित है। इसके बाद के तीनों लोकसभा चुनावों में भाजपा को यहां जीत मिलती रही है। भाजपा ने 2019 में यह सीट संध्या राय ने जीती थी। इससे पहले 2014 में भागीरथ प्रसाद ने यहां से जीत हासिल की थी। 2009 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव हारे भागीरथ प्रसाद को 2014 में भी पार्टी ने उम्मीदवार बनाया था। इसके बाद उन्होंने पार्टी छोड़कर भाजपा की सदस्यता ली और उन्हें तत्काल टिकट भी मिल गया था। तब वे 2014 में यहां से सांसद बने थे।
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राजमाता और वसुंधरा भी लड़े हैं यहां से चुनाव
भिंड लोकसभा सीट 2008 में आरक्षित हुई। इससे पहले 1971 में जनसंघ के उम्मीदवार के तौर पर राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने इस सीट को कांग्रेस से छीना था। हालांकि, 1984 में कांग्रेस की लहर में उनकी बेटी वसुंधरा राजे को यहां हार का सामना करना पड़ा था। 1989 के बाद से भाजपा ने यहां लगातार जीत का सिलसिला कायम रखा है।
यह हैं उम्मीदवार
| देवाशीष जरारिया | बीएसपी |
| फूलसिंह बरैया | कांग्रेस |
| संध्या राय | भाजपा |
| उमेश गर्ग | निर्दलीय |
| राकेश | निर्दलीय |
| रेखा शाक्य | निर्दलीय |
| हरिमोहन | निर्दलीय |
