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Bhind News: ग्वालियर के अधिवक्ता पर एफआईआर से नाराज वकील, एकतरफा कार्रवाई का आरोप, एसडीएम को ज्ञापन सौंपा
Tue, 06 Jan 2026 11:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भिंड
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भिंड
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 06 Jan 2026 11:36 PM IST
सार
ग्वालियर के अधिवक्ता अनिल मिश्रा और उनकी टीम के खिलाफ दर्ज एफआईआर के विरोध में भिंड जिले के अधिवक्ताओं ने अधिवक्ता संघ के नेतृत्व में एसडीएम कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और ग्वालियर पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाते हुए ज्ञापन सौंपा।
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भिंड जिले के वकीलों ने किया प्रदर्शन
विस्तार
ग्वालियर के अधिवक्ता अनिल मिश्रा एवं उनकी टीम के खिलाफ दर्ज एफआईआर के विरोध में मंगलवार को भिंड जिले की लहार तहसील में अधिवक्ता संघ के बैनर तले जोरदार प्रदर्शन किया गया। अधिवक्ता बड़ी संख्या में जमा होकर लहार एसडीएम कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने विरोध दर्ज कराते हुए एसडीएम को ज्ञापन दिया। इस दौरान ग्वालियर पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
अधिवक्ताओं ने बताया कि यह पूरा मामला शिवपुरी जिले के खनियाधाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां बीते दिनों भीम आर्मी द्वारा मनुस्मृति जलाए जाने की घटना सामने आई थी। इस घटना के बाद सवर्ण समाज में भारी आक्रोश फैल गया था। इसी क्रम में ग्वालियर के अधिवक्ता अनिल मिश्रा सहित कई समाजसेवी, बार एसोसिएशन और विभिन्न राजनीतिक संगठनों से जुड़े लोगों ने एकजुट होकर विरोध स्वरूप भीमराव सकपाल का पुतला दहन किया था।
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पुतला दहन की इस घटना के बाद भीम आर्मी के पदाधिकारी मकरंद बौद्ध द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई, जिस पर ग्वालियर पुलिस ने सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। इसी कार्रवाई के विरोध में लहार तहसील के अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए इसे एकतरफा कार्रवाई बताया।
अधिवक्ताओं का कहना है कि जिस व्यक्ति को पुलिस ने फरियादी बनाया है, वही छात्र बदमाश है और उसके खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसके बावजूद पुलिस ने उसकी कथित झूठी शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि जब यह मामला सार्वजनिक हुआ तो ग्वालियर पुलिस प्रशासन हरकत में आया और झूठी शिकायत करने वाले मकरंद बौद्ध, जो कि कथित तौर पर वारंटी अपराधी है, उसे गिरफ्तार किया गया।
वकीलों ने आरोप लगाया कि यह पूरी कार्रवाई अधिवक्ताओं को दबाने और डराने की साजिश के तहत की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि मनुस्मृति जैसे धार्मिक ग्रंथ को जलाने वालों के खिलाफ अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि मनुस्मृति जलाने वालों के खिलाफ जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
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अधिवक्ताओं ने बताया कि यह पूरा मामला शिवपुरी जिले के खनियाधाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां बीते दिनों भीम आर्मी द्वारा मनुस्मृति जलाए जाने की घटना सामने आई थी। इस घटना के बाद सवर्ण समाज में भारी आक्रोश फैल गया था। इसी क्रम में ग्वालियर के अधिवक्ता अनिल मिश्रा सहित कई समाजसेवी, बार एसोसिएशन और विभिन्न राजनीतिक संगठनों से जुड़े लोगों ने एकजुट होकर विरोध स्वरूप भीमराव सकपाल का पुतला दहन किया था।
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पुतला दहन की इस घटना के बाद भीम आर्मी के पदाधिकारी मकरंद बौद्ध द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई, जिस पर ग्वालियर पुलिस ने सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। इसी कार्रवाई के विरोध में लहार तहसील के अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए इसे एकतरफा कार्रवाई बताया।
अधिवक्ताओं का कहना है कि जिस व्यक्ति को पुलिस ने फरियादी बनाया है, वही छात्र बदमाश है और उसके खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसके बावजूद पुलिस ने उसकी कथित झूठी शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि जब यह मामला सार्वजनिक हुआ तो ग्वालियर पुलिस प्रशासन हरकत में आया और झूठी शिकायत करने वाले मकरंद बौद्ध, जो कि कथित तौर पर वारंटी अपराधी है, उसे गिरफ्तार किया गया।
वकीलों ने आरोप लगाया कि यह पूरी कार्रवाई अधिवक्ताओं को दबाने और डराने की साजिश के तहत की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि मनुस्मृति जैसे धार्मिक ग्रंथ को जलाने वालों के खिलाफ अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि मनुस्मृति जलाने वालों के खिलाफ जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
