एक बहू का संकल्प, "पूरे गांव में शौचालय बनने तक नहीं पहनूंगी सैंडल”
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मध्य प्रदेश के भिंड जिले में गांव को खुले में शौच से मुक्त करने के लिए एक महिला लोगों को नंगे पैर घूमकर प्रेरित कर रही है। 28 वर्षीय सपना तोमर का ससुराल मेहगांव के गुंगावली गांव में है। सपना का कहना है कि उसका संकल्प है- जब तक पूरा गांव खुले में शौच से मुक्त नहीं हो जाएगा, तब पैरों में कुछ नहीं पहनूंगी।
सपना के इस संकल्प की कहानी भी कम डरावनी नहीं है। डेढ़ साल पहले उसकी सहेली खुले में शौच करने गई तो दो युवकों ने उसे दबोचकर दुष्कर्म कर दिया। बदनामी के डर से उसने घटना किसी को नहीं बताई बल्कि आत्महत्या कर ली। लेकिन इस घटना ने मृतका की सहेली सपना तोमर को इस हद तक झकझोर दिया कि उसने सेंडल पहनना ही छोड़ दिया।
इसी दौरान स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों में शत-प्रतिशत शौचालय बनवाने के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए प्रेरकों की नियुक्ति की जा रही थी।
मिशन से जुड़ने की सपना की कहानी
जिला पंचायत सीईओ प्रवीण सिंह ने बताया कि मिशन स्वच्छ भारत के तहत गांवों में प्रेरकों की नियुक्ति के लिए इंटरव्यू लिए। इनमें पिपरौली पंचायत के लिए सपना तोमर का सिलेक्शन किया। सभी प्रेरकों की तरह सपना को भी टास्क देकर कहा कि 7 दिन में गांव के लोगों से शौचालय बनाने की सहमति लेकर आओ।
सीईओ का कहना है, सपना 7 दिन में आई तो गांव के 62 लोगों की सहमति लेकर आई और खुद नंगे पैर थी। पूछने पर बताया कि गांव में करीब 150 शौचालय बनना है। पूरे गांव में शौचालय बनने के बाद ही चप्पलें पहनेगी। इतना ही नहीं सपना 2 बेटों की मां हैं। ऐसे में बेटी की कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने एक बेटी भी गोद ली है।
सपना ने बताया कि स्वच्छता एवं स्वाभिमान की इस लड़ाई में पति उदयप्रताप सबसे ज्यादा सहयोग कर रहे हैं। शुरुआत में ससुरालवालों ने उसका विरोध किया, लेकिन अब उन्हें भी मेरे इस काम की आदत हो गई है।
