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मेरा पहला वोट: विधानसभा चुनावों में युवाओं के लिए रोजगार रहा सबसे बड़ा मुद्दा
Fri, 21 Dec 2018 06:59 PM IST
अमित मंडल
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमित मंडल
Updated Fri, 21 Dec 2018 06:59 PM IST
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मेरा पहला वोट
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छत्तीसगढ़,मध्यप्रदेश चुनाव में युवा वोटरों खासकर पहली बार वोट डालने वाले युवाओं ने बढ़ चढ़कर मतदान में हिस्सा लिया। मतदान से पहले ही अमर उजाला डिजिटल की टीम इन दोनों राज्यों में पहुंची थी। हमारी ने ऐसे लोगों की राय जानी जो इस चुनाव में पहली बार अपने मताधिकार का उपयोग करने जा रहे थे।
इन दोनों राज्यों में चुनाव यात्रा के दौरान करीब 5000 युवाओं से सीधी बात की। बातचीत में पता चला कि युवाओं के लिए सबसे अहम मुद्दा है रोजगार। इनका कहना था कि सरकार की तरफ से रोजगार के लिए ज्यादा प्रयास नहीं किए गए हैं। जो युवा अभी पढ़ाई कर रहे हैं उनका भी कहना था कि शिक्षा व्यवस्था में काफी सुधार की जरूरत है।
छोटे शहरों के युवाओं की शिकायत थी कि उनके शहर में उद्योग को बढ़ावा नहीं दिया जा रहा है जिसकी वजह से उनकी डिग्री धरी की धरी रह गई है।
जबलपुर में हमारी लाइव डिबेट के दौरान एमबीए डिग्री धारक एक युवा के सामने जब बीजेपी के प्रतिनिधि ने स्वरोजगार की बात कही तो उसने सीधा जवाब दिया, ‘सर आप लीडर हैं आप
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पकौड़ा तलिए, हम मैनेजमेंट संभालते हैं’। इससे पता चलता है कि युवाओं में रोजगार के मुद्दे पर सरकार से किस कदर नाराजगी है।
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इसके अलावा युवतियों के लिए भी रोजगार एक अहम मुद्दा रहा। आज की युवतियां कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहती हैं। वैसे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तो शिवराज सरकार को किसी ने नहीं कोसा लेकिन छोटे शहरों में महिलाएं थोड़ी असुरक्षित महसूस करती हैं।
अगर युवाओं के अंदर जागरूकता की बात की जाए तो मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के युवा चुनाव को लेकर काफी जागरुक दिखे और इसका साफ अगर मतदान प्रतिशत में भी देखा जा सकता है। चुनाव आयोग ने भी कई जागरूकता अभियानों के तहत कॉलेज और इंस्टीट्यूट में युवाओं को चुनाव के बारे में जागरुक किया।
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इन दोनों राज्यों में चुनाव यात्रा के दौरान करीब 5000 युवाओं से सीधी बात की। बातचीत में पता चला कि युवाओं के लिए सबसे अहम मुद्दा है रोजगार। इनका कहना था कि सरकार की तरफ से रोजगार के लिए ज्यादा प्रयास नहीं किए गए हैं। जो युवा अभी पढ़ाई कर रहे हैं उनका भी कहना था कि शिक्षा व्यवस्था में काफी सुधार की जरूरत है।
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छोटे शहरों के युवाओं की शिकायत थी कि उनके शहर में उद्योग को बढ़ावा नहीं दिया जा रहा है जिसकी वजह से उनकी डिग्री धरी की धरी रह गई है।
जबलपुर में हमारी लाइव डिबेट के दौरान एमबीए डिग्री धारक एक युवा के सामने जब बीजेपी के प्रतिनिधि ने स्वरोजगार की बात कही तो उसने सीधा जवाब दिया, ‘सर आप लीडर हैं आप
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पकौड़ा तलिए, हम मैनेजमेंट संभालते हैं’। इससे पता चलता है कि युवाओं में रोजगार के मुद्दे पर सरकार से किस कदर नाराजगी है।
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इसके अलावा युवतियों के लिए भी रोजगार एक अहम मुद्दा रहा। आज की युवतियां कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहती हैं। वैसे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तो शिवराज सरकार को किसी ने नहीं कोसा लेकिन छोटे शहरों में महिलाएं थोड़ी असुरक्षित महसूस करती हैं।
अगर युवाओं के अंदर जागरूकता की बात की जाए तो मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के युवा चुनाव को लेकर काफी जागरुक दिखे और इसका साफ अगर मतदान प्रतिशत में भी देखा जा सकता है। चुनाव आयोग ने भी कई जागरूकता अभियानों के तहत कॉलेज और इंस्टीट्यूट में युवाओं को चुनाव के बारे में जागरुक किया।
