व्यापमं के बाद डीमेट: बढ़ी मध्य प्रदेश सरकार की मुश्किलें
मध्य प्रदेश के डेंटल एंड मेडिकल टेस्ट (डीमेट) घोटाले की सीबीआई जांच की गुहार संबंधी एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने को कहा है।
डीमेट में मैनेजमेंट और एनआरआई कोटे के तहत भरी गई सीटों पर गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है। व्यापम घोटाले की जांच सीबीआई को सौंप चुकी चीफ जस्टिस एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ डीमेट घोटाले की जांच भी सीबीआई से कराने के पक्ष में दिखी।
पीठ ने राज्य सरकार को डीमेट के बारे में तमाम जानकारी लिखित रूप में देने को कहा है। साथ ही राज्य सरकार से सीबीआई जांच को लेकर अपना पक्ष रखने को कहा है।
सरकार से नहीं है लेना देना!
इससे पहले, मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने
कहा कि डीमेट परीक्षा निजी संस्था द्वारा निजी कॉलेजों के लिए आयोजित की
जाती है। सरकार का इस परीक्षा से कोई लेना देना नहीं है।
ऐसे में यह मामला
भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत नहीं चल सकता। इस पर पीठ ने अटॉर्नी जनरल
को लिखित में अपना पक्ष रखने को कहा।
मालूम हो कि एसोसिएशन फॉर प्राइवेट
मेडिकल एंड डेंटल कॉलेज (एपीडीएमसी) हर वर्ष डीमेट का आयोजन करता है। इसके
तहत 15 निजी डेंटल कॉलेज और छह निजी मेडिकल कॉलेजों में करीब 2800 सीटें
भरी जाती हैं
