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मध्य प्रदेश: पुलिस हिरासत से भागे आरोपी की खुदकुशी के मामले में मानवाधिकार आयोग ने डीआईजी इंदौर से मांगा जवाब
Fri, 10 Dec 2021 11:45 AM IST
सुभाष कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: सुभाष कुमार
Updated Fri, 10 Dec 2021 11:45 AM IST
सार
पुलिसकर्मी उसका डिस्चार्ज सर्टिफकेट बनवाने गया था इसी दौरान भीड़ का फायदा उठाकर आरोपी हथकड़ी सहित भाग गया। घटना के बाद पुलिसकर्मी ने केस दर्ज कराया था।
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भीड़ का फायदा उठाकर आरोपी हथकड़ी सहित भाग गया था।
- फोटो : Social Media
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विस्तार
इंदौर के एमवाय अस्पताल में पिछले दिनों एक आरोपी पुलिस हिरासत से भाग गया था। बाद में आरोपी ने आत्महत्या कर ली थी। आरोपी का नाम जामसिंह पिता झीतासिंह मालवीय निवासी मण्डलेश्वर है। उसे बड़वानी से पुलिसकर्मी जगदीश बालके एमवायएच में उपचार कराने के लिए लेकर गया था।
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पुलिसकर्मी उसका डिस्चार्ज सर्टिफकेट बनवाने गया था इसी दौरान भीड़ का फायदा उठाकर आरोपी हथकड़ी सहित भाग गया। घटना के बाद पुलिसकर्मी ने केस दर्ज कराया था। बाद में आरोपी के बारे में सूचना मिली कि उसने मण्डलेश्वर पहुंचकर खुदकुशी कर ली है। इस मामले में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति नरेन्द्र कुमार जैन ने उप पुलिस महानिरीक्षक इंदौर से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है।
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बंदी ने जेल में की खुदकुशी, वारिसों को पांच लाख देने की अनुशंसा
एक दूसरे मामले में मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने राज्य शासन से एक विचाराधीन बंदी की मौत पर उसके वैध वारिसों को पांच लाख रुपए दो माह में देने की अनुशंसा की है। आयोग ने जिला जेल पन्ना के विचाराधीन बंदी अन्नू उर्फ मंगूरे द्वारा चादर से फांसी का फंदा बनाकर जेल के कक्ष में फांसी लगाकर आत्महत्या करने के मामले में यह अनुशंसा की है। शासन चाहे तो इस राशि की वसूली दोषी जेलकर्मियों से कर सकता है। मामले में आयोग ने पाया कि जेलकर्मियों की लापरवाही के कारण मृतक के मानव अधिकारों की उपेक्षा हुई।
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अनुशंसा में आयोग ने यह भी कहा है कि राज्य शासन जिला जेल पन्ना के साथ ही प्रदेश की अन्य जेलों में बंदियों के पृथक कक्षों के अन्दर लगाये गये लोहे के ऐसे अनुपयोगी एंगल हटवाये, जिससे जेल प्रबंधन का बंदियों की सुरक्षा के प्रति दायित्व सुनिश्चित हो सके और बंदियों को आत्महत्या करने का अवसर न मिल सके। राज्य शासन जिला जेल पन्ना और इसी प्रकार प्रदेश की अन्य जेलों में भी बंदियों के उपयोग हेतु उपलब्ध कराई गई चादरों के उपयोग की समय-सीमा और उनकी गुणवत्ता के ऐसे मानक सुनिश्चित करें, जिससे ऐसी चादरों से फांसी का फंदा नहीं बनाया जा सके और ऐसी चादरों के जरिये बंदियों को आत्महत्या करने का कोई अवसर ही न मिले।
