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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   A Remarkable Bond: 25 Elephants Visit Dead Companion’s Burial Site as 30 More Arrive from Bandhavgarh

ऐसा याराना: मृत साथी की याद में दफन स्थल पर पहुंचा 25 हाथियों का दल, बांधवगढ़ से 30 और हाथियों के आने से हलचल

Mon, 19 Oct 2026 02:33 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शहडोल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शहडोल Published by: प्रिया वर्मा Updated Mon, 19 Oct 2026 02:33 PM IST
सार

चंदौली में करंट से हाथी की मौत के बाद उसके दफन स्थल पर 25 हाथियों का दल पहुंचा और कुछ देर रुकने के बाद आगे बढ़ गया। डीएफओ के मुताबिक हाथियों का यह दल अपने साथी की याद में यहां पहुंचा था। इसी बीच 30 हाथियों का एक और दल क्षेत्र में देखा गया है।

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A Remarkable Bond: 25 Elephants Visit Dead Companion’s Burial Site as 30 More Arrive from Bandhavgarh
साथी की मौत को नहीं भूला हाथियों का झुंड - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जिले में पश्चिम ब्यौहारी क्षेत्र के चंदौली में विद्युत तार के करंट की चपेट में आने से अकाल मौत का शिकार हुए मखना हाथी को दफनाए जाने के ठीक दूसरे दिन बाणसागर बांध के बैकवाटर क्षेत्र में रहने वाला 25 हाथियों का विशाल दल रात के समय ठीक उसी स्थान पर पहुंचा, जहां मखना का अंतिम संस्कार किया गया था। यह दल वहां कुछ समय तक रुका रहा और फिर शांत भाव से आगे बढ़ गया। इसके तुरंत बाद बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से भी 30 हाथियों का एक अन्य दल इस इलाके में आ पहुंचा, जिससे वन विभाग की चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं।

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मृत साथी की याद में पहुंचा झुंड
उत्तर वन मंडल की डीएफओ तरुणा वर्मा की मानें तो हाथियों की स्मरण शक्ति बहुत तेज होती है। वे अपने साथी की स्मृतियों के कारण ही उस स्थान तक पहुंचे थे। मृत मखना हाथी पिछले तीन महीने से इसी 25 हाथियों वाले दल के साथ लगातार रह रहा था। चंदौली के राजस्व क्षेत्र में बिजली के तार में फंसकर मखना की मृत्यु हो गई थी। वन विभाग ने सभी आवश्यक जांच प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद उसे विधि-विधान से दफना दिया था। इसके अगले ही दिन हाथियों का दल बाणसागर बैकवाटर इलाके से निकलकर सीधे दफन स्थल पर आया, कुछ देर वहां ठहरा और फिर झिरिया बीट की ओर चला गया।
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दो प्रमुख दलों की बढ़ी आवाजाही
इस समय उत्तर वन मंडल में हाथियों के दो अलग-अलग दल लगातार सक्रिय हैं और एक स्थान से दूसरे स्थान पर विचरण कर रहे हैं। पहला 25 हाथियों का दल है, जो पिछले दो-तीन वर्षों से बाणसागर के बैकवाटर वाले इलाके में स्थायी रूप से डेरा डाले हुए था और वर्तमान में झिरिया बीट क्षेत्र में घूम रहा है। वहीं दूसरा दल मखना हाथी की मृत्यु के दूसरे दिन ही बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से शहडोल पहुंचा है। लगभग 30 हाथियों का यह दूसरा दल अभी गोदावल रेंज की घोरसा बीट में बना हुआ है। 
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बता दें कि शहडोल संभाग पिछले कुछ वर्षों से हाथियों के प्रवास का प्रमुख गढ़ बन चुका है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में करीब 60 से 70 हाथी स्थायी रूप से निवास करते हैं। चूंकि शहडोल का कुछ नजदीकी जंगली इलाका इस टाइगर रिजर्व से सटा हुआ है, इसलिए फसलों के पकने के समय हाथियों की आवाजाही अक्सर देखी जाती है। इसके अतिरिक्त छत्तीसगढ़ के रास्ते अनूपपुर होकर भी हाथियों के दल इस संभाग में पहुंचते रहते हैं।


ग्रामीणों के लिए सुरक्षा अलर्ट
वन विभाग के सामने इस क्षेत्र में वन्यजीवों को इंसानी बस्तियों में जाने से रोकने और जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती खड़ी हो गई है। दोनों दल लगातार अपनी जगह बदल रहे हैं और खेतों में खड़ी फसलों को खाकर नुकसान पहुंचा रहे हैं। किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए वन विभाग की टीमें पूरी तरह से मुस्तैद हैं। मैदानी कर्मचारी लगातार गश्त कर रहे हैं और संवेदनशील गांवों में मुनादी करवाकर लोगों को सावधान कर रहे हैं। 

वन अधिकारियों ने ग्रामीणों से स्पष्ट अपील की है कि वे हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों की तरफ बिल्कुल न जाएं, हाथियों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न करें और अपने घरों व सुरक्षित स्थानों पर ही रहें।

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