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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   A medical college of indore will give special coaching for doctors for better handwriting

अब मरीज भी समझ सकेंगे डॉक्टरों की हैंडराइटिंग, लिखावट सुधारने को दी जाएगी कोचिंग

Sat, 06 Oct 2018 09:51 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Updated Sat, 06 Oct 2018 09:51 AM IST
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A medical college of indore will give special coaching for doctors for better handwriting
Doctors handwriting

आम तौर पर यह देखा गया है कि डॉक्टर मरीजों की पर्ची पर क्या लिखते हैं, ये या तो वही समझते हैं या दवाईयां देने वाले दुकानदार। लोगों को डॉक्टरों की लिखावट बिल्कुल भी समझ में नहीं आती। यह एक बहुत बड़ी समस्या है। लेकिन मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थित एमजीएम मेडिकल कॉलेज ने डॉक्टरों की लिखावट सुधारने के लिए एक विशेष कोचिंग शुरू करने की घोषणा की है, जिससे मरीजों को परेशानी न हो। 

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इसके तहत मेडिकल के छात्रों के लिए अलग से ट्रेनिंग सेशन और सेमिनार का आयोजन किया जाएगा, जिससे उनकी लिखावट में सुधार आ सके।  

एमजीएम मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. ज्योति बिंदल ने कहा कि डॉक्टरों की खराब लिखावट लंबे समय से परेशानी का सबब बनी हुई है और अब यह एक तरह से 'सामाजिक कलंक' बन चुका है। लेकिन हम चाहते हैं कि यह सब जल्द खत्म हो। 
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उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की खराब लिखावट की वजह से मरीजों को पर्ची पर लिखी गई दवा समझ में नहीं आती है, जिसकी वजह से वो कभी-कभी गलत दवा का भी इस्तेमाल कर लेते हैं, जिससे बाद में उन्हें परेशानी हो जाती है। इसके अलावा मेडिकल बीमा के मामलों में भी खराब लिखावट की वजह से दिक्कतें आती हैं। 
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बता दें कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हाल ही में खराब लिखावट के चलते तीन डॉक्टरों पर जुर्माना भी लगाया था। डॉ. बिंदल ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना में भी यह साफ तौर पर कहा गया है कि अगर डॉक्टरों की लिखावट समझ में नहीं आई तो मरीज इसका लाभ नहीं ले सकेंगे। 

ज्ञात हो कि मरीजों की दिक्कतों को देखते हुए डॉक्टरों की लिखावट सुधारने के लिए साल 2015 में स्वास्थ्य मंत्रालय ने पर्ची को बड़े अक्षरों (कैपिटल लेटर्स) में लिखना अनिवार्य कर दिया था, जिससे मरीज और दवा दुकानदार आसानी से पर्ची पर लिखी दवाई समझ सकें। 


इंदौर में डिजिटल पर्ची बना रहे डॉक्टर 

इस परेशानी से उबरने के लिए इंदौर में कुछ डॉक्टर मरीजों को डिजिटल पर्ची बनाकर दे रहे हैं। इसके लिए वो एक सॉफ्टवेयर का सहारा ले रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सॉफ्टवेयर से लिखने में भले ही उन्हें थोड़ा समय ज्यादा लगता है, लेकिन यह मरीजों और दवा दुकानदारों के लिए फायदेमंद है।

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