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मप्र में BJP सरकार के 2 साल: कांग्रेस से सत्ता छीनने के बाद कैसे बदला शिवराज का नजरिया, जानिए पांच पॉइंट्स में
सार
मध्य प्रदेश में 2018 में जो झटका भाजपा को मिला था, उसके बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया की मदद से सरकार तो बना ली पर इस बार शिवराज सिंह ऐसी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते, जिससे 2023 में कोई मुश्किल हो।
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चौथी पारी में शिवराज की कार्यशैली में कई बदलाव नजर आ रहे हैं।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा सरकार के आज दो साल पूरे हो रहे हैं। आज ही दिन 23 मार्च को शिवराज ने चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। 2018 में जो झटका भाजपा को मिला था, उसके बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया की मदद से सरकार तो बना ली पर इस बार शिवराज सिंह ऐसी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते, जिससे 2023 में कोई मुश्किल हो। 2018 के मामूली अंतर को वे इस बार पूरी तरह खत्म करने की कोशिश में जुटे हुए हैं। शिवराज सिंह ने इन दो वर्षों में प्रदेश में हुए 33 विधानसभा सीटों के उपचुनाव में भाजपा को 22 सीटों पर जीत दिलाई।
आदिवासियों पर फोकस
शिवराज सिंह चौहान ने 2023 की तैयारियां शुरू कर दी हैं। 2018 में मालवा-निमाड़ में भाजपा को खासा नुकसान उठाना पड़ा था। इस बार शिवराज ने यहां फोकस किया है। बता दें कि मध्य प्रदेश में आदिवासी लगभग 23 फ़ीसदी हैं और इनके लिए 47 सीटें सुरक्षित हैं। इनकी आबादी 84 विधानसभा सीटों पर असर डालती है। 2018 के चुनावों में आदिवासियों की 47 सीटों में से बीजेपी केवल 16 सीटें जीत सकी थी। हाल ही में भगोरिया मेले में सपत्निक पहुंचकर ये संदेश देने की कोशिश की, वे आदिवासी संस्कृति को खासा तवज्जो देते हैं। तीन दिन में दो बार वे भगोरिया में पहुंचे थे। वहीं हाल ही में रायसेन विवाद में भी शिवराज आदिवासियों के बीच पहुंचे थे। उनके मंत्री तो ये भी कह चुके हैं कि कोई कुछ भी कर ले, किसी भी बेगुनाह आदिवासी भाई पर कार्रवाई नहीं की जाएगी। बजट में भी आदिवासियों के लिए 26 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इस बड़े वोट बैंक को साधने के लिए प्रदेश में पेसा एक्ट लागू किया। इंदौर के भंवरकुआं चौराहे का नाम जननायक टंट्या भील रख दिया। बिरसा मुंडा की जयंती यानी 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस मनाने का ऐलान हुआ।
पिछड़े वर्ग को भी साधा
मध्य प्रदेश में ओबीसी वर्ग के आरक्षण मामले पर भी शिवराज सरकार उनका पक्ष लेती नजर आई है। इसके लिए प्रदेश में पंचायत चुनाव तक रद्द करवाए गए हैं। कोर्ट जाने से लेकर कांग्रेस को कटघरे में खड़े करने तक शिवराज सरकार ने हर वो कोशिश की, जिससे पिछड़े वर्ग के पक्ष में वो खड़ी नजर आए। बता दें कि प्रदेश में 52 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग की आबादी है। प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों में से 120 से ज्यादा सीटों पर ओबीसी वर्ग का सीधा दखल रहता है।
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सिंधिया समर्थकों से तालमेल
शिवराज की इस बार की सरकार के दो साल पूरे होने पर सिंधिया को कैसे भूला जा सकता है। 2018 के बाद 15 महीने कांग्रेस की सरकार रही। इस सरकार को बदलने में ज्योतिरादित्य सिंधिया का बड़ा रोल रहा। जब शिवराज ने चौथी बार सीएम की शपथ ली, तब से ही सिंधिया समर्थकों को साधना और उन्हें बराबर की जगह देना मुश्किल काम था। हालांकि शिवराज ने ये काम बखूबी किया। जहां बीते चुनाव में भाजपा कमजोर साबित हुई थी, वहां के सिंधिया समर्थकों को विकल्प बनाकर सब ठीक करने की कोशिशें भी हुई हैं। भाजपा के विरोध को भी मैनेज करने में शिवराज की अहम भूमिका रही।
नए वोटरों पर फोकस
सीएम शिवराज की कई योजनाएं तो मील का पत्थर साबित हुई हैं, लेकिन इस बार के कार्यकाल में उन्होंने यूथ पर फोकस करते हुए कई पहल की है। लाडली लक्ष्मी योजना का दूसरा फेज वो लेकर आए हैं। इसमें अब बालिकाओं को कॉलेज की शिक्षा में भी सरकार मदद करेगी। सीधा सा गणित है कि कॉलेज जाने वाले कई युवा नए वोटर होंगे, उन्हें अपनी ओर करने की कोई गुंजाइश शिवराज सरकार नहीं छोड़ रही है। वहीं इस बार के कार्यकाल में रोजगार मेले पर भी सरकार का फोकस है। युवाओं को नौकरी देने के लिए लगाए जाने वाले ये मेले कहीं न कहीं सरकार को फायदा भी दे सकते हैं।
अपराध मुक्त प्रदेश देने की छवि बनाने की कोशिश
शिवराज सरकार ने इस बार के दो सालों में माफिया पर सख्ती ज्यादा बरती है। गंभीर अपराधों के लिप्त बदमाशों के ठिकानों पर जेसीबी चलवाना हो या अपराधियों के आय के साधनों पर चोट करना। शिवराज सरकार ने अपराध पर लगाम कसने के लिए प्रयासरत सरकार होने का अहसास दिलाने की कोशिश की है। अब तो भाजपा शिवराज को बुलडोजर मामा की नई पहचान देने की योजना बना रही है। अपराध मुक्त प्रदेश के कामों के चलते यूपी में योगी आदित्यनाथ फिर सरकार बना चुके हैं। इस बार शिवराज ने भी इसी छवि बनाने और उसे भुनाने की कोशिश कर रहे हैं।
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आदिवासियों पर फोकस
शिवराज सिंह चौहान ने 2023 की तैयारियां शुरू कर दी हैं। 2018 में मालवा-निमाड़ में भाजपा को खासा नुकसान उठाना पड़ा था। इस बार शिवराज ने यहां फोकस किया है। बता दें कि मध्य प्रदेश में आदिवासी लगभग 23 फ़ीसदी हैं और इनके लिए 47 सीटें सुरक्षित हैं। इनकी आबादी 84 विधानसभा सीटों पर असर डालती है। 2018 के चुनावों में आदिवासियों की 47 सीटों में से बीजेपी केवल 16 सीटें जीत सकी थी। हाल ही में भगोरिया मेले में सपत्निक पहुंचकर ये संदेश देने की कोशिश की, वे आदिवासी संस्कृति को खासा तवज्जो देते हैं। तीन दिन में दो बार वे भगोरिया में पहुंचे थे। वहीं हाल ही में रायसेन विवाद में भी शिवराज आदिवासियों के बीच पहुंचे थे। उनके मंत्री तो ये भी कह चुके हैं कि कोई कुछ भी कर ले, किसी भी बेगुनाह आदिवासी भाई पर कार्रवाई नहीं की जाएगी। बजट में भी आदिवासियों के लिए 26 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इस बड़े वोट बैंक को साधने के लिए प्रदेश में पेसा एक्ट लागू किया। इंदौर के भंवरकुआं चौराहे का नाम जननायक टंट्या भील रख दिया। बिरसा मुंडा की जयंती यानी 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस मनाने का ऐलान हुआ।
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पिछड़े वर्ग को भी साधा
मध्य प्रदेश में ओबीसी वर्ग के आरक्षण मामले पर भी शिवराज सरकार उनका पक्ष लेती नजर आई है। इसके लिए प्रदेश में पंचायत चुनाव तक रद्द करवाए गए हैं। कोर्ट जाने से लेकर कांग्रेस को कटघरे में खड़े करने तक शिवराज सरकार ने हर वो कोशिश की, जिससे पिछड़े वर्ग के पक्ष में वो खड़ी नजर आए। बता दें कि प्रदेश में 52 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग की आबादी है। प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों में से 120 से ज्यादा सीटों पर ओबीसी वर्ग का सीधा दखल रहता है।
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सिंधिया समर्थकों से तालमेल
शिवराज की इस बार की सरकार के दो साल पूरे होने पर सिंधिया को कैसे भूला जा सकता है। 2018 के बाद 15 महीने कांग्रेस की सरकार रही। इस सरकार को बदलने में ज्योतिरादित्य सिंधिया का बड़ा रोल रहा। जब शिवराज ने चौथी बार सीएम की शपथ ली, तब से ही सिंधिया समर्थकों को साधना और उन्हें बराबर की जगह देना मुश्किल काम था। हालांकि शिवराज ने ये काम बखूबी किया। जहां बीते चुनाव में भाजपा कमजोर साबित हुई थी, वहां के सिंधिया समर्थकों को विकल्प बनाकर सब ठीक करने की कोशिशें भी हुई हैं। भाजपा के विरोध को भी मैनेज करने में शिवराज की अहम भूमिका रही।
नए वोटरों पर फोकस
सीएम शिवराज की कई योजनाएं तो मील का पत्थर साबित हुई हैं, लेकिन इस बार के कार्यकाल में उन्होंने यूथ पर फोकस करते हुए कई पहल की है। लाडली लक्ष्मी योजना का दूसरा फेज वो लेकर आए हैं। इसमें अब बालिकाओं को कॉलेज की शिक्षा में भी सरकार मदद करेगी। सीधा सा गणित है कि कॉलेज जाने वाले कई युवा नए वोटर होंगे, उन्हें अपनी ओर करने की कोई गुंजाइश शिवराज सरकार नहीं छोड़ रही है। वहीं इस बार के कार्यकाल में रोजगार मेले पर भी सरकार का फोकस है। युवाओं को नौकरी देने के लिए लगाए जाने वाले ये मेले कहीं न कहीं सरकार को फायदा भी दे सकते हैं।
अपराध मुक्त प्रदेश देने की छवि बनाने की कोशिश
शिवराज सरकार ने इस बार के दो सालों में माफिया पर सख्ती ज्यादा बरती है। गंभीर अपराधों के लिप्त बदमाशों के ठिकानों पर जेसीबी चलवाना हो या अपराधियों के आय के साधनों पर चोट करना। शिवराज सरकार ने अपराध पर लगाम कसने के लिए प्रयासरत सरकार होने का अहसास दिलाने की कोशिश की है। अब तो भाजपा शिवराज को बुलडोजर मामा की नई पहचान देने की योजना बना रही है। अपराध मुक्त प्रदेश के कामों के चलते यूपी में योगी आदित्यनाथ फिर सरकार बना चुके हैं। इस बार शिवराज ने भी इसी छवि बनाने और उसे भुनाने की कोशिश कर रहे हैं।
