जू का लगातार दूसरा ब्लैक फ्राइडे, जेब्रा बंकित भी चल बसा
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लगातार दूसरा शुक्रवार लखनऊ जू के लिए काला रहा। साथी संस्कृति की 20 नवंबर को मौत के बाद से सदमे में चल रहे नर जेब्रा बंकित ने भी शुक्रवार सुबह करीब 8:30 बजे अपने बाड़े में दम तोड़ दिया। बंकित संस्कृति की मौत के बाद से वह बदहवास चल रहा था।
बरेली से भारतीय पशु अनुसंधान संस्थान के चार वरिष्ठ पशु चिकित्सक-विशेषज्ञों की टीम का इलाज और सदमे से उबारने की भी कोशिशें उसे नहीं बचा सकीं। बंकित की मौत के बाद अब लखनऊ जू जेब्रा विहीन हो गया है।
डॉ. अशोक कश्यप, डॉ. उत्कर्ष शुक्ला, डॉ. विकास सिंह केपैनल ने शव का पोस्टमार्टम किया। इसमें मौत की मुख्य वजह कार्डियो फेल्योर पाया गया।
पीएम के बाद टीम ने अस्पताल परिसर में ही उसका शवदाह कर दिया। बंकित की मौत के बाद अब प्रदेश में सिर्फ एक ही जेब्रा मादा ऐश्वर्य रह गई है, जो कि इस वक्त कानपुर जू में है। लगभग 8 साल का बंकित दिसंबर 2013 में एक्सचेंज केतहत कानपुर जू से आया था।
जू स्टाफ दुखी, 94वां स्थापना दिवस कैंसिल
बंकित की मौत के बाद से जू स्टाफ मायूस है। लगातार दो जेब्राओं की मौत से दुखी जू प्रशासन ने इस साल 29 नवंबर को प्रस्तावित स्थापना दिवस समारोह कैंसिल कर दिया है। निदेशक प्राणि उद्यान अनुपम गुप्ता ने कहा कि वैसे भी हम इस बार कोई प्लानिंग नहीं कर रहे थे, लेकिन बंकित की मौत केबाद हम कोई आयोजन नहीं करेंगे।
देश से जेब्रा मिलना मुश्किल, विदेश से आने में लगेंगे महीनों
इस वक्त देश के तमाम चिड़ियाघरों में लगभग 25 की संख्या में नर, मादा और यूनीसेक्स जेब्रा हैं।
जू प्रशासन संस्कृति की मौत के बाद से ही केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के संपर्क में है। लेकिन कम संख्या में जेब्रा होने के चलते देश के जेब्रा का एक्सचेंज होने की संभावना न के बराबर ही है।
अधिकारी कानपुर में रह रही प्रदेश केइकलौती जेब्रा मादा ऐश्वर्य को लेकर भी प्लान कर रहे हैं, लेकिन अंतिम निर्णय पीसीसीएफ स्तर से ही हो सकेगा। निदेशक के मुताबिक हमने विदेशी जू से संपर्क करना शुरू कर दिया है। लेकिन इसमें महीनों का समय लग सकता है।
50.60 लाख हों तो आए नया जेब्रा
जू प्रशासन की ओर से बीते दिनों ऊपर भेजे गए एक प्रस्ताव के अनुसार 50.60 लाख रुपये हों तो जू में विदेश से जेब्रे का जोड़ा आ सकता है।
प्रस्ताव के तहत एक नर जेब्रा खरीदने पर 30 हजार डॉलर यानी 18.30 लाख रुपये खर्च करने होंगे। वहीं पिंजडे़ के निर्माण पर 5 लाख रुपये तो बाड़े की मरम्मत पर दो लाख रुपये का खर्च आएगा। यानी एक जेब्रा पर कुल 25.30 लाख रुपये खर्च करने होंगे।
जेब्रा बाड़े में पहुंचे सारस
जिराफ बाड़े के ठीक बगल में अचानक ही दो जेब्रा की मौतों के बाद से उनके खाली पड़े बाड़े में शुक्रवार शाम को ही दूसरे वन्यजीवों को शिफ्ट कर दिया गया। संस्कृति के बाड़े में दुर्लभ सारस के जोड़ों को को उतार दिया गया है, जबकि बंकित के बाड़े में अगले एक-दो दिनों में नया वन्यजीव उतारा जाना है।