{"_id":"5f302c3624bc9f37310b68e1","slug":"youth-of-lucknow-develop-app-during-corona-to-strengthen-education-system","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"चुनौतियों से दो-दो हाथ: ऑनलाइन परीक्षा को आसान बना रहा युवाओं का एप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चुनौतियों से दो-दो हाथ: ऑनलाइन परीक्षा को आसान बना रहा युवाओं का एप
Mon, 10 Aug 2020 11:10 AM IST
ishwar ashish
रोली खन्ना, अमर उजाला, लखनऊ
रोली खन्ना, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 10 Aug 2020 11:10 AM IST
विज्ञापन
चैतन्य मोहन व विश्वकीर्ति।
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कुछ करने का जज्बा हो तो चुनौतियां खुद ब खुद अवसर में तब्दील हो जाती हैं। इसे लगातार साबित कर रही है हमारी युवा पीढ़ी। राजधानी के गोमतीनगर निवासी चैतन्य मोहन और उनके दोस्त विश्वकीर्ति, विशाल दत्ता और शिखा इसका एक उदाहरण हैं।
कोरोना के चलते पैदा हुई आर्थिक चुनौतियों के बीच इन्होंने न केवल अपनी कंपनी खड़ी कर ली, बल्कि ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था की जरूरत को समझते हुए महज चार महीने में एक एप ‘एनडिफिक्स’ बना डाला। इसके जरिए गांव के स्कूल से लेकर यूनिवर्सिटी तक, भर्ती परीक्षाएं हों या फिर किसी भी तरह की प्रतियोगी परीक्षा, स्टूडेंट्स को इकट्ठा करने की जरूरत नहीं है। घर बैठे पढ़ाई ही नहीं अब परीक्षा भी संभव है। खास बात है कि गूगल प्ले स्टोर ने इसे स्वीकार कर लिया है और अपलोड होते ही फाइव स्टार रेटिंग भी मिल गई है।
विज्ञापन
सबसे पहले जानिए एप के बारे में
फिजिकल एग्जाम होगा ऑनलाइन : चैतन्य और विश्वकीर्ति बताते हैं कि अभी लंबे समय तक सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखनी होगी। फिजिकल एग्जाम को हमने ऑनलाइन बना दिया है। यह एप इसमें मदद करेगा।
स्कूल-विवि के बाद अब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी : चैतन्य कहते हैं कि फिलहाल ये एप स्कूल, विश्वविद्यालय और कॉलेज परीक्षा के लिए तैयार हैं। हम इस वक्त इसे, अंतरराष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं, यूपीएससी व अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने पर काम कर रहे हैं।
गांव के बच्चों की जरूरत होगी पूरी : चैतन्य बताते हैं कि इस एप के लिए लैपटाप जरूरी नहीं है। बस एंड्रायड फोन हो, सस्ता वाला भी चलेगा। इसे डाउनलोड कर गांव के बच्चे भी परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। विश्वकीर्ति का कहना है कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि गांव-बस्ती में रहने वाले भी टिकटॉक की मदद से वीडियो बनाकर अपलोड करना जानते हैं।
विज्ञापन
कोरोना के चलते पैदा हुई आर्थिक चुनौतियों के बीच इन्होंने न केवल अपनी कंपनी खड़ी कर ली, बल्कि ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था की जरूरत को समझते हुए महज चार महीने में एक एप ‘एनडिफिक्स’ बना डाला। इसके जरिए गांव के स्कूल से लेकर यूनिवर्सिटी तक, भर्ती परीक्षाएं हों या फिर किसी भी तरह की प्रतियोगी परीक्षा, स्टूडेंट्स को इकट्ठा करने की जरूरत नहीं है। घर बैठे पढ़ाई ही नहीं अब परीक्षा भी संभव है। खास बात है कि गूगल प्ले स्टोर ने इसे स्वीकार कर लिया है और अपलोड होते ही फाइव स्टार रेटिंग भी मिल गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे पहले जानिए एप के बारे में
फिजिकल एग्जाम होगा ऑनलाइन : चैतन्य और विश्वकीर्ति बताते हैं कि अभी लंबे समय तक सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखनी होगी। फिजिकल एग्जाम को हमने ऑनलाइन बना दिया है। यह एप इसमें मदद करेगा।
स्कूल-विवि के बाद अब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी : चैतन्य कहते हैं कि फिलहाल ये एप स्कूल, विश्वविद्यालय और कॉलेज परीक्षा के लिए तैयार हैं। हम इस वक्त इसे, अंतरराष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं, यूपीएससी व अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने पर काम कर रहे हैं।
गांव के बच्चों की जरूरत होगी पूरी : चैतन्य बताते हैं कि इस एप के लिए लैपटाप जरूरी नहीं है। बस एंड्रायड फोन हो, सस्ता वाला भी चलेगा। इसे डाउनलोड कर गांव के बच्चे भी परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। विश्वकीर्ति का कहना है कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि गांव-बस्ती में रहने वाले भी टिकटॉक की मदद से वीडियो बनाकर अपलोड करना जानते हैं।
अपलोड होते ही मिली पांच की रेटिंग
विशाल दत्ता व शिखा।
- फोटो : amar ujala
एंड्रायड पर हमारा एप काम करता है। 29 जून को इसे लॉन्च किया गया। महज एक महीने में हमारी रेटिंग 5 स्टार है। अमेरिकी कंपनियां जहां 50-60 हजार महीने लेकर एप सुविधा दे रही हैं, वहीं हम यह सुविधा 7999 में दे रहे हैं।
जानिए जरा इन युवाओं के बारे में
चैतन्य लखनऊ के गोमतीनगर में रहते हैं। लंदन से ग्रेजुएशन पूरा किया, कोरोना के कारण मार्च में लखनऊ लौटे। विश्वकीर्ति बुलंदशहर में हैं। शिखा व विशाल पंजाब में रहते हैं। सभी ग्रेजुएशन पूरा कर चुके हैं। गुड़गांव में इंटर्नशिप के दौरान इनकी दोस्ती हुई थी। लॉकडाउन में खाली बैठे-बैठे एप बना डाला। इकोबुक के नाम से कंपनी बनाई, बाकी सदस्यों की जिम्मेदारी बंटी हुई है।
ये भी हैं खासियत :
- सभी परीक्षाएं एक साथ एक ही स्थान से संभव।
- इसी पर प्रश्नपत्र बनाया जा सकता है और उत्तर पुस्तिका जांची जा सकती है।
- इसी पर अंक दिए जा सकते हैं।
- स्टूडेंट्स चाहें तो हाथ से लिखे मैटर को भी अपलोड कर सकते हैं।
- धोखाधड़ी से बचने और बचाने का ऑटोमेटिक इंतजाम है।
- लाइव क्लासरूम की सुविधा है, अन्य एप पर एक तय समय के बाद दोबारा शुरू करना पड़ता है, इसमें ऐसा नहीं है।
जानिए जरा इन युवाओं के बारे में
चैतन्य लखनऊ के गोमतीनगर में रहते हैं। लंदन से ग्रेजुएशन पूरा किया, कोरोना के कारण मार्च में लखनऊ लौटे। विश्वकीर्ति बुलंदशहर में हैं। शिखा व विशाल पंजाब में रहते हैं। सभी ग्रेजुएशन पूरा कर चुके हैं। गुड़गांव में इंटर्नशिप के दौरान इनकी दोस्ती हुई थी। लॉकडाउन में खाली बैठे-बैठे एप बना डाला। इकोबुक के नाम से कंपनी बनाई, बाकी सदस्यों की जिम्मेदारी बंटी हुई है।
ये भी हैं खासियत :
- सभी परीक्षाएं एक साथ एक ही स्थान से संभव।
- इसी पर प्रश्नपत्र बनाया जा सकता है और उत्तर पुस्तिका जांची जा सकती है।
- इसी पर अंक दिए जा सकते हैं।
- स्टूडेंट्स चाहें तो हाथ से लिखे मैटर को भी अपलोड कर सकते हैं।
- धोखाधड़ी से बचने और बचाने का ऑटोमेटिक इंतजाम है।
- लाइव क्लासरूम की सुविधा है, अन्य एप पर एक तय समय के बाद दोबारा शुरू करना पड़ता है, इसमें ऐसा नहीं है।