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पूर्व पीएम चंद्रशेखर की पुण्यतिथि पर बोले योगी : समाजवाद का विकृत रूप हैं परिवारवाद व जातिवाद
Tue, 09 Jul 2019 12:56 AM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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Published by: Amulya Rastogi
Updated Tue, 09 Jul 2019 12:56 AM IST
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- फोटो : amar ujala
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पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की पुण्यतिथि के बहाने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को समाजवादी पार्टी व अन्य क्षेत्रीय दलों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मार्केट में समाजवाद के कई ब्रांड देखने को मिल रहे हैं।
परिवारवाद और जातिवाद की आराजकता के रूप में समाजवाद के विकृत रूपों को उत्तर भारत ने दो दशकों तक झेला है। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर समाजवादी आंदोलन की आखिरी कड़ी थे, जिन्होंने सही मायने में समाजवाद के अनुरूप जीवन जीने का प्रयास किया था और उसके अनुरूप चले भी।
योगी सोमवार को समाजवादी नेता व पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की 12वीं पुण्यतिथि पर विश्वेश्वरैया सभागार में ‘चंद्रशेखर एवं राष्ट्रवाद’ विषयक गोष्ठी में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव ही राष्ट्रवाद है। यह किसी मत, जाति या संप्रदाय का बंधक नहीं है। चंद्रशेखर जीवनपर्यंत राष्ट्र की अस्मिता और अखंडता के लिए काम करते रहे।
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योगी ने कहा कि हमारी जाति, भाषा, क्षेत्र और संप्रदाय अलग-अलग हो सकते हैं लेकिन जब देश पर संकट आता है तो उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक पूरे देश की भाव-भंगिमा एक जैसी दिखती है। हमारी उपासना विधि अलग-अलग हो सकती है लेकिन जब कोई राष्ट्रीय अस्मिता को चुनौती देगा तो हम उसका डटकर मुकाबला करेंगे। इस भाव को चंद्रशेखर ने सदैव प्राथमिकता दी।
यही कारण था कि उन्होंने समान नागरिक कानून और स्वदेशी जागरण अभियान का समर्थन किया था। जब लोकतंत्र को बंधक बनाने का प्रयास किया गया तो कांग्रेस में रहते हुए तानाशाही का विरोध किया, भले पूरे आपातकाल उन्हें जेल में रहना पड़ा। संगोष्ठी में समाज कल्याण मंत्री रमापति शास्त्री समेत कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।
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परिवारवाद और जातिवाद की आराजकता के रूप में समाजवाद के विकृत रूपों को उत्तर भारत ने दो दशकों तक झेला है। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर समाजवादी आंदोलन की आखिरी कड़ी थे, जिन्होंने सही मायने में समाजवाद के अनुरूप जीवन जीने का प्रयास किया था और उसके अनुरूप चले भी।
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योगी सोमवार को समाजवादी नेता व पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की 12वीं पुण्यतिथि पर विश्वेश्वरैया सभागार में ‘चंद्रशेखर एवं राष्ट्रवाद’ विषयक गोष्ठी में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव ही राष्ट्रवाद है। यह किसी मत, जाति या संप्रदाय का बंधक नहीं है। चंद्रशेखर जीवनपर्यंत राष्ट्र की अस्मिता और अखंडता के लिए काम करते रहे।
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योगी ने कहा कि हमारी जाति, भाषा, क्षेत्र और संप्रदाय अलग-अलग हो सकते हैं लेकिन जब देश पर संकट आता है तो उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक पूरे देश की भाव-भंगिमा एक जैसी दिखती है। हमारी उपासना विधि अलग-अलग हो सकती है लेकिन जब कोई राष्ट्रीय अस्मिता को चुनौती देगा तो हम उसका डटकर मुकाबला करेंगे। इस भाव को चंद्रशेखर ने सदैव प्राथमिकता दी।
यही कारण था कि उन्होंने समान नागरिक कानून और स्वदेशी जागरण अभियान का समर्थन किया था। जब लोकतंत्र को बंधक बनाने का प्रयास किया गया तो कांग्रेस में रहते हुए तानाशाही का विरोध किया, भले पूरे आपातकाल उन्हें जेल में रहना पड़ा। संगोष्ठी में समाज कल्याण मंत्री रमापति शास्त्री समेत कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।
समाजवादियों ने नहीं सुनी लोहिया की बात
मुख्यमंत्री ने कहा, 1960 के दशक में डॉ. लोहिया कहते रहे कि जो सरकार देश की गरीब महिलाओं को ईंधन, शौचालय और आवास की व्यवस्था कर देगी, वह अजर-अमर हो जाएगी। 1967-68 के बाद कई समाजवादी नेता आए जिन्हें लंबे समय तक सत्ता में रहने का अवसर मिला लेकिन उन्होंने देश की गरीब जनता के लिए कुछ नहीं किया। इस कार्य को प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक, विचारक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया है। उन्होंने सवाल किया कि कितने लोग हैं जो चंद्रशेखर की तरह जेपी, लोहिया की सोच को अंगीकार कर पाए।
लोहिया व नरेंद्र देव के समाजवाद में मिलाई संस्कृति : दीक्षित
विधानसभा अध्यक्ष हृदय नरायण दीक्षित ने कहा कि चंद्रशेखर की कार्य पद्धति व काम करने का ढंग और विचार शैली आचार्य नरेंद्र देव के ज्यादा निकट थी। चंद्रशेखर ने आचार्य नरेंद्र देव और लोहिया के समाजवाद को मिलाकर उसमें भारतीय संस्कृति एवं भारत के परंपरागत राष्ट्रवाद को मिलाया।
लोहिया व नरेंद्र देव के समाजवाद में मिलाई संस्कृति : दीक्षित
विधानसभा अध्यक्ष हृदय नरायण दीक्षित ने कहा कि चंद्रशेखर की कार्य पद्धति व काम करने का ढंग और विचार शैली आचार्य नरेंद्र देव के ज्यादा निकट थी। चंद्रशेखर ने आचार्य नरेंद्र देव और लोहिया के समाजवाद को मिलाकर उसमें भारतीय संस्कृति एवं भारत के परंपरागत राष्ट्रवाद को मिलाया।
स्वदेशी व स्वावलंबन के पक्षधर थे चंद्रशेखर : खन्ना
नगर विकास एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि चंद्रशेखर स्वदेशी और स्वावलंबन के पक्षधर थे। राजनीति में लोग एक-दूसरे का चेहरा देखकर बोलते हैं, लेकिन संसद से लेकर सड़क तक चंद्रशेखर ने कभी इस बात की परवाह नहीं की कि सामने वाला क्या सोचेगा?
चंद्रशेखर की अगुआई में हुई कांग्रेस मुक्त भारत की शुरुआत : यशवंत
कार्यक्रम का संचालन कर रहे विधान परिषद सदस्य व पूर्व मंत्री यशवंत सिंह ने कहा कि वर्तमान में पूरे देश में कांग्रेस मुक्त भारत की बहस चल रही है। इसकी शुरुआत चंद्रशेखर की अगुआई में हुई थी। चंद्रशेखर जब जनता पार्टी के अध्यक्ष थे, तब आधे भारत में कांग्रेस का खाता नहीं खुला था।
चंद्रशेखर की अगुआई में हुई कांग्रेस मुक्त भारत की शुरुआत : यशवंत
कार्यक्रम का संचालन कर रहे विधान परिषद सदस्य व पूर्व मंत्री यशवंत सिंह ने कहा कि वर्तमान में पूरे देश में कांग्रेस मुक्त भारत की बहस चल रही है। इसकी शुरुआत चंद्रशेखर की अगुआई में हुई थी। चंद्रशेखर जब जनता पार्टी के अध्यक्ष थे, तब आधे भारत में कांग्रेस का खाता नहीं खुला था।