चुनाव में अखिलेश का एजेंडा रहे आगरा एक्सप्रेस वे पर योगी की टेढ़ी नजर, होगी जांच
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यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने समाजवादी पार्टी की सरकार में बने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस के भूमि अधिग्रहण में गड़बड़ियों की शिकायत की जांच कराने का फैसला किया है।
एक्सप्रेस-वे से संबंधित सभी 10 जिलों के डीएम से इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है। इस बीच एक्सप्रेस वे बनवाने वाली संस्था यूपीडा के वित्त नियंत्रक हटा दिए गए हैं।
यूपीडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) व प्रमुख सचिव सूचना अवनीश अवस्थी ने बताया कि आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस के भूमि अधिग्रहण को लेकर कुछ शिकायतें मिली हैं। इसके बाद संबंधित सभी दसों जिलों के जिलाधिकारियों को भूमि अधिग्रहण का रिव्यू करने को कहा गया है।
उनसे पूछा गया है कि प्रोजेक्ट शुरू होने के पूर्व के एक साल में कितने बैनामे हुए? इसके अलावा फिरोजाबाद में कृषि की जमीन को गलत तरीके से आबादी की दिखाकर ज्यादा मुआवजा दिलाने का मामला सामने आया है। इसमें 27 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। इसमें चकबंदी विभाग के अधिकारी भी आरोपी हैं।
सुप्रीम कोर्ट भी गया ये मामला
यह मामला सुप्रीमकोर्ट भी गया है। वहां यूपीडा ने अपना पक्ष रख दिया है। अन्य जिलाधिकारियों को भी देखना है कि उनके यहां भी तो इस तरह के मामले नहीं हैं?
कुछ लोगों की शिकायत है कि जमीन का बैनामा हो गया लेकिन उन्हें जमीन की रकम ही नहीं मिली। जिलाधिकारियों से इसका भी ब्यौरा मांगा गया है।
इसके अलावा इस एक्सप्रेस वे के लिए सिर्फ 14 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण बाकी है लेकिन जिलाधिकारियों के पास 150 करोड़ रुपये पड़े हैं।
डीएम से कहा गया है कि वे आवश्यकता से अधिक रकम तत्काल वापस कर दें। इसके अलावा इस 14 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किसानों से बातचीत कर तेजी से कराया जाए।
भूमि अधिग्रहण पर खर्च हुए 2591 करोड़
302 किमी. लंबे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे के निर्माण में करीब 11526.73 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसमें जमीन के अधिग्रहण में करीब 2591 करोड़ रुपये खर्च रकम भी शामिल है।
प्रोजेक्ट पर इस तरह के उठते रहे हैं सवाल
सवाल उठाए जाते रहे हैं कि इस प्रोजेक्ट के एनाउंस होने के पहले ही कुछ लोगों ने एक्सप्रेस-वे के एलाइनमेंट के आसपास की जमीन किसानों व अन्य लोगों से खरीदी।
कुछ दिन बाद ही जब इस प्रोजेक्ट का एलान हुआ तो उन्होंने सरकार को जमीन दी और सहमति के आधार पर काफी ऊंची रकम हासिल कर मालामाल हुए। आरोप लगाए जाते रहे हैं कि प्रोजेक्ट एनाउंस होने के पहले ही संबंधित क्षेत्र के चुनिंदा लोगों को इसकी जानकारी दी गई जिसका बाद में उन्हें भरपूर फायदा मिला।
विधान परिषद में तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने यह मामला उठाया था और इस एक्सप्रेस वे के भूमि अधिग्रहण में सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया था। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को इसके लिए निशाना बनाया था।
472 करोड़ एडवांस ड्रा करने पर फाइनेंस कंट्रोलर हटे
यूपीडा ने एक्सप्रेस वे केलिए स्वीकृत 472 करोड़ रुपये 31 मार्च को एडवांस में ड्रा कर लिए थे। यूपीडा के सीईओ अवनीश अवस्थी ने बताया कि इसे गंभीरता से लिया गया है और पैसा वापस कर दिया गया है।
इस संबंध में फाइनेंस कंट्रोलर एसके गुप्ता को हटा दिया गया है। इसकी पड़ताल कर रहे हैं। जरूरत होगी तो कार्रवाई भी करेंगे। प्रियरंजन कुमार यूपीडा के नए वित्त नियंत्रक बनाए गए हैं।
ये हैं 10जिले
आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, कानपुर नगर, उन्नाव, औरैया, कन्नौज, हरदोई और लखनऊ।